Tuesday, July 23, 2024

11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे उज्जैन के नवनिर्मित 900 मीटर लंबे महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन। देखिए कैसा है शिव का अद्भुत, अकल्पनीय और अलौकिक संसार।

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1.उज्जैन के नवनिर्मित 900 मीटर लंबे महाकाल कॉरिडोर      का उद्घाटन

2   .शिव का अद्भुत, अकल्पनीय और अलौकिक संसार

3    .11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

AIN NEWS 1: ‘महाकाल लोक’ यानी शिव का अद्भुत, अकल्पनीय और अलौकिक संसार। महाकाल के आंगन के विस्तार के बाद जो भव्य और सुंदर दृश्य सामने आए, उसे अब महाकाल लोक नाम से जाना जाएगा। 11 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी इसे देश को सौंपेंगे। दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिकता के इस मेल ने 4 साल की कड़ी मेहनत के बाद आकार लिया है। इसके पहले फेज का काम पूरा होने के बाद अब दूसरे फेज का काम शुरु होगा।

 

पहले फेज में 15 हजार टन राजस्थानी पत्थर लगाया गया

महाकाल लोक के पहले फेज में 15 हजार टन राजस्थानी पत्थर लगाया गया है। ‘महाकाल लोक’ का पहला चरण काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 4 गुना बड़ा है। एक बार जब दूसरे चरण का काम पूरा हो जाएगा तो ये काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 9 गुना बड़ा हो जाएगा। पूरे कैंपस को घूमने और दर्शन करने में करीब 5 घंटे का वक्त लगेगा।

आखिर है क्या ‘महाकाल लोक’ ?

महाकाल के आंगन को 856 करोड़ रुपए की लागत से 2 फेज में विकसित किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद 2.8 हेक्टेयर में फैले महाकाल का पूरा इलाका 47 हेक्टेयर का हो जाएगा। 946 मीटर लंबे कॉरिडोर पर चलकर महाकाल के भक्त गर्भगृह तक पहुंचेंगे। कॉरिडोर पर चलते हुए बाबा महाकाल के अद्भुत रूपों के दर्शनों के साथ ही शिव महिमा और शिव-पार्वती विवाह की भी गाथा देखने और सुनने को मिलेगी।

 

दर्शन के साथ शिव से जुड़ी हर कहानी जान सकेंगे भक्त

महाकाल लोक के बनने के बाद यह अकेला ऐसा मंदिर बन गया है जहां भक्त दर्शन के साथ शिव से जुड़ी हर कहानी जान सकेंगे। निर्माण के समय पर्यावरण का भी खास ख्याल रखा गया है। हैदराबाद से खास पौधे मंगाए गए हैं और यहां पर शमी, बेलपत्र, नीम, पीपल, रुद्राक्ष और वटवृक्ष भी रोपे गए हैं। विकसित एरिया महाकाल वन का हिस्सा है। यही वजह है कि इसे इसी के मुताबिक डिजाइन किया गया है। उज्जैन में करीब 47 हेक्टेयर में डेवलपल किए जा रहे महाकाल लोक की कल्पना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के आने के साथ ही की गई थी। स्मार्ट सिटी में उज्जैन का नाम शामिल होते ही सबसे पहले 2.8 हेक्टेयर में बने महाकाल के आंगन को सजाने के साथ ही विस्तार का सुझाव आया। महाकालेश्वर मंदिर में लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने 5 साल पहले 300 करोड़ रुपए की इस योजना की सहमति दी।

राजस्थान का बंसी पहाड़पुर पत्थर मंगवाया गया

गहन विचार मंथन के बाद महाकाल परिसर के साथ रुद्रसागर तालाब को सजाने की योजना तैयार हुई। दो अलग-अलग फेज में विस्तार करने की योजना को तय किया गया। 2017-18 में प्रोजेक्ट के लिए 870 करोड़ रुपए का बजट मंजूर करने के बाद DPR और टेंडर निकाला गया। इसके बाद यहां मूर्तियां, म्यूरल के साथ परिसर को सजाने का काम शुरू किया गया। इसके लिए खासतौर पर राजस्थान का बंसी पहाड़पुर पत्थर मंगवाया गया।

निर्माण चुनौतियों से भरा था

महाकाल लोक की कल्पना साकार करना चुनौतियों से भरा था। सबसे बड़ी मुश्किल 800 घरों और उनमें रहने वाले परिवारों को शिफ्ट करने की थी। यहां स्कूल भी थे जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान भी होने से रोकना था। तैयारी के बाद सभी बच्चों को 2 स्कूलों में शिफ्ट किया गया। हर दिन नई चुनौती होती थी। कई सामुदायिक मुद्दे थे, जिनको भी सुलझाना था। अब दूसरा चैलेंज था- रुद्रसागर की सफाई।

