Tuesday, July 16, 2024

अमेरिका में हर महीने 1.75 लाख लोग होंगे बेरोजगार, अगले साल मंदी के साथ आएगा भयंकर बेरोजगारी संकट! भारत पर क्या होगा असर?

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AIN NEWS 1: बीता सितंबर अमेरिका के जॉब मार्केट के लिए मील का पत्थर साबित हुआ था। 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई, बढ़ती ब्याज दरों के बीच मंडराते मंदी के खतरे के बावजूद अमेरिका में बेरोजगारी दर 53 साल के न्यूनतम स्तर पर लुढ़क गई थी। सितंबर में 2.63 लाख नौकरियों के मिलने से बेरोजगारी दर 3.5 फीसदी पर लुढ़क गई थी जो 1969 के बाद का सबसे निचला स्तर है। लेकिन अब बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में एक डराने वाली आशंका जाहिर की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल की पहली छमाही यानी जनवरी-जून में अमेरिका मंदी की गिरफ्त में आ सकता है जिसके बाद देश में हर महीने 1.75 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं. बैंक ऑफ अमेरिका में यूएस इकनॉमिक्स के हेड माइकल गैपन ने अगले एक साल में अमेरिका में बेरोजगारी दर 5 से 5.5 फीसदी होने का अनुमान लगाया है। ये अनुमान इसलिए ज्यादा खतरनाक नजर आता है क्योंकि फेड ने अगले साल बेरोजगारी दर का अनुमान 4.4 फीसदी लगाया है।

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ब्याज दरों में बढ़ोतरी से फैलेगी मंदी-बेरोजगारी!

अमेरिका में महंगाई का हाल दुनिया के दूसरे विकसित देशों के जैसे ही नाजुक बने हुए हैं। 4 दशकों की सबसे ज्यादा महंगाई को थामने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व लगातार ब्याज दरों में इजाफा कर रहा है। बढ़ती ब्याज के इस चक्र से केवल अमेरिका ही नहीं दुनियाभर पर असर पड़ता है। निवेशकों के फैसले रातों रात फेड रिजर्व के एक निर्णय से बदल जाते हैं। दुनियाभर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल मच जाती है। इसकी वजह है कि अमेरिका की इकॉनमी का ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। फिलहाल अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बात करें तो बैंक ऑफ अमेरिका का कहना है कि ब्याज दरों में इजाफे का असर 2023 की शुरुआत से दिखाई देने लगेगा। हालात इतने भयानक हो सकते हैं कि हर महीने करीब पौने 2 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार फेड रिजर्व जिस आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है उससे जल्दी ही हर सामान की डिमांड घट सकती है।

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सबसे पहले गैर-कृषि क्षेत्रों में होगी छंटनी!

बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर-दिसंबर यानी मौजूदा तिमाही में जॉब ग्रोथ घटकर आधी रह सकती है। इसके बाद 2023 की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च में महंगाई को रोकने के लिए जारी फेड रिजर्व की ब्याज दरों को बढ़ाने समेत दूसरी मुहिम के नतीजे आने शुरु हो जाएंगे। इसके असर से 2023 की शुरुआत में गौर कृषि क्षेत्रों की नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। इससे पहली तिमाही में कुल सवा 5 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। यही नहीं ये सिलसिला 2023 में पूरे साल जारी रहने की भी आशंका है यानी करीब 21 लाख लोग 2023 में अपनी नौकरियां गंवा सकते हैं।

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मंदी से डर नहीं महंगाई रोकना प्राथमिकता

अमेरिका में अगर 40 साल की सबसे ज्यादा महंगाई है तो फिर इसे कंट्रोल करने के लिए फेड रिजर्व ने भी ब्याज दरों को बीते चार दशक में सबसे तेजी से बढ़ाया है। फेड रिजर्व के मुताबिक फिलहाल उनका टारगेट महंगाई को कंट्रोल करना है इसके असर से अर्थव्यवस्था के मंदी में आने का जोखिम भी लेना मजबूरी है। बैंक ऑफ अमेरिका में यूएस इकनॉमिक्स के हेड माइकल गैपन के मुताबिक लेबर मार्केट में 6 महीनों तक कमजोरी बनी रह सकती है। लेकिन ये कमजोरी 2008 या हाल में कोरोना के दौरान 2020 में बढ़ी बेरोजगारी दर जैसी नहीं होगी। अगर अभी बेरोजगारी दर से 5.5 फीसदी तक पहुंचने की आशंका है तो इसकी तुलना अप्रैल 2020 से करने पर डर का साया कुछ कम हो जाएगा क्योंकि ढाई साल पहले अप्रैल 2020 में अमेरिका में बेरोजगारी दर 15 फीसदी पर पहुंच गई थी।

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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