AIN NEWS 1: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का मोतिहारी आज इतिहास के एक ऐसे अध्याय का साक्षी बन रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतीक बनकर रहेगा। कल्याणपुर प्रखंड के राजपुर पंचायत अंतर्गत कैथवलिया गांव में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की विधिवत स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह क्षण न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का विषय बन गया है।
वैदिक परंपरा के अनुसार हो रही प्राण-प्रतिष्ठा
इस भव्य शिवलिंग की स्थापना पूरी तरह से वैदिक विधि-विधान के अनुसार की जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रसिद्ध संत-महात्मा, आचार्य और वेदों के प्रकांड विद्वान लगातार मंत्रोच्चार कर रहे हैं। पूरा वातावरण “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष और वैदिक ऋचाओं से गूंज रहा है, जिससे कैथवलिया गांव एक दिव्य तीर्थस्थल का रूप लेता नजर आ रहा है।
इस धार्मिक अनुष्ठान में यजमान की भूमिका आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र सायन कुणाल निभा रहे हैं। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी और सांसद शाम्भवी चौधरी भी पूरे विधि-विधान के साथ इस पुनीत कार्य में सहभागी हैं। दोनों ने पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना कर शिवलिंग की स्थापना का संकल्प लिया है।
33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी शिवलिंग
इस शिवलिंग की सबसे खास बात इसका विशाल आकार और निर्माण शैली है। करीब 33 फीट ऊंचा यह शिवलिंग पूरी तरह एक ही ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह विश्व का सबसे बड़ा एकल (Single Piece) शिवलिंग है, जिसे किसी भी जोड़ या हिस्सों में विभाजित किए बिना तराशा गया है।
यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्प केंद्र महाबलीपुरम में बनाया गया है, जहां पीढ़ियों से पत्थर की नक्काशी और मूर्तिकला की परंपरा चली आ रही है। महीनों की मेहनत और अत्याधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक शिल्प का उपयोग कर इस अद्भुत शिवलिंग को आकार दिया गया।
लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर
महाबलीपुरम से मोतिहारी तक इस शिवलिंग को लाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम वजन और विशाल आकार के कारण विशेष ट्रेलर, क्रेन और इंजीनियरिंग टीम की मदद ली गई। रास्ते भर सुरक्षा और तकनीकी सावधानियों का विशेष ध्यान रखा गया। स्थानीय प्रशासन और धार्मिक समिति के सहयोग से यह ऐतिहासिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी हुई।
आस्था और पर्यटन का नया केंद्र बनेगा मोतिहारी
इस शिवलिंग की स्थापना के बाद मोतिहारी के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल आने वाले समय में देश-विदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा। इससे न सिर्फ क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीणों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा धार्मिक सौभाग्य मान रहे हैं। कई श्रद्धालु दूर-दराज के इलाकों से पैदल चलकर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
शिव भक्ति और सनातन परंपरा का प्रतीक
यह शिवलिंग केवल पत्थर की एक विशाल संरचना नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, आस्था और शिव भक्ति का जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहा है। भगवान शिव को सृष्टि के संहारक और पुनर्निर्माता के रूप में माना जाता है, और इस शिवलिंग की भव्यता उसी असीम शक्ति और चेतना का प्रतिनिधित्व करती है।
आयोजकों का कहना है कि स्थापना के बाद यहां नियमित रूप से रुद्राभिषेक, महाशिवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक आयोजन और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था
इस ऐतिहासिक आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। ट्रैफिक, स्वास्थ्य सेवाएं और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
The installation of the world’s largest Shivling in Motihari, Bihar marks a historic religious milestone. This 33-feet tall, 210-ton granite Shivling crafted in Mahabalipuram is considered the largest single-piece Shivling in the world. With grand Vedic rituals, renowned saints, and traditional consecration ceremonies, the Motihari Shivling is set to become a major spiritual and tourism destination in Bihar, attracting devotees from across India and abroad.




















