Wednesday, July 24, 2024

गजवा-ए-हिंद को पूरा करने के लिए अपने संगठन में नए आतंकी करते थे भर्ती,ATS ने 8 आतंकवादियों को किया गिरफ्तार

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AIN NEWS 1: बता दें पिछले दिनों यूपी ATS ने आतंकी संगठन अलकायदा और उसके सहयोगी बांग्लादेशी संगठन जिसका नाम जमात-उल-मुजाहिद्दीन है। उस के 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। दोनों संगठन अपना एक ही मक़सद गजवा-ए-हिंद को पूरा करने के लिए अपने संगठन में नए आतंकी भर्ती करते थे। ATS ने इन आतंकियों को हरिद्वार, मेरठ और नेपाल बार्डर से छापेमारी में गिरफ्तार किया है। इनके पास से आतंकी संगठनों से जुड़े हुए काफ़ी दस्तावेज मिले हैं। साथ ही खातों में टेरर फंडिंग से जुड़े लेन-देन के भी काफ़ी सबूत मिले हैं।

ये संगठन मदरसों के सहारे नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश

ATS के मुताबिक, सूचनाओं के आधार पर सहारनपुर के लुकमान, मो. अलीम और मो. मुख्तार, हरिद्वार के अलीनूर व मुद्दस्सिर, देवबंद से कामिल, शामली से कारी सहजाद और झारखंड के नवाजिश को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग भारत में अवैध घुसपैठ कर सीमावर्ती राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में कट्टरपंथी विचारधारा वाले ज्यादा से ज्यादा व्यक्तियों को अपने साथ जोड़ रहे थे।

बता दें ये सभी आतंकी वहां के मदरसों के जरिए अपना नेटवर्क बना रहे थे। इनसे जुड़े लोगों के विषय में पूरी जानकारी की जा रही है। कैसे ये लोग यूपी और उसकी सीमी से जुड़े राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रहे थे और इनकी मंशा क्या थी। इस बारे में पड़ताल की जा रही है।

ये टेरर फंड से आतंकी हमले की कर रहे थे तैयारी

सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आतंकी यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में कट्टरपंथी विचारधारा वालों के सहयोग से जकात के नाम पर अधिक से अधिक टेरर फंड जुटाने में लगे हैं। बांग्लादेशी आतंकी अपना नाम बदल कर खुफिया तौर पर रहते थे। ये सभी कट्टरपंथी विचारधारा के व्यक्तियों को केवल जिहाद के नाम पर भड़का रहे थे।

अलग अलग मोबाइल का करते थे इस्तेमाल

इन संगठनों के आतंकी पुलिस एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए कुछ खास किस्म की मोबाइल एप इस्तेमाल करते हैं। साथ ही नए लोगों को इस एप और बातचीत करने के कोड का पूरा प्रशिक्षण देते थे। पुलिस एवं अन्य एजेंसियों से बचने के लिए कुछ खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे आतंकवादी । गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में से पांच सहारनपुर के ही रहने वाले हैं। इसके अलावा एक झारखंड का रहने वाला है, एक उत्तराखंड और एक संदिग्ध बांग्लादेश का निवासी है।

बता दें सहारनपुर का ही रहने वाला है लुकमान इमरान

लुकमान ने अहसान बांग्लादेशी और मुफक्किर बांग्लादेशी से जुड़कर उसके मदरसे दारे अरकम, सैय्यद मजरा गागलहेड़ी में ही अपना ठिकाना बनाया था। लुकमान ने आतंकी अब्दुल तल्हा (बांग्लादेशी) को अपने यहां 11 महीने तक रखा था। इन्होंने उसे मदरसा शिक्षक के रूप में पैसा भी दिया। लुकमान के पास से चार जिहादी किताबें, आतंकी कंटेंट की पेन ड्राइव और दो मोबाइल बरामद हुए।

ज्ञात हो शामली का रहने वाला है शहजाद

सितंबर, 2021 में हुए शामली बम कांड में कारी शहजाद बम बनाने के आरोप में ही गिरफ्तार हुआ था। वह अहसान बांग्लादेशी, लुकमान और कारी मुख्तार के साथ भोपाल स्थित ठिकाने पर छिप कर रहा था।

