Saturday, July 13, 2024

बार का दरवाजा अन्दर से बंदकर वकीलों पर कर दिया लाठीचार्ज, 6 एसआई समेत 18 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज!

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AIN NEWS 1 उत्तर प्रदेश: लखनऊ में राजधानी के ही समिट बिल्डिंग के एक बार में पुलिस की ओर से कई वकीलों की पिटाई की गई थी. इस पूरे मामले में विभूतिखंड थाने में तैनात 6 दरोगा समेत 18 पुलिसकर्मियों पर अब मुकदमा दर्ज किया गया है. यह मुकदमा उन्ही के थाने में दर्ज कराया गया है जहां के पुलिसकर्मियों पर यह आरोप लगे थे. इस मामले को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन ने अपने कार्य बहिष्कार पर चल रही थी. मंगलवार को ही ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में पुलिस का पूरी तरह से बचाव किया था.

यहां पर मारपीट की सूचना मिलने पर पहुंची थी पुलिस : विभूतिखंड थाने में दर्ज हुई एफआईआर के मुताबिक, वकील अभिषेक सिंह, मुकुल सिंह के समेत सात वकील अपने मित्रों के साथ मे 23 फरवरी को समिट बिल्डिंग स्थित माई बार में खाना खाने गए हुए थे. यहां पर अचानक से दो पक्षों में मारपीट हो गई. इस दौरान सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी.

इस पूरे प्रकरण में कई वकीलों को आई गंभीर चोट: पुलिस ने इस बार का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. इसके बाद जब यह वकील खाना खाकर बाहर जाने का प्रयास करने लगे तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहले तो रोका. इसके बाद जब पुलिस को यह जानकारी हुई की वह सब के सब पेशे से वकील हैं तो 6 दरोगा समेत 18 पुलिसकर्मियों ने बार मे ही लाठियों से सभी की पिटाई की. इस दौरान कई वकीलों को गंभीर चोट भी आई.

इस मामले में वकीलों ने रोकी थी कैदियो की वैन : वकीलों ने यह एफआईआर विभूतिखंड थाने में ही तैनात दरोगा राहुल बालियान, जसीम रजा, प्रमोद कुमार सिंह, फूलचंद, रितेश दुबे, विनय गुप्ता कुल 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मे दर्ज की गई है. बार में वकीलों और पुलिस के बीच हुए इस पूरे विवाद से नाराज सेंट्रल बार एसोसिएशन ने सोमवार को जिला कोर्ट में जमकर हंगामा भी काटते हुए कैदियों की वैन भी रोक ली थी.

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने इस पूरे प्रकरण में एसोसिएशन को दिया था जवाब :

इस दौरान बार अध्यक्ष अरविंद कुशवाहा ने कहा था जब तक सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा जाता तब तक बार कार्य से बहिष्कार करेंगे. एफआईआर दर्ज करने से एक दिन पहले ही लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर कानून व्यवस्था उपेंद्र अग्रवाल ने पुलिसकर्मियों का बचाव करते हुए सेंट्रल बार एसोसिएशन को इसके लिए लिखित जवाब भेजा था.

उन्होंने कहा इस दौरान कहा था कि माई बार में मारपीट हुई थी, जिसकी शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर गई थी. कार्रवाई के तहत पुलिस वहा से सभी को थाने लेकर आई थी. इसमें से शायद कोई अधिवक्ता भी हो सकता है. पुलिस कार्रवाई करते हुए किसी से भी उसका प्रोफेशन नहीं पूछती है और न ही देखने से यह पहचान सकती है कि वह कोई अधिवक्ता हैं. जेसीपी ने सेंट्रल बार एसोसिएशन के इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया था.

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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