Friday, June 21, 2024

ओवैसी ने हिजाब की तुलना सिंदूर और मंगलसूत्र से करते हुए इसे अल्लाह का फरमान बताया, कुरान का दिया हवाला

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1.हिजाब विवाद पर बोले असदुद्दीन ओवैसी

2.हिजाब की तुलना सिंदूर-मंगलसूत्र से की

3.कुरान का हवाला देकर अल्लाह का फरमान बताया

AIN NEWS 1: हिजाब विवाद को लेकर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी तुलना सिंदूर और मंगलसूत्र से की है।

ओवैसी ने कहा कि यूनिफॉर्म के साथ इनकी

इजाजत मिलती है। ऐसे में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने से रोकना गलत है। हिजाब बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बंटी हुई राय दी थी जिसके बाद हिजाब बैन के मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाएगा। लेकिन हिजाब के मसला ने एक बार फिर राजनीतिक रंग अख्तियार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट एकमत से हिजाब के पक्ष में फैसला देगा। लेकिन इस मुद्दे पर न्यायाधीशों की राय अलग रही है जिसके हम सम्मान करते हैं। जस्टिस धूलिया ने कहा कि पसंद बहुत बड़ी चीज होती है और इसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आर्टिकल 14 और 19 का जिक्र करते हुए उन्होंने अपना फैसला लिखा है।

औवेसी ने हिजाब मामले में भाजपा पर निशाना साधा

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हिजाब को भाजपा ने बिना मतलब के मुद्दा बना दिया है जबकि ये लड़कियों की खुद की पसंद का मामला है। ओवैसी ने हिजाब की तुलना पगड़ी, सिंदूर और मंगलसूत्र से की है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप ड्रेस में एक सिख लड़के को पगड़ी पहनने की इजाजत देते हैं और हिंदू लड़की को सिंदूर लगाने, मंगलसूत्र पहनने की छूट देते हैं, लेकिन मुस्लिम लड़कियों को हिजाब की मंजूरी नहीं देते हैं तो ये साफतौर पर भेदभाव है। ओवैसी
ने कहा कि अगर बच्चे एक-दूसरे की धार्मिक परंपराओं को नहीं देखेंगे तो वो कैसे विविधता के महत्व को समझेंगे। यह जरूरी है कि बच्चे स्कूल में ही सभी परंपराओं को समझें। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस्लाम में हिजाब अनिवार्य है। अल्लाह और कुरान ने हिजाब और निकाब को हुक्म बताया है। कोई अगर हिजाब नहीं पहनना चाहता है तो वो उसकी मर्जी है, लेकिन यदि किसी की इच्छा है तो उसे पहनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्लाह का कुरान
में फरमान है कि लड़कियां हिजाब पहनें। ओवैसी ने कहा कि क्या मैंने कभी कहा कि मैं उसी एंकर से बात करूंगा, जिसने हिजाब नहीं पहना हो।

सपा सांसद ने हिजाब पर रोक को गलत बताते हुए कहा कि चॉइस जरूरी है

इसी मामले पर बोलते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य यास्मीन फारूकी ने कहा कि दो जजों की राय अलग थी। इससे पता चलता है कि दो लोगों की राय अलग हो सकती है। फारूकी ने कहा कि धर्म को कितना मानना है और कितना नहीं, यह एक पसंद की बात है। यास्मीन ने कहा कि मेरी मां हिजाब पहनती थी, लेकिन मैं दुपट्टा लेती हूं। मेरी बेटी जींस भी पहनती है। यह तो पसंद का मामला है। वहीं, सपा के सांसद एसटी हसन ने कहा कि
जहां तक हिजाब का सवाल है तो किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। कोई पहने या न पहने, यह लड़कियों के ऊपर छोड़ देना चाहिए।

सपा के एक दूसरे सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा था कि यदि लड़कियां हिजाब नहीं पहनेंगी तो आवारा हो जाएंगी।

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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