‘अगर भगवान राम समाजवादी थे, तो अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां क्यों?’ – सपा पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का तीखा हमला!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भगवान श्रीराम को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बहस की शुरुआत समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने प्रभु श्रीराम को ‘समाजवादी’ बताया। यह बयान सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। अब इस विवाद में जगद्गुरु रामभद्राचार्य, जो कि तुलसी पीठाधीश्वर भी हैं, खुलकर सामने आ गए हैं।

एबीपी न्यूज को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने समाजवादी पार्टी, उसके नेतृत्व और उसकी विचारधारा पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भगवान राम का नाम लेना अच्छी बात है, लेकिन उनके नाम के साथ राजनीति करना और इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

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‘अच्छा है सपा ने राम का नाम तो लिया’

रामभद्राचार्य ने अपने बयान की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी से की। उन्होंने कहा,

“चलो, अच्छा है। इसी बहाने समाजवादी पार्टी के लोगों ने भगवान राम का नाम तो लिया।”

हालांकि इसके तुरंत बाद उन्होंने सपा नेताओं से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी यह मानती है कि भगवान श्रीराम समाजवादी थे, तो उन्हें अपने इतिहास पर भी ईमानदारी से नजर डालनी चाहिए।

मुलायम सिंह यादव पर सीधा सवाल

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का नाम लेते हुए सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर भगवान राम समाजवादी थे, तो फिर 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान राम भक्तों पर गोलियां क्यों चलवाई गईं?

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उन्होंने कहा,

“जो लोग खुद को समाजवाद का पुरोधा कहते हैं, उन्होंने ही अयोध्या की धरती को राम भक्तों के खून से रंग दिया। अगर राम समाजवादी थे, तो यह फैसला क्यों लिया गया?”

रामभद्राचार्य के अनुसार, यह सवाल केवल राजनीति का नहीं, बल्कि नैतिकता और आस्था का भी है।

अयोध्या की घटना और सियासी स्मृति

1990 की अयोध्या फायरिंग भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील और विवादास्पद अध्यायों में से एक मानी जाती है। रामभद्राचार्य ने कहा कि इस घटना को देश कभी भूल नहीं सकता। उनके मुताबिक, हजारों श्रद्धालु राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या पहुंचे थे, लेकिन उन पर गोली चलाने का आदेश दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी आज भले ही भगवान राम को अपनी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रही हो, लेकिन उसका अतीत इन दावों के बिल्कुल उलट दिखाई देता है।

अखिलेश यादव की पार्टी पर निशाना

रामभद्राचार्य ने मौजूदा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पार्टी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह भगवान राम को केवल राजनीतिक लाभ के लिए याद कर रही है या वास्तव में उनकी मर्यादा, आदर्श और चरित्र को अपनाना चाहती है।

उनके अनुसार, भगवान राम का जीवन त्याग, अनुशासन और न्याय का प्रतीक है, जिसे किसी एक राजनीतिक विचारधारा में सीमित नहीं किया जा सकता।

राजनीति और आस्था का टकराव

रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल चुनावी राजनीति में करना देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी को सलाह दी कि वह भगवान राम के नाम पर बयानबाजी करने से पहले अपने इतिहास और कर्मों पर आत्ममंथन करे।

उन्होंने दो टूक कहा कि भगवान राम किसी पार्टी, किसी विचारधारा या किसी राजनीतिक एजेंडे तक सीमित नहीं हैं। वे करोड़ों लोगों की आस्था हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

वीरेंद्र सिंह के बयान के बाद से भाजपा और साधु-संतों के कई वर्ग समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं। रामभद्राचार्य का बयान इस विवाद को और तेज करने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में राम और समाजवाद की यह बहस और भी गहराएगी।

The controversy over Lord Ram being called a socialist has sparked a major political debate in India. Jagadguru Rambhadracharya questioned the Samajwadi Party by recalling the Ayodhya firing incident during Mulayam Singh Yadav’s tenure. The debate highlights the clash between political ideology, religious faith, and historical accountability, bringing Ayodhya, Ram Mandir movement, and Samajwadi Party politics back into national focus.

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