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रुद्रसागर के लिए 12 हजार घरों की गंदगी को मैनेज करना था

रुद्रसागर तालाब को साफ-सुथरा बनाने के लिए 40 लोगों ने डेढ़ महीने जलकुंभी हटाने के लिए दिन-रात काम किया। तालाब में आसपास के सीवेज का गंदा पानी भी गिरता था। तालाब के कायाकल्प के लिए सबसे बड़ी परेशानी इसमें मिल रहे गंदे नाले ही थे। 12 हजारा घरों का सीवेज रुद्रसागर में गिरता था। तालाब की खुदाई कर इसमें मिल रहे 5 सीवेज पॉइंट को बंद कर हाउसहोल्ड कनेक्शन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। सीवरेज को बायपास कर अलग से लाइन डाली गई।

तालाब में नाले गिरना रुके तो इसे भरने था नई चुनौती

रुद्रसागर में गिरने वाले नालों का पानी रोका गया तो अब एक और चुनौती थी कि इसमें सालभर पानी कैसे रहे। रुद्रसागर, नालों और बारिश के पानी से ही भरता है और ये पानी भी गर्मी में सूख जाता है। इसके लिए शिप्रा नदी से रुद्रसागर को जोड़ा गया। इसके लिए बीच में एक पम्पिंग स्टेशन बनाया है। 9 महीने की मेहनत के बाद रुद्रसागर निखर गया। रूद्रसागर विस्तारीकरण के लिए 20 करोड़ की प्रस्तावित योजना में से 10 करोड़ रुपए तो केवल सीवरेज रोकने और जलकुंभी हटाने में ही खर्च हो गए।

म्यूरल्स पर कथाएं बनाने के लिए शास्त्र खंगाले गए

महाकाल लोक में 384 मीटर लंबी म्यूरल्स दीवार बनाई गई है। इस पर शिव की 25 कथाओं को 52 म्यूरल्स में दिखाया गया है। इन कथाओं में ज्यादातर शिव पुराण, श्रीमद् भागवत, देवी भागवत और बाकी ग्रंथों से लिया गया है। म्यूरल्स वॉल बनानने के लिए पौराणिक शास्त्रों को खंगालना, कथाएं तय करना, उन कथाओं को मंदिर समिति, पुजारी-पुरोहित, सांस्कृतिक समिति से मंजूर कराना सब्र का काम था। इससे भी मुश्किल था, उन्हें बनाने के लिए कलाकारों का चुनाव करना। इन्हें बनाने में 10 महीने का वक्त लगा।

महाकाल लोक को डिजाइन करने की कहानी

सबसे पहले भीड़ को नियंत्रित करने को ध्यान में रखकर महाकाल लोक को डिजाइन किया गया। कुछ प्रोजेक्ट तैयार किए जो कामयाब नहीं हुए। दोबारा से नए तैयार किए लेकिन उनमें भी कुछ खामियां रह गईं। आखिरकार अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के बढ़ावे को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट तैयार किया गया। भक्तों की संख्या को ध्यान में रखा गया और ये ध्यान रखा गया कि जो भी भक्त दर्शन करने आए, एक-दो दिन यहां रुके। ऐसा होने से शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।

अगले 50 साल की योजना के तहत ॉदेश का सबसे सुव्यवस्थित मंदिर बनेगा

12 अक्टूबर से महाकाल मंदिर दर्शन के इंतजाम में देश का सबसे सुव्यवस्थित मंदिर हो जाएगा। यहां दर्शन का इंतजाम अगले 50 साल को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उद्घाटन के बाद भक्तों को सबसे बड़ी सुविधा बिना भीड़ के और कम समय में दर्शन की व्यवस्था मिलेगी। रात में सोने की तरह दमकने वाले महाकाल लोक में सुंदरता के साथ आम भक्तों को शिवरात्रि, नागपंचमी और सिंहस्थ जैसे त्योहार के लिए दर्शन की ऐसी शानदार व्यवस्था बनाई जााएगी जो देश के किसी मंदिर में नहीं है। किसी भी त्योहार पर ना तो महाकाल पहुंचने वाले वाहनों को शहर से दूर रोका जाएगा और ना ही कई किलोमीटर पैदल चलना होगा। भक्तों को पार्किंग से लेकर महाकाल दर्शन तक पहुंचने में सिर्फ 20 मिनट लगेंगे और एक घंटे में 30 हजार लोग दर्शन कर सकेंगे। व्यवस्था ऐसी होगी कि एक दिन में 10 लाख भक्तगण भी आ जाएं तो उन्हें दर्शन कराए जा सकेंगे।