इस पर मदनी बोले- हिंदुस्तान में तो हजार साल पहले ही गजवा-ए-हिंद हो चुका है

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अरशद मदनी कहते हैं कि हिंदुस्तान में तो पहले ही गजवा-ए-हिंद पहले ही हो चुका है। यह तो बाबर के जमाने में हो चुका है। बाबर ने यहां आकर डेरा डाल दिया था। हिंदुस्तान के अंदर मुसलमानों की यह जंग ही गजवा-ए-हिंद है। यह जंग तो बहुत पहले ही हो चुकी है। 800 साल तक जो हिंदुस्तान पर हुकूमत की गई, वह यही तो था।तो जो पहले ही हो चुका है। अब कौन आएगा गजवा-ए-हिंद करने। जानबूझकर वैमनस्य पैदा करने के लिए ये बातें उछाली जाती हैं।
क्या यह मुमकिन है कि पाकिस्तान आकर हिंदुस्तान पर हुकूमत करेगा? क्या बांग्लादेश आकर भारत पर कब्जा कर लेगा? कौन सा ऐसा मुल्क है जो हिंदुस्तान पर कब्जा कर लेगा? क्या चीन गजवा-ए-हिंद करेगा? यह कुछ नहीं है। सिर्फ इसके जरिए मुसलमानों के खिलाफ दीवार खड़ी करने की ही कोशिश हो रही है।

यह क्षेत्रीय लोगों को आतंकी संगठन से जोड़ता था

मो. मुख्तार अहसान, मुफक्किर, लुकमान, अलीम व शहजाद का साथी है। यह इन लोगों को क्षेत्रीय लोगों से मिलाने के साथ रहने की जगह भी उपलब्ध कराता था।

यह टेरर फंडिंग का खाते में मंगाता था पैसा।

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मुदस्सिर ने तल्हा बांग्लादेशी और अलीनूर को सलेमपुर, हरिद्वार में ही शरण दी। तल्हा ने मुदस्सिर को आतंकी कामों के लिए 80 हजार रुपए भी दिए।

ज्ञात हो देवबंद का रहने वाला हैं कालिम

यह आतंकियों को दिलाता था घर।
कामिल हरिद्वार दादोपुर, सलेमपुर में मुदस्सिर के साथ गिरफ्तार किया गया। यह अलीनूर बाग्लादेशी और तल्हा बांग्लादेशी को सलेमपुर में किराये का घर दिलाते हुए इसने ही शरण दी। इसके एकाउंट में अब्दुल्ला तल्हा ने टेरर फंडिंग के लिए ढाई लाख रुपया मंगवाया था।

अलीनूर बांग्लादेशी

 

अलीनूर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ पानखीउड़ा मदरसे, ग्वालपाड़ा, असम में शिक्षक के रूप में रहा। बाद में यह आतंकी तल्हा (बाग्लादेशी) मुदस्सिर और कामिल की मदद से सलेमपुर (हरिद्वार) में ही छिप कर रह रहा था।

झारखंड का रहने वाला हैं नवाजिश अंसारी

नवाजिश को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। नवाजिश को अकील शेख (NIA भोपाल द्वारा पूर्व से गिरफ्तार) ने आतंकी तजीम का सक्रिय सदस्य बनाया था।

मोहम्मद अलीम निवासी कैलाशपुर, सहारनपुर

आतंकी संगठन का सक्रिय सदस्य।
मोहम्मद अलीम को अहसान बांग्लादेशी ने आतंकी तंजीम का सक्रिय सदस्य बनाया था। अलीम ने आतंकी अहसान (बांग्लादेशी) को लुकमान, शहजाद और कारी मुख्तार से भी मिलवाया था।

ATS ने आठों आरोपियों की पहचान लुकमान पुत्र इमरान, निवासी सहारनपुर, शहजाद पुत्र इसरार निवासी शामली, कारी मुख्तार पुत्र अयूब खान निवासी सहारनपुर, मुदस्सिर पुत्र अब्दुर्रहमान निवासी हरिद्वार, कामिल पुत्र यासीन सहारनपुर, अलीनूर, नवाजिश अंसारी पुत्र मुनव्वर अली निवासी झारखंड और मोहम्मद अलीम पुत्र मोहम्मद सलीम निवासी सहारनपुर के रूप में की है।

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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