AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ कानून बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर देने वाला है। यहां एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी जिंदगी को बचपन से ही धार्मिक रस्मों और दबावों के नाम पर बार-बार कुचला गया। महिला का कहना है कि उसकी शादी महज 15 साल की उम्र में फोन पर तय कर दी गई थी, जिसके बाद उसे लगातार तीन तलाक, जबरन निकाह और हलाला जैसी प्रथाओं से गुजरना पड़ा।
पीड़िता के अनुसार, जब वह नाबालिग थी, तभी परिवार की सहमति से उसकी शादी कर दी गई। यह शादी आमने-सामने नहीं बल्कि फोन के जरिए तय हुई थी। उस समय न तो उसकी उम्र को महत्व दिया गया और न ही उसकी सहमति को। शादी के बाद उसका जीवन सामान्य होने के बजाय और अधिक पीड़ादायक बनता चला गया।
महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही उसका शौहर उसे प्रताड़ित करने लगा। घरेलू विवाद बढ़ते गए और इसी दौरान उसे पहली बार तीन तलाक दिया गया। तलाक के बाद समाज और परिवार के दबाव में उसे दोबारा उसी व्यक्ति से निकाह कराया गया। लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका।
पीड़िता का कहना है कि उसे दूसरी बार फिर तीन तलाक दिया गया। इसके बाद उसे निकाह के नाम पर हलाला के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में न केवल शौहर बल्कि उसका देवर और एक स्थानीय मौलाना भी शामिल थे। महिला के अनुसार, मौलाना ने धार्मिक नियमों की आड़ में हलाला को जायज ठहराया और उसकी मजबूरी का फायदा उठाया।
सबसे गंभीर बात यह है कि महिला को यह सब एक बार नहीं बल्कि दो बार झेलना पड़ा। हर बार उसे यही भरोसा दिलाया गया कि यह “धार्मिक प्रक्रिया” है और इसके बिना उसका भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। पीड़िता बताती है कि उसने लंबे समय तक चुप्पी इसलिए साधे रखी क्योंकि उसे समाज, बदनामी और अकेले पड़ जाने का डर था।
लेकिन जब अत्याचार की सीमा पार हो गई, तब उसने पुलिस का रुख किया। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शौहर, देवर और मौलाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपों की गहन जांच की जा रही है।
इस प्रकरण ने एक बार फिर तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं पर बहस को तेज कर दिया है। भले ही देश में तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित किया जा चुका हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह बताती है कि कई जगह आज भी महिलाएं इन कुप्रथाओं का शिकार हो रही हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि नाबालिग की शादी अपने आप में अपराध है। इसके साथ ही बार-बार तीन तलाक देना, जबरन हलाला कराना और महिला की सहमति के बिना धार्मिक प्रक्रियाओं में धकेलना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषियों को कड़ी सजा हो सकती है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि उस सोच का उदाहरण है जिसमें महिलाओं को अपनी जिंदगी पर फैसला लेने का अधिकार नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
फिलहाल पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराई गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। यह केस एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब कानून मौजूद है, तो फिर ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं और इन्हें रोकने के लिए समाज और प्रशासन को और क्या कदम उठाने चाहिए।
The Amroha triple talaq case has brought national attention to issues like child marriage, forced nikah, and halala practices in India. A woman alleged that she was married at the age of 15 and subjected to triple talaq twice, followed by forced nikah and halala. The FIR against her husband, devar, and a maulana highlights ongoing concerns about women’s rights, misuse of religious practices, and the enforcement of laws against triple talaq in Uttar Pradesh.



















