अगले 3 साल में कितने बढ़ेंगे फ्लैट्स के दाम? 

प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स की राय पर रॉयटर्स के सर्वे 

महंगाई दर से कम रहेगी फ्लैट्स के बढ़ने की रफ्तार

AIN NEWS 1: बता दें भारत में प्रॉपर्टी खरीदारों का सबसे बड़ा आकर्षण इनकी कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी होती है। ऐसे में कोरोना काल के बाद जिस तरह से घरों के दाम बढ़े हैं उससे प्रॉपर्टी खरीदारों को आने वाले बरसों में भी इनमें इजाफे का अनुमान है। लेकिन आने वाले समय में घरों के दाम कितने बढ़ेंगे ये जानकर शायद प्रॉपर्टी खरीदारों को मायूसी हाथ लगेगी। दरअसल, रॉयटर्स के एक पोल में दावा किया गया है कि अगले 3 साल तक भारत में प्रॉपर्टी के औसतन दाम हर साल 5 फीसदी बढ़ेंगे। यानी महंगाई दर के मुकाबले इनके बढ़ने की रफ्तार कम रहेगी जबकि 2022 में घरों के दाम 7 फीसदी बढ़े हैं।

प्लॉट औऱ दुकान खरीदना होगा फायदे का सौदा

जानकारों का मानना है कि भारत में प्रॉपर्टी की कीमतों को एक दायरे में तय करना बेहद मुश्किल है। जिस तरह से हाल के महीनों में प्लॉट्स, विलाज और इंडिपेंडेंट हाउसेज के दाम बढ़े हैं उससे इस तरह की सप्लाई भी डेवलपर्स काफी ला रहे हैं। ऐसे में केवल फ्लैट्स के दाम में होने वाली बढ़ोतरी से सारे रियल एस्टेट को नहीं आंका जा सकता है।

किस शहर में सबसे महंगे होंगे फ्लैट्स?

आइए अब जानते हैं किन शहरों में प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने का अनुमान रॉयटर्स के इस पोल में लगाया गया है। पोल के मुताबिक दिल्ली-मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में अगले 3 साल में सालाना 5 से 6 परसेंट की दर से घरों के दाम बढने का अनुमान है। लेकिन इनमें किसी तरह की गिरावट आने की आशंका खारिज की गई है। हालांकि ये बढ़ोतरी महंगाई दर से कम रहने की वजह से लोगों को नेगेटिव रिटर्न ही देगी। ये आंकड़ा विकास दर में संभावित बढ़ोतरी के आस पास रहने का अनुमान है।

फ्लैट्स के दाम घटाने की ज़रुरत!

लेकिन इस सर्वे में एक दिलचस्प बात जो निकलकर सामने आई है वो है कि सर्वे में शामिल एक्सपर्ट्स के मुताबिक बीते एक दशक में प्रॉपर्टी के दाम दोगुने होने से नए ग्राहकों की खरीद क्षमता घटी है। ऐसे में प्रॉपर्टी के दाम फिर से अफोर्डेबल बनाने के लिए इनमें औसतन सवा 6 फीसदी की कमी करने की ज़रुरत है। पोल में घरों के दाम घटाने का उच्चतम आंकड़ा साढ़े 17 फीसदी है। पोल में शामिल 11 में से 9 एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में आगे चलकर नए घर खरीदारों के लिए सुस्त आर्थिक विकास दर और ऊंची ब्याज दर गृह प्रवेश की राह का सबसे बड़ा ब्रेकर बनेंगे।

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