उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यभार में बदलाव किया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार दो वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में संशोधन किया गया है, जिससे विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक गति लाई जा सके।

यह तबादला राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़ा हुआ है, जो वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार समय-समय पर प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर कार्यक्षमता बढ़ाने की कोशिश करती रहती है और इसी क्रम में यह आदेश जारी किया गया है।
वी. हेकाली झिमोमी को मिली नई जिम्मेदारी
शासनादेश के अनुसार, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्रीमती वी. हेकाली झिमोमी, जो अब तक प्रतीक्षारत (वेटिंग) चल रही थीं, उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। सरकार ने उन्हें प्रमुख सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पद पर नियुक्त किया है।
यह विभाग राज्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का संचालन करता है। इसमें वन संरक्षण, हरित क्षेत्र विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण नीतियां, जैव विविधता संरक्षण, और जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियां शामिल हैं।
वी. हेकाली झिमोमी प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए जानी जाती हैं। उनके पास विभिन्न विभागों में काम करने का व्यापक अनुभव है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि विभाग की योजनाओं को नई दिशा और गति मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि उनकी नियुक्ति से पर्यावरणीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
अनिल कुमार-3 के कार्यभार में बदलाव
दूसरे आदेश में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री अनिल कुमार-3 के कार्यभार में आंशिक बदलाव किया गया है। वह अब तक प्रमुख सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा पंचायती राज विभाग दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
सरकार ने उन्हें प्रमुख सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पद से अवमुक्त कर दिया है। हालांकि, उनके अन्य दायित्व यथावत रहेंगे, यानी पंचायती राज विभाग से संबंधित जिम्मेदारियां वे पहले की तरह निभाते रहेंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य विभागीय कार्यों को अधिक केंद्रित और सुव्यवस्थित बनाना माना जा रहा है। जब किसी अधिकारी के पास एक से अधिक महत्वपूर्ण विभाग होते हैं, तो कार्यभार अधिक हो जाता है। ऐसे में सरकार अक्सर जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण करती है ताकि प्रशासनिक निर्णय तेजी से लिए जा सकें।
तबादले के पीछे प्रशासनिक रणनीति
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रशासनिक स्तर पर संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय अब केवल औपचारिक विभागीय जिम्मेदारी नहीं रहे, बल्कि विकास नीति का केंद्रीय हिस्सा बन चुके हैं।
राज्य में बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण, वन संरक्षण और जल संकट जैसी चुनौतियों को देखते हुए सरकार अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों में नियुक्त करती है। इसी रणनीति के तहत यह बदलाव किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी देने से नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ती है। इससे विभागीय निर्णयों में देरी कम होती है और जनता से जुड़े काम तेजी से पूरे हो पाते हैं।
वन एवं पर्यावरण विभाग की बढ़ती अहमियत
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने हरित विकास को प्राथमिकता दी है। वृक्षारोपण अभियान, जैव विविधता संरक्षण, नदी किनारे हरित पट्टी विकसित करना और प्रदूषण नियंत्रण जैसी योजनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब राज्यों के स्तर पर भी महसूस किए जा रहे हैं — जैसे अनियमित बारिश, तापमान में वृद्धि और पर्यावरणीय असंतुलन। ऐसे में इस विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।
नई नियुक्ति के बाद उम्मीद की जा रही है कि विभाग की योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर होगी और नीति स्तर पर नए निर्णय देखने को मिल सकते हैं।
प्रशासनिक बदलाव का जनता पर असर
हालांकि अधिकारियों के तबादले सीधे तौर पर आम जनता को प्रभावित नहीं करते, लेकिन लंबे समय में इसका असर विकास योजनाओं की गति पर दिखाई देता है। जब विभागों में नेतृत्व स्पष्ट होता है, तो योजनाओं की मंजूरी, बजट उपयोग और परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होता है।
विशेष रूप से पर्यावरण से जुड़े मामलों में प्रशासनिक सक्रियता का असर शहरों की हवा, हरित क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर पड़ता है। इसलिए ऐसे बदलावों को प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
सरकार का संदेश
इस आदेश के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि प्रशासनिक दक्षता और विभागीय जवाबदेही को प्राथमिकता दी जा रही है। योग्य अधिकारियों को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार जिम्मेदारी देकर शासन व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद वी. हेकाली झिमोमी विभाग की योजनाओं को किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों में क्या नए बदलाव देखने को मिलते हैं।


















