त्योहारी सीजन में कारों की बिक्री ने किया कमाल, पहले नवरात्र से लेकर दिवाली तक जमकर हुई कारों की बिक्री!

फेस्टिव सीजन में कारों की बिक्री 2 साल बाद कार मेकर्स के लिए शानदार रही है. हालांकि ये अभी भी 2019 के मुकाबले कम है

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दिवाली पर जमकर बिकी कारें

2 साल बाद कार कंपनियों की मनी दिवाली

2019 से कम है कारों की बिक्री

AIN NEWS 1: इस बार के फेस्टिव सीजन में कारों की बिक्री 2 साल बाद कार मेकर्स के लिए शानदार रही है. हालांकि ये अभी भी 2019 के मुकाबले कम है लेकिन 2020 और 2021 की तुलना में ये इस साल बेहतर रही है. अगर पिछले साल से मुकाबला करें तो नवरात्रि से लेकर दिवाली तक देशभर में कुल 4 लाख कारों की डिलीवरी की गयी है. जबकि 2021 में पहले नवरात्र से लेकर दिवाली तक पौने 3 लाख यूनिट्स की डिलीवरी की गई थी. ओणम से लेकर दिवाली तक के त्योहारी सीजन में होने वाली कुल बिक्री साल भर की कुल बिक्री के 25 फीसदी से ज्यादा रहती है.

 

डबल डिजिट में बढ़ी टॉप-4 कंपनियों की बिक्री

अगर कार कंपनियों के हिसाब से बिक्री में बढ़ोतरी को समझें तो मारुति, हुंडई और टाटा समेत टॉप 4 कार मेकर्स जिनकी कुल बिक्री में 80 फीसदी हिस्सेदारी है उन्होंने इस बार के फेस्टिव सीजन में डबल डिजिट्स में ग्रोथ किया है. मिसाल के तौर पर मारुति ने पिछले साल के 1.3 लाख यूनिट्स के मुकाबले इस बार 1.9 लाख कारों की डिलीवरी की है. मारुति के पास 4.4 लाख यूनिट्स की बुकिंग पेंडिंग है और पूरी ऑटो इंडस्ट्री के पास सवा 8 लाख यूनिट्स की बुकिंग पेंडिंग है.

धनतेरस, छोटी दिवाली और दिवाली पर जोरदार बिक्री

फेस्टिव सीजन में वैसे तो नवरात्र से लेकर दिवाली तक कई दिन शुभ माने जाते हैं लेकिन सबसे ज्यादा शुभ धनतेरस, छोटी दिवाली और दिवाली को माना जाता है. इस बार इन तीन दिनों में 54 हज़ार कारों की डिलीवरी की गयी है जबकि 2019 में 70 हज़ार कारों की डिलीवरी हुई थी. मारुति ने पिछले साल के 20 हज़ार के मुकाबले 23 हज़ार यूनिट की डिलीवरी की है जबकि 2019 में ये आंकड़ा 30 हज़ार यूनिट्स था.

2 साल से फेस्टिव सीजन पर वेडिंग सीजन भारी पड़ा

कोरोना के 2 साल में कारों की बिक्री के मामले में नवंबर आगे रहा था. इसकी वजह थी कि कोरोना की वजह से त्योहारों को लेकर लोगों में ज्यादा उत्साह नहीं था और शादियों के तय हो जाने के बाद तो लोगों को उनमें बजट के हिसाब से खर्च करना ही पड़ता है. इसके अलावा सेमीकंडक्टर की कमी की वजह से त्योहारों में खरीदारी करने वाले लंबी वेटिंग की वजह से फैसला टाल रहे थे. जबकि शादियों में तो कार खरीदना हर हाल में जरुरी होता है जिसके लिए लोग या तो पहले बुकिंग करा देते हैं या फिर कम वेटिंग वाली कारों को चुन लेते हैं जिससे कुल बिक्री का आंकड़ा बढ़ाने में मदद मिलती है. ऐसे में इस बार भी अक्टूबर और नवंबर के पूरे महीने के आंकड़ों के सामने आने के बाद ही पता चल सकेगा कि वेडिंग और फेस्टिव में कौन सा सीजन किस पर भारी पड़ा है.

वेटिंग पीरियड घटने से भी बढ़ी बिक्री

कई गाड़ियों पर सेमीकंडक्टर संकट की वजह से चली आ रही लंबी वेटिंग भी अब कम हो गई है. ऐसे में लोगों के पास खरीदने के लिए ज्यादा कारों के विकल्प होने से भी कारों की बिक्री बढ़ी है. इस बार वेटिंग को लेकर हालत ये थी कि आमतौर पर त्योहारी मौसम में जो इन्वेंटरी पीरियड 45-50 दिन होता था वो अब 25 दिन रह गया है. लेकिन कुछ गाड़ियों की डिमांड और प्रॉडक्शन में भारी अंतर के चलते उनका वेटिंग पीरियड 1 साल तक है. कम लोकप्रिय कारों के लिए औसतन 3 महीने का वेटिंग पीरियड है. ग्राहकों को सबसे ज्यादा इंतज़ार महिंद्रा की स्कॉर्पियो-N, XUV 700, मारुति की बलेनो, ऑल्टो और स्विफ्ट, टाटा की नेक्सन, पंच और हुंडई की क्रेटा, वेन्यू, आई-10 जैसी कारों के लिए करना पड़ रहा है.

 

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सुधार से भी तुरंत मिलते हैं आंकड़े

2019 में भी दिवाली अक्टूबर महीने में ही थी लेकिन उस वक्त सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन नवंबर में किये गये थे. दरअसल, उस वक्त तक बिक्री और रजिस्ट्रेशन के बीच में कई दिनों का अंतर होता था जो अब घटकर महीनों और दिनों की जगह महज कुछ घंटे रह गया है. इसकी वजह है कि अब वाहन पोर्टल से देश भर के तमाम राज्य जुड़ गए हैं. ऐसे में बिक्री के सटीक आंकड़ों को आने में ज्यादा समय नहीं लगता है और वाहनों की बिक्री का तुरंत अंदाजा लग जाता है. अब देखना यही है कि फेस्टिव सीजन के बाद नवंबर में शुरु हो रहा शादियों का मौसम कैसा रहने वाला है क्योंकि तेजी का जो आलम त्योहारों में बनता है उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वेडिंग सीजन की होती है.

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