AIN NEWS 1: भारत की अर्थव्यवस्था और कर्ज को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे सामने आते रहते हैं। हाल ही में एक वायरल संदेश में कहा गया कि भारत वर्ल्ड बैंक का “सबसे बड़ा कर्जदार” बन गया है और देश पर 249 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो कि भारत की GDP का लगभग 90% है। इस दावे ने लोगों के बीच चिंता और सवाल दोनों खड़े कर दिए। लेकिन जब इस तथ्य की गहराई से जांच की गई तो सामने आया कि इन दावों में काफी हद तक अतिशयोक्ति और भ्रामक आंकड़े शामिल हैं।
1. क्या भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार है?
वर्ल्ड बैंक हर साल कई देशों को विकास परियोजनाओं और सुधार कार्यक्रमों के लिए ऋण देता है। भारत भी उनमें शामिल है और वास्तव में वर्ल्ड बैंक से सबसे अधिक ऋण प्राप्त करने वाले देशों में से एक है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत ने वर्ल्ड बैंक से लगभग 39.3 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपये) का ऋण लिया है।
इसका मतलब यह है कि भारत वर्ल्ड बैंक का एक बड़ा ऋणग्राही (top borrower) जरूर है, लेकिन यह राशि “249 लाख करोड़” जैसी विशाल नहीं है।
2. 249 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा कहां से आया?
“249 लाख करोड़” का दावा पूरी तरह से गलत और बढ़ा-चढ़ाकर किया गया लगता है। भारत का कुल सरकारी कर्ज (केंद्र और राज्य सरकार मिलाकर) इतना नहीं है।
भारत का कुल बाहरी (External) कर्ज 2025 में करीब 736 अरब डॉलर यानी लगभग 61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
यह भारत की GDP का लगभग 19% है।
वहीं, भारत का कुल सरकारी कर्ज (Domestic + External) मिलाकर करीब 83% GDP के आसपास है, न कि “90% से ज्यादा”।
3. GDP के 90% कर्ज की सच्चाई
सच यह है कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत का कर्ज/GDP अनुपात कुछ समय के लिए लगभग 90% तक पहुंच गया था। उस समय सरकार को आर्थिक राहत पैकेज और खर्च बढ़ाना पड़ा। लेकिन हाल के वर्षों में यह अनुपात घटकर करीब 83% पर आ चुका है और आने वाले समय में इसे और कम करने की संभावना है।
4. बाहरी और आंतरिक कर्ज में अंतर
यह समझना जरूरी है कि भारत के कर्ज दो हिस्सों में बंटे होते हैं:
1. बाहरी कर्ज (External Debt): जो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों या विदेशी बैंकों से लिया जाता है।
2. आंतरिक कर्ज (Domestic Debt): जो देश के भीतर बांड और उधारी के जरिए जुटाया जाता है।
भारत का बड़ा हिस्सा आंतरिक कर्ज है, जिसे सरकार भारतीय बैंकों और संस्थानों से लेती है। इस कारण यह उतना जोखिमपूर्ण नहीं माना जाता जितना बाहरी कर्ज।
5. भारत की आर्थिक स्थिति पर असर
भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उच्च कर्ज-GDP अनुपात चिंता का विषय जरूर हो सकता है, लेकिन भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते निर्यात इसे संभालने में मदद करते हैं।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 640 अरब डॉलर के करीब है।
यह भंडार देश को बाहरी कर्ज चुकाने में सुरक्षा कवच देता है।
6. अफवाहें क्यों फैलती हैं?
सोशल मीडिया पर फैले संदेश अक्सर अधूरी या तोड़ी-मरोड़ी जानकारी पर आधारित होते हैं।
“249 लाख करोड़” जैसी संख्या लोगों को डराने या भ्रमित करने के लिए फैलाई जाती है।
वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अलग और काफी कम हैं।
7. असली तस्वीर
भारत वर्ल्ड बैंक का बड़ा कर्जदार जरूर है, लेकिन सबसे बड़ा कर्ज भी कुछ लाख करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
भारत का बाहरी कर्ज GDP का सिर्फ 19% है।
भारत का कुल कर्ज (Domestic + External) GDP का लगभग 83% है।
भारत पर कर्ज है, और यह सच है कि देश का Debt-to-GDP अनुपात अपेक्षाकृत ऊँचा है। लेकिन “भारत पर 249 लाख करोड़ का कर्ज” और “GDP का 90%” जैसा दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।
हकीकत यह है कि भारत का बाहरी कर्ज नियंत्रण में है और कुल कर्ज-GDP अनुपात भी धीरे-धीरे घट रहा है। अफवाहों और गलत आंकड़ों की बजाय हमें आधिकारिक स्रोतों और रिपोर्ट्स पर भरोसा करना चाहिए।
India’s debt situation has been a subject of global debate, especially claims that it has become the top World Bank borrower with a debt equal to 90% of GDP. The truth is different: India’s external debt stands at around $736 billion, only about 19% of GDP, while its total debt-to-GDP ratio is close to 83%, not 90%. With foreign exchange reserves of over $640 billion and steady economic growth, India remains in a strong position to manage both its World Bank loans and overall debt obligations.


