पीएम करेंगे फेस-1 का उद्घाटन

महाकाल लोक में पिनाकी द्वार से एंट्री करते ही सबसे पहले नवग्रह के दर्शन होंगे। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। फेज 2 की तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकी हैं। इसमें सिंहस्थ को ध्यान में रखकर प्लान किया गया है। सिंहस्थ के दौरान इंदौर, रतलाम, देवास, मक्सी जैसे किसी भी शहर से उज्जैन आने पर सिंहस्थ मेले के डेढ़ किमी नजदीक तक गाड़ियां पार्क हो सकेंगी। लोगों को मेला क्षेत्र में पहुंचने के लिए ना तो कई किमी पैदल चलना होगा और न ही किसी पास की जरूरत होगी। इस डेढ़ किलोमीटर इलाके में भी तिरुपति की तरह बैटरी वाली सरकारी गाड़ियां चलेंगी। 30 सितंबर 2023 तक महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 2500 गाड़ियों की पार्किंग तैयार हो जाएगी। वहीं, सिंहस्थ को लेकर 7 हजार गाड़ियों की स्थाई पार्किंग नदी के किनारे ही बनाई जा रही है। इसके लिए क्षिप्रा किनारे कॉरिडोर बनाने की योजना का काम शुरू हो गया है।

कॉरिडोर को कैसे मिला ‘महाकाल लोक’ नाम

27 सितंबर को पहली बार उज्जैन में कैबिनेट बैठक हुई। अध्यक्षता उज्जैन के महाराज भगवान महाकाल ने की। मेज की मुख्य सीट पर बाबा महाकाल की तस्वीर को आसीन किया गया। आसपास मुख्यमंत्री शिवराज और मंत्रिमंडल के दूसरे सदस्य बैठे। सीएम ने यहीं से कॉरिडोर को ‘महाकाल लोक’ का नाम दिया। महाकाल लोक में प्रवेश करते ही शांति के साथ भक्ति का माहौल मिलेगा। यहां रास्ते में पूजा की सामग्री की दुकानें, फूड जोन, रेस्त्रां की सुविधा मिलेगी। थीम पार्क के तहत महाकाल की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल, सप्तसागर के लिए डेक क्षेत्र और डेक के नीचे दुकानें और बैठने का इंतजाम भी है। त्रिवेणी संग्रहालय के पास कार, बस और दोपहिया वाहन की पार्किंग बनाई गई है। इसमें 600 से ज्यादा गाड़ियों की पार्किंग होगी। इसी इलाके में धर्मशाला और अन्नक्षेत्र भी बनाए जा रहे हैं। रामघाट की तरफ जाने वाले पैदल मार्ग का कायाकल्प, फेरी और ठेले वालों के लिए अलग से इंतजाम है। वास्तुकलात्मक तत्वों के इस्तेमाल के ज़रिए गलियों का सौन्दर्यीकरण, रामघाट पर सिंहस्थ थीम आधारित डायनामिक लेजर शो किया गया है। छोटा रुद्रसागर लेक फ्रंट विकास योजना में लैंड स्केपिंग समेत मनोरंजन केंद्र, वैदिक वाटिका, योग केंद्र, मंत्र ध्वनि स्थल और पार्किंग का विकास हो रहा है। महाकाल लोक को चारों ओर से खुला बनाया जा रहा है। चार द्वार हैं- पिनाकी, शंख, नंदी और नीलकंठ। दूसरे फेज में एक या दो मुख्य द्वार और बनाए जाएंगे। इन चारों दरवाजों से भक्त महाकाल लोक कैम्पस में एंट्री कर सकते हैं। चारधाम रोड से पिनाकी द्वार मिलेगा। नीलकंठ द्वार बेगमबाग, शंख द्वार गणेश मंदिर के ठीक सामने और नंदी द्वार के लिए त्रिवेणी संग्रहालय के पास से रास्ता है।

महाकाल लोक का मुख्य द्वार नंदी है। यहां पहले पार्किंग है। कुछ आगे गणेश भगवान की बड़ी प्रतिमा है, सामने नंदी द्वार है। नंदी द्वार में प्रवेश करते ही ठीक सामने 108 स्तंभ हैं। इन स्तंभों पर भगवान शिव के नटराज स्वरूप की अलग-अलग मुद्राओं को उकेरा गया है। सीधे हाथ पर 25 फीट ऊंची दीवार पर शिव गाथा उकेरी गई है। उल्टे हाथ पर कमल सरोवर है। यहां महाकाल की प्रतिमा विराजित की गई है। भगवान शंकर यहां निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हुए नजर आ रहे हैं। इनके सामने 4 शेर बनाए गए हैं। इसी ओर रुद्रसागर भी है।

