Saturday, July 13, 2024

Supreme Court का बड़ा फैसला: तलाकशुदा मुस्लिम औरतों के भत्ते पर क्या हैं इसके मायने? 8 पॉइंट में समझें सबकुछ

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AIN NEWS 1 | आज सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के तलाक के बाद गुजारा भत्ता दिए जाने पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि शाहबानो केस को रद्द करने के कानून को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। तेलंगाना में तलाक के एक मामले में गुजारा भत्ता के मुद्दे पर यह फैसला सुनाया गया।

मुख्य बिंदु:

  1. सीआरपीसी की धारा 125 लागू:
    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाएं भी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा भत्ता मांग सकती हैं। यह सभी धर्मों की महिलाओं पर लागू होता है।
  2. भरण-पोषण अधिकार:
    कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण विवाहित महिलाओं का अधिकार है और इसे दान नहीं समझा जाना चाहिए। यह सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होता है, चाहे वे किसी भी धर्म की हों।
  3. 1986 का अधिनियम प्रभावी नहीं:
    कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 सीआरपीसी की धारा 125 के धर्मनिरपेक्ष और धर्म तटस्थ प्रावधान पर हावी नहीं होगा।
  4. वित्तीय स्थिरता:
    अदालत ने पतियों को अपनी पत्नियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की जरूरत को समझाया और महिलाओं के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दिए जैसे कि संयुक्त बैंक खाते बनाना।
  5. धारा 125 की याचिका:
    यदि किसी मुस्लिम महिला का तलाक सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका के लंबित रहने के दौरान हो जाता है, तो वह धारा 125 की याचिका को जारी रखने के अलावा, मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 का सहारा ले सकती है।
  6. अपील खारिज:
    अदालत ने एक मुस्लिम व्यक्ति की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी पूर्व पत्नी के पक्ष में गुजारा भत्ता के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि धारा 125 सभी महिलाओं पर लागू होगी।
  7. शाहबानो केस:
    कोर्ट ने कहा कि 1986 का अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो फैसले को रद्द करने के लिए लागू किया गया था। लेकिन अब इसे प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।
  8. 1986 अधिनियम का तर्क खारिज:
    अदालत ने उस तर्क को खारिज कर दिया कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं केवल मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत ही भरण-पोषण की मांग कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को मजबूती प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सभी महिलाओं के लिए न्यायसंगत माना जा रहा है।

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सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।
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