Thursday, July 25, 2024

हाथरस भगदड़: पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे, कई सेवादारों ने भक्तों पर लाठियां बरसाई…!

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AIN NEWS 1 | हाथरस में एक सत्संग के दौरान हुई भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई। सत्संग के बाद जब भगदड़ मची तो मुख्य आयोजक देवप्रकाश मधुकर अपने कुछ खास सेवादारों के साथ मौके से फरार हो गया। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सत्संग के दौरान पुलिस कर्मियों को पंडाल में प्रवेश करने से रोका गया और वीडियोग्राफी करने की कोशिश में सेवादारों ने पुलिस की टीम से भिड़ंत की।

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आयोजन की तैयारी और अव्यवस्था देवप्रकाश मधुकर ने एसडीएम सिकंदराराऊ से सत्संग की अनुमति के लिए 80 हजार लोगों के आने की उम्मीद जताई थी, लेकिन डेढ़ लाख से अधिक की भीड़ इकट्ठा कर ली। भीड़ में महिलाओं की संख्या अधिक थी और पंडाल में जितने लोग थे, उससे ज्यादा पंडाल के बाहर बैठे थे। मरने वाले सभी 121 लोग पंडाल के बाहर ही थे।

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भगदड़ के कारण हाथरस एसपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि आयोजकों ने भीड़ के बीच से बाबा का काफिला गुजारा, जिससे भगदड़ मच गई। सेवादारों ने भी भीड़ के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। जब सेवादारों को लगा कि हालात बेकाबू हो गए हैं तो वे मदद करने के बजाय मौके से भागने लगे।

पुलिस की कार्रवाई मुख्य आयोजक देवप्रकाश मधुकर को हाथरस पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस ने एक लाख का इनाम घोषित कर रखा था। देवप्रकाश मधुकर के साथ दो अन्य साथी रामप्रकाश शाक्य और संजू यादव को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि मधुकर के राजनीतिक दलों से संपर्क और फंड जुटाने की बात सामने आई है, जिसके चलते फंडिंग की जांच की जा रही है।

प्रेस कांफ्रेंस पुलिस अधीक्षक हाथरस निपुण अग्रवाल ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि देवप्रकाश मधुकर सहित नौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। देवप्रकाश और संजू यादव को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। तीसरे आरोपी रामप्रकाश को रविवार को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

 

पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की मुख्य बातें:

 

  1. भीड़ की संख्या: 80 हजार की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन डेढ़ लाख से अधिक लोग इकट्ठा हुए।
  2. अव्यवस्था: पंडाल में जितने लोग थे, उससे ज्यादा बाहर बैठा दिए गए थे। पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।
  3. काफिले का गुजारा: भीड़ के बीच से बाबा का काफिला गुजारा गया।
  4. वीडियोग्राफी: पुलिस वालों को वीडियोग्राफी करने से रोका गया।
  5. धक्का-मुक्की: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए धक्का-मुक्की की गई।
  6. लाठीचार्ज: कई सेवादारों ने लोगों पर लाठियां भांजी।
  7. मदद की कमी: भगदड़ में गिरीं महिलाओं की सुध नहीं ली गई और सेवादार मदद करने के बजाय भाग गए।
  8. सूचना की कमी: आयोजकों द्वारा भगदड़ की सूचना प्रशासन को नहीं दी गई।

यह घटना आयोजकों की लापरवाही और अव्यवस्था का परिणाम है, जिसकी वजह से 121 लोगों की जान चली गई। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

 

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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