AIN NEWS 1: देश के प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाने का ऐलान कर दिया है, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला दिया है। 87 वर्षीय अन्ना हजारे ने साफ कहा है कि वह 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले स्थित अपने गाँव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन पर बैठेंगे। यह अनशन उनके अनुसार तब तक चलेगा, जब तक उनकी अंतिम सांस है। इस घोषणा ने महाराष्ट्र ही नहीं, दिल्ली तक की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
अन्ना हजारे ने यह निर्णय किस मुद्दे को लेकर लिया है? दरअसल, अन्ना लंबे समय से जनहित और पारदर्शिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा इन कानूनों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी वजह से अब उन्होंने एक बार फिर अनशन को हथियार के रूप में चुना है।
सरकार को लिखी कड़ी चेतावनी
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना अनशन नहीं छोड़ेंगे—even अगर इसकी कीमत उन्हें अपने प्राणों से क्यों न चुकानी पड़े।
अन्ना ने पत्र में लिखा है कि कई बार सरकार को आग्रह करने के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के हित में बनाए जाने वाले कानूनों को लटकाना देश के साथ अन्याय है। इसलिए अब उनके पास आमरण अनशन के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचा है।
अनशन का फैसला क्यों लिया?
अन्ना हजारे हमेशा से भ्रष्टाचार मुक्त शासन, लोकपाल-लोकायुक्त कानून और किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। उनकी लड़ाई हमेशा शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीकों से होती रही है।
पिछले कई महीनों से वे सरकार को कई बार याद दिला चुके हैं कि किसानों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार कम होने के बजाय और बढ़ रहा है और पारदर्शिता को लेकर हालात चिंताजनक हैं।
अन्ना का कहना है कि अगर सत्ता में बैठे लोग जनहित के कामों पर ध्यान नहीं देंगे, तो समाजसेवियों और जनता की आवाज़ उठाने वालों को मजबूर होकर कठिन कदम उठाने पड़ते हैं। इसी क्रम में उनका आमरण अनशन का फैसला सामने आया है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी बेचैनी
अन्ना हजारे की घोषणा के बाद महाराष्ट्र और दिल्ली दोनों जगह राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह पहली बार नहीं है जब अन्ना ने ऐसा बड़ा कदम उठाया हो। उनके पूर्व आंदोलनों ने केंद्र की राजनीति को हिलाकर रख दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि अन्ना हजारे अगर अनशन पर बैठते हैं तो इस बार भी इसका सीधा असर राज्य और केंद्र दोनों की राजनीति पर दिख सकता है। विपक्षी दल पहले ही सरकार पर सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर क्यों 87 साल के बुजुर्ग समाजसेवी को बार-बार सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार इस मामले में कोई बातचीत आगे बढ़ा सकती है, ताकि स्थिति अधिक गंभीर न हो।
रालेगण सिद्धि में तैयारियां शुरू
अन्ना के गाँव रालेगण सिद्धि में उनके समर्थकों ने अनशन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। गाँव के लोग भी चिंतित हैं, लेकिन वे अन्ना के साथ खड़े होने की बात कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी अन्ना के समर्थन में बयान जारी किए हैं।
स्थानीय प्रशासन भी सतर्क है और कहा जा रहा है कि अनशन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। डॉक्टरों की टीम भी मौके पर उपलब्ध रहेगी ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल स्वास्थ्य सहायता मिल सके।
अन्ना हजारे का संक्षिप्त संदेश
अन्ना हजारे ने अपने बयान में कहा है—
“देश को सही दिशा में ले जाने के लिए कई बार बलिदान देने पड़ते हैं। अगर मैं अपनी जान भी दे दूं तो भी देश और समाज का फायदा होना चाहिए। मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं।”
उनके इन शब्दों ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग अन्ना के समर्थन में अपनी राय दे रहे हैं।
आखिर जनता क्या चाहती है?
लोगों का कहना है कि सरकार और अन्ना हजारे दोनों को बातचीत के माध्यम से हल निकालना चाहिए, ताकि इस स्थिति तक न पहुँचना पड़े। हालांकि कई लोग यह भी मानते हैं कि अगर अन्ना जैसे वरिष्ठ समाजसेवी को अनशन पर बैठना पड़े, तो यह व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है।
जनता का यह भी कहना है कि सरकार को जनहित से जुड़े कानूनों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। अगर जनता और सरकार के बीच भरोसा मजबूत होगा, तो ऐसे आंदोलनों की नौबत नहीं आएगी।
Anna Hazare has announced an indefinite hunger strike starting January 30, 2026, in Ralegan Siddhi, urging the Maharashtra government and Chief Minister Devendra Fadnavis to implement key anti-corruption laws and public welfare reforms. His declaration has triggered strong reactions across Indian politics, raising national attention once again. This article covers the details of the protest, political impact, public response, and what this decision means for the future of governance reforms in India.


















