गढ़मुक्तेश्वर गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा-बुग्गी नहीं ले जा पाएंगे। पशुओं में चल रही लंपी बीमारी के कारण स्थानीय प्रशासन का आदेश

गढ़मुक्तेश्वर गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा-बुग्गी नहीं से नही जा पाएंगे। पशुओं में चल रही लंपी बीमारी के कारण स्थानीय प्रशासन ने मेले में...

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AIN NEWS 1: गढ़मुक्तेश्वर गंगा मेले में इस बार श्रद्धालु भैंसा-बुग्गी नहीं से नही जा पाएंगे। पशुओं में चल रही लंपी बीमारी के कारण स्थानीय प्रशासन ने मेले में पशुओं के प्रवेश पर पुर्ण रोक लगाई है। हापुड़ की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने डीएम मेरठ को पत्र भेज कर अवगत कराया है कि बड़ी संख्या में मेरठ के श्रद्धालु गढ़ गंगा मेले में हर वर्ष शामिल होते हैं, ऐसे में समय रहते उन्हें जागरूक किया जाए। भैंसा-बुग्गी अथवा किसी भी जानवर को मेले में प्रवेश करने की अनुमति बिलकुल भी नहीं दी जाएगी।

उधर, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इस निर्णय को बेहद बेतुका बताया है।

बता दें डीएम ने दिया जिलाधिकारी हापुड़ के पत्र का हवाला

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने डीएम हापुड़ के पत्र के हवाले से बताया कि सभी जनपदों में पशुओं में बेहद घातक वायरल बीमारी लंपी स्किन डिजीज का बहुत ज्यादा प्रकोप है। मेले में पशुओं के एक स्थान पर एकत्र होने से यह बीमारी अन्य सभी संपर्क में आने वाले पशुओं में फैलने की बेहद संभावना है। डीएम ने साफ किया है कि मेले में भैंसा-बुग्गी के साथ प्रवेश बिलकुल नहीं करने दिया जाएगा। ऐसा करने की कोशिश करने वालों पर जुर्माने की भी कार्रवाई होगी। मेले में मुख्य रूप से किसानों की ही भागीदारी होती है। अधिकतर किसान भैंसा-बुग्गी और ट्रैक्टर-ट्रालियां के साथ मेले में तंबुओं के शहर बसाते हैं और उन्ही मे रहते हैं।

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29 अक्टूबर से मेले का आयोजनडीएम हापुड़ के पत्र में कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर 29 अक्टूबर से गढ़मुक्तेश्वर में गंगा किनारे मेले का आयोजन किया जाना है। मेले में आसपास के राज्यों और जनपदों से लगभग 20-25 लाख श्रद्धालु भाग लेते हैं। मेले के साथ-साथ मेले में अश्व प्रदर्शनी और क्रय-विक्रय का कार्य भी होता रहा है। इस बार शासन के निर्देशों पर मेले में अश्व प्रदर्शनी-क्रय विक्रय पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। श्रद्धालुओं से गंगा स्नान मेले में किसी भी घोड़े, गधे, खच्चर, गाय, बैल व भैंस को न ले जाने और किसी भी प्रकार की पशु प्रदर्शनी का आयोजन नहीं कराने की अपील की गई है। इन्होंने कहा,

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मेरठ जनपद से काफी संख्या में श्रद्धालु गढ़मुक्तेश्वर गंगा मेले में हर वर्ष हिस्सा लेते हैं। सभी श्रद्धालुओं से अपील है कि वह पशुओं को मेले में न ले जाएं। भैंसा-बुग्गी के प्रवेश पर तो पूर्ण रोक लगाई गई है। किसानों, व्यापारियों और पशु विक्रेताओं से अपील है कि कानून का पालन करें और मेले के आयोजन में हापुड़ जिला प्रशासन का पूरा सहयोग करें।

यह बेतुका निर्णय है, इस पर विचार कर हापुड़ प्रशासन को इसे वापस लेना चाहिए। यह हमारी संस्कृति एवं सभ्यता से जुड़ा हुआ है। प्रशासन को ऐसे निर्णय लेने के बजाय लंपी बीमारी की रोकथाम की व्यवस्था बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

-चौधरी नरेश टिकैत, अध्यक्ष भाकियू

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