पिनाकी द्वार भी रुद्रसागर के किनारे से ही है। पिनाकी द्वार से घुसते ही नवग्रह के साथ गजानन और कार्तिकेय के दर्शन होंगे। त्रिपुरासुर वध की गाथा भी देखने-सुनने को मिलेगी। यहां छोटे से पार्क में त्रिशूल के साथ रुद्राक्ष, डमरू और ओम की आकृति उकेरी गई है। भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर के वध के समय धनुष उठाया था। ये धनुष पिनाक के नाम से जाना जाता है। द्वार के शिखर पर धनुष की आकृति भी बनी है।

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आगे महाकाल पथ में 25 दीवारों पर करीब 52 और सप्तऋषि पर 28 म्यूरल बनाए गए हैं। सबसे बड़ा म्यूरल रूद्रसागर के सामने है। पूरे कैम्पस में कुल 81 म्यूरल बने हैं।

शिव का गुणगान करेंगी प्रतिमाएं…

भक्तों को यहां नीलकंठ महादेव, सती के शव के साथ शिव, त्रिवेणी प्लाजा पर शिव, शक्ति और श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं, कैलाश पर शिव, यम संवार, गजासुर संहार, आदि योगी शिव, योगेश्वर अवतार, कैलाश पर रावण की प्रतिमाएं शिव की महिमा का गुणगान करती मिलेंगी।

18 फीट की 8 प्रतिमाएं: नटराज, गणेश, कार्तिकेय, दत्तात्रेय अवतार, पंचमुखी हनुमान, चंद्रशेखर महादेव की कहानी, शिव और सती और समुद्र मंथन दृश्य।
15 फीट ऊंची 23 प्रतिमाएं: शिव नृत्य, 11 रुद्र, महेश्वर अवतार, अघोर अवतार, काल भैरव, शरभ अवतार, खंडोबा अवतार, वीरभद्र द्वारा दक्ष वध, शिव बरात, मणिभद्र, गणेश व कार्तिकेय के साथ पार्वती, सूर्य, कपालमोचक शिव।
11 फीट की 17 प्रतिमाएं: प्रवेश द्वार पर गणेश, अर्धनारीश्वर, अष्ट भैरव, ऋषि भारद्वाज, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, कश्यप और जमदग्नी।
10 फीट की 8 प्रतिमाएं: लेटे हुए गणेश, हनुमान शिव अवतार, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, लकुलेश, पार्वती के साथ खेलते गणेश।
9 फीट की 19 प्रतिमाएं: यक्ष, यक्षिणी, सिंह, बटुक भैरव, सती, पार्वती, ऋषि भृंगी, विष्णु, नंदीकेश्वर, शिवभक्त रावण, श्रीराम, परशुराम, अर्जुन, सती, ऋषि शुक्राचार्य, शनिदेव और ऋषि दधिचि।

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दूसरे फेज में इन्हें मिलेगा नया स्वरूप…

महाराजवाड़ा बिल्डिंग को हेरिटेज होटल में तब्दील किया जाएगा। इसे सीधे मंदिर से जोड़ा जाएगा। पुलिस क्वार्टर और महाकाल थाने को हटाया जाएगा। उर्दू स्कूल वाले मैदान में पार्किंग और महाकाल थाना बनेगा। मंदिर के सामने एक नया कॉरिडोर बनेगा। रुद्रसागर पर ब्रिज और मंदिर के पास प्रवचन हॉल, अभिषेक स्थल बनाया जाएगा। यहां की सड़कों को भी चौड़ा किया जाएगा। इसके अलावा छोटा रुद्रसागर तट, रामघाट का सौंदर्यीकरण, पार्किंग व पर्यटन सूचना केंद्र, हरि फाटक पुल का चौड़ीकरण, रेलवे अंडरपास, महाकाल द्वार और प्राचीन बेगमबाग मार्ग को संवारा जाएगा।

अब जानिए महाकाल मंदिर के बनने, टूटने और फिर बनने की कहानी

देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन का महाकाल मंदिर अकेला दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। मंदिर आज जैसा दिखता है, पुराने समय में ऐसा नहीं था। 11वीं सदी में गजनी के सेनापति और 13वीं सदी में दिल्ली के शासक इल्तुतमिश के मंदिर ध्वस्त करने के बाद कई राजाओं ने इसका दोबारा निर्माण करवाया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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