AIN NEWS 1: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज हुई एफआईआर को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और धार्मिक हस्तियों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
दरअसल, प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह मामला तब सामने आया जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बच्चों को कोर्ट में पेश कर गंभीर आरोप लगाए। कोर्ट के निर्देश के बाद शनिवार रात संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि विचारों में मतभेद होना एक अलग बात है, लेकिन किसी के खिलाफ इस स्तर तक आरोप लगवाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रंग लिए हुए नजर आ रहा है।
रामभद्राचार्य को लेकर दिया बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का नाम लेते हुए कहा कि अतीत में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले को वापस लिया गया था। उनका दावा था कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर आरोप गंभीर हों तो कानून के अनुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार धार्मिक संस्थाओं और संतों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है और अब पुराने मामलों को निकालकर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
डिप्टी सीएम को दिया मुख्यमंत्री बनने का ऑफर
राजनीतिक हमला करते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों — केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक — को खुला ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि अगर दोनों में से कोई भी 100 विधायकों का समर्थन जुटाकर उनके साथ आ जाए, तो उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जगजाहिर है और इससे बेहतर मौका उन्हें कहीं नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह ऑफर केवल एक सप्ताह के लिए ही मान्य रहेगा।
सुरक्षा और राजनीतिक दबाव पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा वापस लेने के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिना ठोस कारण बताए सुरक्षा हटाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को कमजोर और हतोत्साहित करने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले उनकी एसपीजी सुरक्षा हटाई गई और फिर उनका सरकारी आवास भी छीन लिया गया। अखिलेश के मुताबिक, यह सब राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
ब्रजेश पाठक पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब शंकराचार्य संगम तट पर धरने पर बैठे थे और उन्हें गंगा स्नान से रोके जाने की बात सामने आई थी, तब सरकार के प्रतिनिधि उनके समर्थन में क्यों नहीं पहुंचे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब सम्मान देने की औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि पहले अपमानित किया गया था। उनके मुताबिक, सरकार का यह रवैया संत समाज के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री के जापान दौरे पर भी तंज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रस्तावित जापान दौरे को लेकर भी अखिलेश यादव ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा वाराणसी को क्योटो की तर्ज पर विकसित करने की बात कही गई थी, ऐसे में राज्य सरकार को अपने पिछले दस वर्षों के कार्यों की समीक्षा करनी चाहिए।
गोरखपुर के स्वास्थ्य ढांचे पर सवाल
अखिलेश यादव ने गोरखपुर के स्वास्थ्य तंत्र को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने अपेक्षित सुधार नहीं किए।
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav has stirred a major political controversy after reacting strongly to the FIR registered against Shankaracharya Avimukteshwaranand under the POCSO Act in Prayagraj. Targeting Jagadguru Ramabhadracharya, Akhilesh questioned past legal actions and accused the Uttar Pradesh government of political conspiracy. He also offered Deputy Chief Ministers Keshav Prasad Maurya and Brajesh Pathak to join him with 100 MLAs and become the Chief Minister, intensifying the SP vs BJP political battle in Uttar Pradesh.


















