उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद में आवास विकास परिषद में करोड़ों के फ्लैट कौड़ियों के दाम ,लाख कोशिश पर भी नहीं बिक रहे!

0
828

AIN NEWS 1 Ghaziabad : बता दें उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा निर्मित वसुंधरा सेक्टर 15 की ही शिखर एंक्लेव सोसाइटी में आवास विकास परिषद द्वारा अब तक फ्लैटों की कीमत 15 फीसदी तक कम भी कर दिए गए हैं। इसके बावजूद भी वहा पर फ्लैट के खरीददार नहीं हैं। बताया तो यह जाता है कि घटिया निर्माण करने के कारण बायर्स इस ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं। घटिया निर्माण और ऊंची कीमत के कारण शासन को इस योजना में कई करोड़ों रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा है।

जान ले क्या है यह पूरा मामला

चल रही शिखर एनक्लेव परियोजना में कुल 216 फ्लैट ही बनाए हैं। यहां आवास विकास परिषद ने कुल दो बेडरूम फ्लैट की कीमत ही लगभग 1 करोड़ 3 लाख, जबकि 3 बेडरूम फ्लैट की कीमत 1 करोड़ 44 लाख रुपए तक रखी है। शिखर एनक्लेव 4 साल पहले ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन इन फ्लैटों को इनके मालिकों का अब तक भी इंतजार है। और तो और शिखर एंक्लेव के भीतर ही जगह-जगह से प्लास्टर भी झड़ना शुरू हो गया है। इस प्रोजेक्ट को देखने मात्र से ही ऐसा लगता है जैसे यह पूरा प्रोजेक्ट ही 25 से 30 वर्ष पहले पूरा किया गया हो। आप भी आवास विकास परिषद के कई लुभावने विज्ञापन देखकर अगर यहां फ्लैट खरीदना चाहते हैं तो पहले इसकी भौतिक स्थल पर जाकर जानकारी अवश्य ही कर लें।

यहां अभी भी आवंटियों की शिकायत पर भी नहीं हो रही कोई सुनवाई

इस सोसाइटी निवासी संदीप कुमार गुप्ता की मानें तो यहां आवास विकास परिषद की कार्यशैली जनहित में नहीं होकर निजी स्वार्थ की प्रवृत्ति को ही संरक्षित करने जैसी हो गई है। जिसके कारण समिति के लोगों को अब आवास विकास परिषद की उपेक्षा का शिकार भी होना पड़ रहा है। आवास विकास परिषद द्वारा निर्मित फ्लैट भी रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा के निशाने पर पूरी तरह से है। एक्सपर्ट की मानें तो रियल एस्टेट के विनियमन और विकास अधिनियम 2016 के तहत ही घर खरीददार के पास फ्लैट निर्माण संबंधी सूचना का अधिकार होने के साथ ही उसके कब्जे का अधिकार, रकम वापसी का अधिकार भी होता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण अधिकारों में दोष मामले का अधिकार भी इसमें शामिल है। इस अधिनियम के अनुसार यदि कब्जे के 5 साल के भीतर किसी संपत्ति की गुणवत्ता में कोई भी संरचनात्मक दोष या समस्या होती है, तो बिल्डर को खरीददार को बिना किसी अतिरिक्त लागत के 30 दिन के भीतर ही इन पूरे नुकसान को ठीक करना होगा। यदि संपत्ति के टाइटल में ही कोई दोष है तो खरीदार बिना किसी सीमा के कानून की धारा 18 (2) के तहत अपने लिए मुआवजे का दावा भी कर सकता है। परिषद द्वारा निर्मित शिखर एंक्लेव परियोजना की स्थिति भी कुछ अलग है। आवंटियों द्वारा घटिया निर्माण की सैकड़ों शिकायत करने के बावजूद भी आवास विकास परिषद इसमें कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here