गुजरात के मोरबी शहर में माच्छू नदी पर क्यों टूटा पुल? पढ़िए ब्रिज के टूटने से जुड़े कुछ बड़े खुलासे

गुजरात के मोरबी शहर में माच्छू नदी पर रविवार शाम 140 साल पुराने पुल के ढह जाने के पीछे कुछ शरारती युवकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस हादसे में लगभग 190 लोगों की मौत की आशंका है जिनमें से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। शाम करीब 6.30 बजे केबल सस्पेंशन ब्रिज टूटने से लगभग 400 लोग मच्छु नदी में गिर गए थे।

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मोरबी में माच्छू नदी पर टूटा पुल

हादसे पर 1 दर्जन खुलासे

मोदी घटनास्थल पर जाएंगे

AIN NEWS 1: गुजरात के मोरबी शहर में माच्छू नदी पर रविवार शाम 140 साल पुराने पुल के ढह जाने के पीछे कुछ शरारती युवकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस हादसे में लगभग 190 लोगों की मौत की आशंका है जिनमें से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। शाम करीब 6.30 बजे केबल सस्पेंशन ब्रिज टूटने से लगभग 400 लोग मच्छु नदी में गिर गए थे। इस हादसे में राजकोट से भाजपा सांसद मोहन कुंदरिया के परिवार के 12 लोगों की जान चली गई है। हादसे के कुछ वीडियोज भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिसमें लोग टूटे पुल से ऊपर चढ़ते दिख रहे हैं। हादसे की वजह पुल पर भारी भीड़ के अलावा कुछ शरारती युवकों द्वारा जानबूझकर उसे हिलाना माना जा रहा है।

मरम्मत-रिनोवेशन के बाद 4 दिन पहले खोला गया पुल

अफसरों ने बताया कि व्यापक मरम्मत और रिनोवेशन के बाद 4 दिन पहले ही पुल फिर से खोला गया था। पुल रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे ढह जाने के समय लोगों की भीड़ से भरा था। चश्मदीदों के मुताबिक ब्रिटिश काल के हैंगिंग ब्रिज पर कई महिलाएं और बच्चे थे जब वह नीचे पानी में गिर गया। एक चश्मदीद ने कहा कि कुछ लोगों को पुल पर कूदते और उसके बड़े तारों को खींचते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि भारी भीड़ की वजह से पुल गिर गया हो। उन्होंने बताया कि पुल गिरने पर लोग एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े।

डूबते हुओं को बचाने के लिए पानी में कूदे लोग

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा मैं अपने ऑफिस के बाद दोस्तों के साथ नदी के किनारे आया था जब हमने पुल के टूटने की आवाज सुनी। एक चश्मदीद ने कहा कि हम वहां पहुंचे और लोगों को बचाने के लिए पानी में कूद गए। हमने कुछ बच्चों और महिलाओं को बचाया। हादसे में घायल हुए एक व्यक्ति ने कहा कि दुर्घटना अचानक हुई और पुल पर बहुत ज्यादा लोगों की आवाजाही इसकी वजह लगती है। टूटने के बाद मेटल के कैरिजवे यानी पुल पर चलने वाली जगह का हिस्सा एक तरफ से नीचे गहरे पानी में लटक गया था और इसकी केबल जगह-जगह से टूट चुकी थी।

ह्यूमन चेन बनाकर अस्पताल में रोकी भीड़

स्थानीय अस्पताल में लोगों ने भीड़ रोकने के लिए एक मानव श्रंखला बनाई और एम्बुलेंस के लिए रास्ता साफ रखा, जिससे बचाए गए लोगों को लाया गया। गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि पुल टूटने के मामले में धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (जानबूझकर मौत का कारण बनना) और 114 (अपराध होने पर उपस्थित होना) के तहत FIR दर्ज की गई है। उन्हों कहा कि जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संघवी ने कहा कि पुल ढहने की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी बनाई गई है। इसमें सड़क एवं भवन विभाग के सचिव संदीप वसावा और चार दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।

पुल हिलाने वालों से डरकर वापस लौटे लोग

कई लोग तो पुल पर जाने के बाद उसके हिलने और असुरक्षित लगने की वजह से डरकर आधे रास्ते से ही वापस लौट आए। युवकों के पुल को हिलाने से लोगों के लिए उस पर संतुलन बनाकर चलना मुश्किल हो रहा था। हालांकि इस बारे में लोगों की चेतावनी को पुल के कर्मचारियों ने नजरंदाज कर दिया। हादसे के होने और उसमें ज्यादा जान जाने की वजह त्योहारों की छुट्टियां और रविवार की वजह से एकाएक पुल पर बढ़ी भीड़ थी। 26 अक्टूबर को गुजराती नए साल पर जनता के लिए फिर से खोले जाने से पहले एक निजी संचालक ने करीब 6 महीने तक पुल की रिपेयर का काम किया था।

फिटनेस प्रमाणपत्र आए बिना खोल दिया पुल

एक अफसर के मुताबिक मरम्मत का काम पूरा होने के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया गया। लेकिन स्थानीय नगरपालिका ने अभी तक कोई फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था। एक फायर ब्रिगेड अधिकारी के मुताबिक लोगों को नदी से निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल देर रात दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और सिविल अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि पुल गिरने से घायल हुए लोगों के इलाज के लिए सिविल अस्पताल में एक आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।

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मृतकों और घायलों के परिजनों को मुआवजा

गुजरात सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने का एलान किया है। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स ने तीन टीमों को मोरबी जिले में तैनात किया है। एक अफसर के मुताबिक डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ समेत सेना का एक दल दुर्घटनास्थल पर पहुंच गया था, जबकि नौसेना ने बचाव अभियान के लिए 40 से ज्यादा कर्मियों की एक टीम भेजी गई।

 

सभी राजनीतिक दलों ने जताया दुख

प्रधान मंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अधिकारियों से बात की है। पीएम इस वक्त गुजरात में हैं। मोदी ने बचाव दलों को तुरंत जुटाने की मांग की और कहा कि हालात की लगातार निगरानी की जाए और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद दी जाए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पुल ढहने पर दुख व्यक्त किया और दूसरों के सुरक्षित बचाव की प्रार्थना की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वह पुल गिरने से बहुत दु:खी हैं और उन्होंने राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं से बचाव कार्य में हर संभव सहायता देने की अपील की है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि पुल गिरने की खबर बेहद दु:खद है।

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