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उन्नाव में पुरवा के पूर्व सीओ पर बड़ा एक्शन: आत्मदाह केस में कोर्ट ने FIR दर्ज करने के दिए आदेश!

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AIN NEWS 1: उन्नाव जिले में साल 2023 में सामने आया एक बड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। पुरवा में तैनात रहे तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) दीपक सिंह के खिलाफ अब कोर्ट ने गंभीर आरोपों को देखते हुए FIR दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह मामला एक दलित युवक के आत्मदाह और उससे पहले लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। लगभग दो साल बाद आए इस आदेश ने जिले के प्रशासनिक तंत्र, पुलिस की कार्यपद्धति और न्याय प्रक्रिया पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई?

अक्टूबर 2023 में पुरवा कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले दलित युवक श्रीचंद रावत ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई थी। उसने आरोप लगाया था कि स्थानीय लोगों ने उस पर हमला किया, जातिगत गालियां दीं और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। यह भी दावा था कि मामले में नामजद आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई और FIR में कई अहम धाराएं शामिल नहीं की गईं।

युवक का कहना था कि न्याय पाने के लिए वह कई बार पुलिस से मिला, शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसी दौरान उसने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन सीओ दीपक सिंह ने उससे तीन लाख रुपये की मांग की थी और केस को कमजोर करने का दबाव बनाया था।

शिकायत से आत्मदाह तक—युवक की दर्दनाक कहानी

श्रीचंद ने न्याय न मिलने और कार्रवाई न होते देख जिला स्तर पर अपनी बात रखने का प्रयास किया। वह एसपी ऑफिस तक पहुंचा, कई अधिकारियों से मिला, लेकिन उसे अपनी बात सुने जाने की उम्मीद कम होती गई।

27 दिसंबर 2023 को घटनाक्रम ने खतरनाक मोड़ लिया। निराश होकर श्रीचंद ने एसपी कार्यालय के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लिया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। इलाज के दौरान ही युवक ने मौत से पहले बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) दिया। इस बयान में उसने पुलिस की ढिलाई, धमकियों और तत्कालीन सीओ की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया।

इस दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया। सवाल बनने लगे कि आखिर इतने गंभीर मामले में समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

करीब दो साल बाद कोर्ट की सख्ती

मामला लगभग 23 महीने तक प्रशासनिक फाइलों और कानूनी प्रक्रियाओं में घूमता रहा। इस बीच कई बार पीड़ित के परिवार ने न्याय की मांग उठाई। मीडिया रिपोर्टों और दस्तावेजों के आधार पर यह साफ़ था कि गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस की तरफ से तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई।

अब, लंबे समय बाद विशेष न्यायाधीश (SC/ST एक्ट कोर्ट) ने उपलब्ध साक्ष्यों और डाइंग डिक्लेरेशन का संज्ञान लेते हुए आदेश जारी किया कि तत्कालीन सीओ दीपक सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। कोर्ट ने कहा कि आरोप इतने गंभीर हैं कि पूरी जांच आवश्यक है।

यह आदेश न सिर्फ परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है बल्कि यह प्रशासनिक और पुलिस ढांचे पर भी बड़ा सवाल उठा रहा है कि एक पीड़ित को अपनी बात मनवाने के लिए आत्मदाह जैसा कदम क्यों उठाना पड़ा?

परिवार की प्रतिक्रिया—’अब सही दिशा में बढ़ रहा है मामला’

पीड़ित परिवार ने कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि दो सालों तक उन्होंने दर-दर की ठोकरें खाईं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। अब उन्हें उम्मीद है कि जांच सही दिशा में चलेगी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

परिवार ने यह भी कहा कि अगर शुरुआत में ही उनकी शिकायत सुनी जाती तो शायद यह दुखद घटना टल सकती थी।

पुलिस तंत्र पर उठते सवाल

इस घटना ने प्रशासनिक कमजोरी और पुलिस की लापरवाही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जब एक व्यक्ति बार-बार शिकायत करता है, तब भी कार्रवाई न होना बड़ी समस्या है। यह मामला बताता है कि कई बार आम लोगों की आवाज़ तब तक नहीं सुनी जाती जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि डाइंग डिक्लेरेशन भारतीय न्याय प्रणाली में मजबूत साक्ष्य माना जाता है, और अगर इसमें किसी अधिकारी का नाम आता है, तो जांच होना अनिवार्य है। कोर्ट का निर्णय इसी सिद्धांत पर आधारित लगता है।

अब आगे क्या होगा?

FIR दर्ज होने के बाद मामला पुलिस या किसी विशेष जांच एजेंसी के पास जाएगा। इसके बाद आरोपों की जांच होगी, गवाहों के बयान लिए जाएंगे और सीओ समेत अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।

अगर आरोप साबित होते हैं, तो अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना है।

इस केस को अब लोग उन उदाहरणों में गिनने लगे हैं जहाँ लंबे संघर्ष के बाद भी न्याय की उम्मीद जिंदा रहती है और अंत में सच सामने आता है।

The Unnao Purwa CO FIR order has revived discussions around the 2023 Dalit self-immolation case in Uttar Pradesh. With the SC/ST Court directing an FIR against former Circle Officer Deepak Singh, the case highlights key issues of police negligence, Dalit atrocities, administrative failure, and the urgent need for accountability. This detailed report covers the entire sequence—from the initial assault complaint to the self-immolation incident, dying declaration, and the latest court order—ensuring strong SEO relevance for keywords like Unnao news, Purwa CO FIR, Dalit self immolation case, and SC/ST Court order.

 

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