75 साल में जो ना हो सका, मोदी सरकार ने कर दिया वो कमाल! चीन की चीं चीं को दरकिनार करके बॉर्डर पर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बना दिया ब्रिज

अक्साई चीन के काफी करीब तक भारतीय फौज के टैंक सरलता से पहुंच जाएंगे।

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मोदी सरकार ने चीन बॉर्डर बनाया ब्रिज

चीन की आपत्ति के बावजूद पुल बनकर तैयार

अक्साई चीन पर पहुंचेगी भारतीय सेना

AIN NEWS 1: अक्साई चीन के काफी करीब तक भारतीय फौज के टैंक सरलता से पहुंच जाएंगे। बॉर्डर रोड ऑर्गनाईजेशन ने डीएस-डीबीओ रोड (दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड) पर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 120 मीटर लंबा क्लास 70 श्योक पुल बनाया है। यह ब्रिज सामरिक महत्व का है क्योंकि इससे सीमा पर तैनात फौज तक राशन आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। इसके अलावा सैन्य साजोसामान पहुंचाने में भी सहूलियत होगी। क्लास 70 ब्रिज के मायने हैं कि इस ब्रिज से 70 टन वजन एक बार में निकल सकता है। इस पुल के निर्माण से सेना को अपने टैंक और दूसरे सैन्य साजो सामान सीमा तक आसानी से पहुंच जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पुल का उद्घाटन किया।

चीन की आपत्ति को भारत ने किया अनसुना

256 किलोमीटर लंबी डीएस-डीबीओ रोड लेह से अक्साई चीन बॉर्डर पर लगे दौलत बेग ओल्डी तक जाती है। ये चीन बॉर्डर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तक फौज का संपर्क बनाती है। सामरिक रूप से ये भारत की स्थिति की मजबूती प्रदान करती है। ऐसे में इस रोड के बनते वक्त चीन ने आपत्ति की थी। चीन ने आक्रामक रुख भी दिखाया था लेकिन भारत ने इसका निर्माण जारी रखा जिसे अब पूरा कर लिया गया है। अब इसी सड़क पर एक पुल बनाया गया है जिससे फौज के आवागमन में आसानी होगी।

रक्षा तैयारियां हो रही हैं मजबूत

इस पुल के साथ ही डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सीमा पर बने नए 45 ब्रिज, 27 रोड, दो हेलिपैड और एक कार्बन न्यूट्रल हेबिटेट को देश को सौंप दिया। बॉर्डर रोड ऑर्गनाजेशन ने ये सब इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम पूरे किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर में 20, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में 18-18, उत्तराखंड में पांच, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान में 14 प्रोजेक्ट्स हैं। इनको बनाने में रिकॉर्ड समय में 2180 करोड़ रुपये की लागत आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक ये भारत की रक्षा तैयारियों को ताकतवर बनाएंगी और बॉर्डर के नजदीकी इलाकों का आर्थिक विकास भी तेज करेंगी।

बीआरओ का शानदार काम

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘एक साथ इतनी बड़ी संख्या में इंफ्रास्ट्र्कचर के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन होना अपने आप में एक काफी बड़ा कीर्तिमान है। ये सभी निर्माण से जुड़े काम नए भारत को प्रगति के रास्ते पर तेज गति से आगे ले जाने में बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। मुझे पूर्ण भरोसा है कि देश जब एक नई एनर्जी, नई सोच और उत्साह के साथ नया सफर शुरू कर रहा है तो निश्चित रुप से ये दुनिया में अपना एक नया स्थान हासिल करके रहेगा।’ राजनाथ ने कहा कि देश को नई बुलंदियों पर पहुंचाने में BRO का काफी बड़ा रोल होना वाला है। उन्होंने कहा, ‘अपनी शुरुआत से ही दूर-दराज के इलाकों में सड़क, सुरंग और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे को बनाकर कर देश की प्रगति में BRO अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का लगातार निर्वाह कर रहा है लेकिन पिछले 6-7 सालों में BRO ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं वो अपने आप में अभूतपूर्व हैं।’

 

वायुसेना की संचालन क्षमता का विस्तार

जिन प्रोजेक्ट्स को रक्षा मंत्री ने देश को सौंपा है उनमें पूर्वी लद्दाख में हानले और थाकुंग में दो हेलिपैड भी हैं जो भारतीय वायुसेना की संचालन क्षमता को बढ़ाने में मददगार साबित होंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक जम्मू-कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास की कमी आतंकवाद के पनपने की वजहों में से एक थी। इन आंतरिक अवरोधों की वजह से टूरिस्ट्स की संख्या में भी गिरावट आई है जिसने लद्दाख के साथ-साथ पूरे देश को प्रभावित किया। अब सरकार की कोशिशों से इस इलाके में शांति और प्रगति की नई पहल देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी दूरदराज के इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ा जाएगा।

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