AIN NEWS 1: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सख्त और आक्रामक व्यापारिक रुख को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका निशाना ईरान और उससे व्यापार करने वाले देश हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर कोई देश ईरान के साथ व्यापार करता है, तो अमेरिका उस देश पर सीधे 25 प्रतिशत का टैरिफ लगा सकता है।
सोशल मीडिया पोस्ट से मचा वैश्विक हलचल
डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि अमेरिका अब उन देशों को बर्दाश्त नहीं करेगा जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना अमेरिका की प्राथमिकता है और इसके लिए सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे।
यह बयान सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मच गई। कई देशों के लिए यह चेतावनी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि ईरान के साथ ऊर्जा, तेल और अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कारोबार होता है।
रूस के बाद अब ईरान पर सख्ती
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह की धमकी दी हो। इससे पहले रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को भी इसी तरह के टैरिफ और प्रतिबंधों की चेतावनी दी जा चुकी है। अब ईरान को लेकर ट्रंप का रुख यह दर्शाता है कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को राजनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की नीति पर कायम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का ही विस्तार है, जिसमें अमेरिकी हितों को सबसे ऊपर रखा जाता है।
ईरान क्यों है ट्रंप के निशाने पर?
ईरान लंबे समय से अमेरिका के निशाने पर रहा है। परमाणु कार्यक्रम, मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश और अमेरिकी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते अमेरिका ने पहले भी ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रंप के कार्यकाल में ईरान न्यूक्लियर डील से अमेरिका का बाहर निकलना इसी नीति का हिस्सा था।
अब एक बार फिर ट्रंप ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा, तो ईरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग किया जा सकेगा।
किन देशों पर पड़ सकता है असर?
ईरान के साथ कई एशियाई, यूरोपीय और मध्य पूर्वी देशों के व्यापारिक संबंध हैं। खासतौर पर तेल और गैस के क्षेत्र में ईरान एक अहम खिलाड़ी है। यदि अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है, तो इन देशों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
ट्रंप की इस चेतावनी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ सकती है। पहले से ही कई देश मंदी और महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में नए टैरिफ से आयात-निर्यात महंगा होगा, जिसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा।
इसके अलावा, अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की भी आशंका है। कई विशेषज्ञ इसे संभावित “ट्रेड वॉर” की शुरुआत मान रहे हैं।
राजनीतिक रणनीति या चुनावी संदेश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल विदेश नीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसमें घरेलू राजनीति का पहलू भी छिपा है। अमेरिका में चुनावी माहौल में ऐसे सख्त बयान ट्रंप के समर्थकों को एकजुट करने का काम करते हैं।
“कड़े फैसले लेने वाला नेता” की छवि ट्रंप की राजनीति का अहम हिस्सा रही है और ईरान को लेकर यह बयान उसी रणनीति का विस्तार माना जा रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?
हालांकि इस चेतावनी पर ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ईरान इसे अमेरिका की दबाव की राजनीति बताएगा। ईरान पहले भी ऐसे प्रतिबंधों का सामना कर चुका है और वैकल्पिक व्यापारिक रास्ते तलाशता रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह चेतावनी कब और कैसे लागू होगी। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका वास्तव में 25 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है। साथ ही, यह भी अहम होगा कि अन्य देश इस चेतावनी पर क्या रुख अपनाते हैं
Former US President Donald Trump has issued a strong warning to countries trading with Iran, stating that the United States may impose a 25 percent tariff on nations doing business with Tehran. This announcement reflects Trump’s tough stance on Iran and global trade policies. The warning has raised concerns among countries engaged in Iran-US trade relations and could significantly impact global markets, sanctions policy, and international diplomacy.






