AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लखनऊ स्थित उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास पर एक फर्जी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। यह युवक खुद को दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का प्रतिनिधि बताकर उपमुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा था। लेकिन सतर्क सुरक्षा व्यवस्था और समय रहते की गई जांच के कारण एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि राजनीतिक नामों का गलत इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करने वाले तत्व कितने सक्रिय हो चुके हैं।
कैसे सामने आया फर्जीवाड़ा
बुधवार को दशरथ पाल नाम का एक युवक, जो कि गौतमबुद्ध नगर जिले के दादरी थाना क्षेत्र के घोड़ी बछेड़ा गांव का निवासी बताया जा रहा है, कुछ लोगों के साथ उपमुख्यमंत्री के सरकारी आवास पहुंचा। उसने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि वह दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का प्रतिनिधि है और उपमुख्यमंत्री से “शिष्टाचार भेंट” करना चाहता है।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन युवक की बातचीत, हाव-भाव और दिए गए परिचय में कई विसंगतियां थीं। यही बातें उपमुख्यमंत्री की सतर्कता टीम को खटक गईं।
शक गहराया, पूछताछ में खुली पोल
जब सुरक्षा टीम ने उससे उसके दावे से जुड़े दस्तावेज और संगठनात्मक जानकारी मांगी, तो वह कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका। उसके जवाब टालमटोल वाले थे और कई सवालों पर वह घबरा गया। इसी दौरान स्पष्ट हो गया कि युवक कुछ छिपा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सतर्कता टीम ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और उच्च अधिकारियों को सूचना दी।
पहले से मिल चुकी थी खुफिया जानकारी
बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पहले ही यह इनपुट मिल चुका था कि कोई व्यक्ति भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेकर अलग-अलग जिलों में लोगों को भ्रमित कर रहा है। वह खुद को किसी बड़े नेता का करीबी या प्रतिनिधि बताकर फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था।
इसी वजह से उपमुख्यमंत्री ने अपने आवास पर आने वाले हर व्यक्ति की सख्त जांच के निर्देश पहले से दे रखे थे। यही सतर्कता इस मामले में निर्णायक साबित हुई।
कई जिलों में कर चुका था ठगी के प्रयास
प्राथमिक पूछताछ में आरोपी दशरथ पाल ने स्वीकार किया कि वह खुद को “दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का प्रतिनिधि” बताकर नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में घूम चुका है। वह लोगों को संगठन में पद दिलाने, पहुंच बनवाने और सिफारिश कराने जैसे झांसे देता था।
पुलिस को आशंका है कि उसने कई लोगों को गुमराह कर आर्थिक या अन्य लाभ भी उठाया होगा। अब यह जांच का विषय है कि उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
उपमुख्यमंत्री की त्वरित और सख्त कार्रवाई
जैसे ही मामला सामने आया, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बिना देरी के आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने तुरंत दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को भी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, ताकि संगठन स्तर पर भी सतर्कता बढ़ाई जा सके।
उपमुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार और संगठन की छवि से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
“सुशासन से कोई समझौता नहीं” – केशव मौर्य
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा,
“प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और कानून का राज हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जो लोग सरकार या संगठन का नाम लेकर धोखाधड़ी करने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।”
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं और यदि कोई नेता या पदाधिकारी के नाम पर संदिग्ध गतिविधि करता दिखे, तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
पुलिस जांच जारी, पुराने केस का भी खुलासा
फिलहाल लखनऊ के गौतमपल्ली थाना क्षेत्र में आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने किन-किन लोगों को ठगा, कितनी रकम वसूली और उसके नेटवर्क में और कौन शामिल है।
दादरी कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ पहले से एक मारपीट का मामला भी दर्ज है। इससे यह साफ होता है कि उसका आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्यों अहम है यह मामला
यह घटना बताती है कि राजनीतिक पहचान का दुरुपयोग कर ठगी करने वाले तत्व लगातार सक्रिय हैं। अगर समय रहते ऐसे लोगों पर कार्रवाई न हो, तो न केवल आम लोग ठगे जाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संगठनों की साख को भी नुकसान पहुंचता है।
उपमुख्यमंत्री के आवास पर हुई यह कार्रवाई एक मजबूत संदेश देती है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था में कोई ढील नहीं बरती जाएगी।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर फर्जी प्रतिनिधि की गिरफ्तारी ने एक बड़े संभावित फर्जीवाड़े को समय रहते रोक दिया। यह मामला प्रशासन की सतर्कता, त्वरित निर्णय और सख्त रुख का उदाहरण है। अब पुलिस जांच से यह साफ होगा कि आरोपी ने कहां-कहां और कैसे लोगों को गुमराह किया।
A fake BJP representative was arrested at the official residence of Uttar Pradesh Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya in Lucknow after he falsely claimed to be a representative of Delhi BJP President Virendra Sachdeva. The accused allegedly used senior BJP leaders’ names to mislead people across several districts. Police have launched a detailed investigation into the political fraud case, highlighting strong security vigilance and strict action against impersonation in Indian politics.



















