धनतेरस पर किस वक्त करें खरीदारी और पूजा, हो जाएंगे मालामाल?

धनतेरस के दिन सोने, चांदी के गहने और धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा है। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 22 अक्टूबर 2022 को शाम 6 बजकर 02 मिनट से शुरू हो रही है। 23 अक्टूबर 2022 को त्रयोदशी तिथि शाम 06 बजकर 03 मिनट पर खत्म होगी। आज त्रिपुष्कर योग बन है। धनतेरस की शाम को भगवान धन्वंतरि की पूजा और दीपदान किया जाएगा।

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AIN NEWS 1: बता दें 22-23 अक्तूबर को 2 दिन धनतेरस मनाया जा रहा है। धनतेरस के दिन सोने, चांदी के गहने और धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा है। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 22 अक्टूबर 2022 को शाम 6 बजकर 02 मिनट से शुरू हो रही है। 23 अक्टूबर 2022 को त्रयोदशी तिथि शाम 06 बजकर 03 मिनट पर खत्म होगी। आज त्रिपुष्कर योग बन है। धनतेरस की शाम को भगवान धन्वंतरि की पूजा और दीपदान किया जाएगा।

किस शहर में क्या है धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त?

शहर पूजा का समय
नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली 06:58-08:15
लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज 06:55-08:18

धनतेरस 2022 आज रात का शुभ चौघड़िया मुहूर्त

लाभ-उन्नति: 05:45-07:20

शुभ-उत्तम: 08:55-10:30

अमृत-सर्वोत्तम: 10:30-12:06

चर-सामान्य: 12:06-01:41

लाभ-उन्नति: रविवार सुबह 04:51-06:27

धनतेरस की पूजा के लिए मंत्र

कुबेर मंत्र – श्रीं, ॐ हीं श्रीं, हीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:

अष्टाक्षर मंत्र- ॐ वैश्रवणाय स्वाहा:

पंच त्रिंशदक्षर मंत्र- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धनधान्या समृद्धि देहि मे दापय दापय स्वाहा

विनियोग- अस्य श्री कुबेर मंत्रस्य विश्वामित्र ऋषि:वृहती छन्द शिवमित्र धनेश्वरो देवता समाभीष्टसिद्धयर्थ जपे विनियोग:।

मनुजवाहा विमानवरस्थितं गुरूडरत्नानिभं निधिनाकम्। शिव संख युक्तादिवि भूषित वरगदे दध गत॑ भजतांदलम्।।

धनतेरस पर किस कथा को सुनने से 13 गुना बढ़ेगा धन

धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा के हिसाब से श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी गोलोक में भ्रमण के लिए निकले। श्रीहरी ने दक्षिण दिशा में जाने की इच्छा जताई तो वो लक्ष्मी जी को उचित स्थान पर बिठाकर खुद दक्षिण दिशा की ओर चल पड़े। लेकिन माता लक्ष्मी नहीं मानीं और वो उनके पीछे चल दीं। माता लक्ष्मी ने एक जगह पहुंचकर एक किसान के खेत से फूल लेकर श्रृंगार किया और इसके साथ ही गन्ने के रस का रसपान किया। जैसे ही श्री हरि विष्णु ने उन्हें देखा तो वह गुस्सा हो गए और आवेश में आकर उन्होंने मां लक्ष्मी को श्राप दिया कि वह 12 साल तक किसान की सेवा करेंगी। इसके बाद देवई लक्ष्मी ने 12 बरसों तक किसान की सेवा की। 12 साल बाद जब विष्णु जी माता लक्ष्मी को लेने आए तब माता ने किसान से कहा कि त्रयोदशी की रात में घी का दीपक जलाकर तांबे के कलश में रुपए और पैसे भरकर मेरी पूजा करें। ऐसा करने से पूरे साल मैं यहीं रहूंगी। मान्यता है कि तभी से धनतेरस मनाया जाता है।

धनतेरस पर क्या नहीं करना चाहिए?

धनतेरस पर जितना हो सके इंवस्टमेंट करें लेकिन खर्च ना करें। धनतेरस पर किसी को उधार नहीं दें। धनतेरस पर मुहूर्त के हिसाब से ही खरीदारी करें। लोहे का सामान धनतेरस पर ना खरीदें। जब भी कोई बर्तन लें तो उसे घर के अंदर खाली लाने की जगह उसमें पानी या चावल भरकर लाएं। धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार पर गंदगी ना रखें।

धनतेरस पर कमल पर विराजमान लक्ष्मी मां की तस्वीर लगाएं

धनतेरस पर अपने घर या दुकान की तिजोरी या गल्ले पर लक्ष्मीजी का ऐसा चित्र लगाना चाहिए, जिसमें मां लक्ष्मी कमल पर धनवर्षा की मुद्रा में विराजमान होंऔर दो हाथी सूंड उठाए नजर आ रहे हों। ऐसा करने पर तिजोरी में हमेशा मां लक्ष्मी का वास रहेगा।

धनतेरस पर इन उपाय से आएगी सुख-समृद्धि

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने का रिवाज है, अगर ये मुमकिन ना हो तो कोई बर्तन खरीदें। मान्यता के अनुसार ये चन्द्रमा का प्रतीक है जो मन को शांति और शीतलता प्रदान करता है।

धनवान बनाने वाले धनतेरस के 5 उपाय

ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर जो भी सामान खरीदे जाते हैं उसमें सालभर में तेरह गुना की बढ़ोतरी होती है। धनतेरस पर सोना-चांदी के सिक्के और गहने खरीदने से घर पर सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मां लक्ष्मी का वास होता है। शास्त्रों के मुताबिक धनतेरस पर खरीदारी करने के अलावा कुछ उपाय करने पर धन-दौलत की वर्षा होती है।

– धनतेरस पर मुख्य द्वार पर बंधनवार लगाएं
– तुलसी का पौधा लगाएं
– मुख्य द्वार पर घी का दीया जलाएं
– मां लक्ष्मी की चरणपादुका लगाएं
– प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक का निशान लगाएं।

धनतेरस पर बना शुभ योग

दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और अपने कुल देवता की मूर्ति को बाजार से खरीदा जाता है और फिर दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। इसके अलावा धनतेरस पर सोना, चांदी, जमीन, मकान, बर्तन और दूसरी की चीजों की खरीदारी होती है। इस बार धनतेरस पर पुष्य नक्षत्र के साथ कई तरह के दूसरे योग भी बने रहे हैं जिसकी वजह से धनतेरस खास होगा।इस बार धनतेरस पर इंद्र योग, त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है।

धनतेरस 2022 की तिथि और मुहूर्त

पंचांग में अंतर की वजह से और त्रयोदशी तिथि 22 और 23 अक्तूबर दो दिन रहने के चलते इस बार धनतेरस का त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है। उदयातिथि के मुताबिक धनतरेस 23 अक्तूबर को मनाया जा रहा है। 23 अक्तूबर को धनतेरस की खरीदारी के लिए पूरा दिन मिलेगा। इस साल हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस की शुरुआत 22 अक्टूबर 2022 को शाम 6 बजकर 03 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 23 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर होगा।

धनतेरस पर बर्तन खरीदने की मान्यताएं
मान्यताओं के हिसाब से धनतेरस पर सोना-चांदी और पीतल के बर्तन खरीदने से जीवन में कभी सुख और धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

मां लक्ष्मी और कुबेर पूजन विधि

मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पूजन के बाद रात को केसर या हल्दी से रंगे हुए 21 चावल के साबुत दाने लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह पर रखना चाहिए ,ऐसा करने से समृद्धि आती है।

धनतेरस उपाय-भय दूर करने के लिए

अगर आपको किसी भी प्रकार का भय रहता है या फिर आप अपने शत्रुओं से परेशान हैं तो आप धनतेरस के दिन हनुमान जी के आगे चमेली के तेल का दीपक जरुर जलाएं और ग्यारह पीपल के पत्तो पर श्री राम लिखकर उसकी माला बनाकर चढ़ाएं और वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें, लाभ होगा।

धनतेरस पर करें भगवान कुबेर की पूजा

धनतेरस के दिन भगवान कुबेर की पूजा की जाती है और उनकी दिशा उत्तर मानी गई है। इसलिए आज के दिन नकदी उत्तर दिशा में ही रखें, ऐसा करने से आपको धनलाभ होगा।

धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू ?

22 अक्तूबर को शाम 6 बजे त्रयोदशी तिथि लग जाएगी और फिर प्रदोष काल मुहूर्त में पूजा और खरीदारी हो सकेगी। वहीं उदया तिथि के आधार पर 23 अक्तूबर 2022 धनतेरस मनाया जाएगा। धनतेरस पर सोने-चांदी के सिक्के और गहनों की खरीदारी की जाती है। इसके अलावा धनतेरस पर मां लक्ष्मी की सबसे प्रिय वस्तु झाड़ू भी खरीदी जाती है। माता लक्ष्मी को साफ-सफाई और सुंदरता बहुत ही प्रिय होती है। जहां साफ-सफाई और सजावट होती है वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदी जाती है। वास्तुशास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना गया है।

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