AIN NEWS 1: तमिलनाडु के करूर जिले में पिछले साल हुई एक राजनीतिक रैली के दौरान मची भीषण भगदड़ अब एक बड़े कानूनी और जांच के मोड़ पर पहुंच गई है। इस त्रासदी से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के संस्थापक और मशहूर अभिनेता विजय को समन जारी किया है। जांच एजेंसी ने उन्हें 12 जनवरी को पूछताछ के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
करूर त्रासदी की पृष्ठभूमि
यह मामला उस रैली से जुड़ा है, जो विजय के नेतृत्व वाले राजनीतिक संगठन TVK द्वारा आयोजित की गई थी। रैली में भारी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता पहुंचे थे। अनुमान से कहीं अधिक भीड़ जमा होने के कारण अव्यवस्था फैल गई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था न होने और सुरक्षा प्रबंधन की खामियों की वजह से अचानक भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक घटना में 41 लोगों की जान चली गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
घटना के बाद पूरे राज्य में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था। मृतकों के परिजनों ने आयोजनकर्ताओं पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। विपक्षी दलों ने भी इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया। मामला स्थानीय पुलिस से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां पीड़ित परिवारों की ओर से याचिकाएं दायर की गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि यह घटना बेहद गंभीर प्रकृति की है और इसकी निष्पक्ष तथा पेशेवर जांच जरूरी है। पहले राज्य सरकार ने इस मामले के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, लेकिन कोर्ट ने उस जांच पर असंतोष जताते हुए CBI से जांच कराने का आदेश दे दिया।
CBI जांच में अब तक क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने इस केस की फाइल अपने हाथ में ली और नए सिरे से जांच शुरू की। जांच के शुरुआती चरण में एजेंसी ने TVK के शीर्ष पदाधिकारियों, रैली प्रबंधन से जुड़े लोगों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की। कई प्रमुख नेताओं के बयान दर्ज किए गए और दस्तावेजों की जांच की गई।
इसी क्रम में विजय का नाम भी जांच के दायरे में आया। एजेंसी का मानना है कि चूंकि रैली उनके संगठन द्वारा आयोजित की गई थी और वह पार्टी के प्रमुख हैं, इसलिए उनसे घटना से जुड़े कई अहम सवाल पूछे जाने जरूरी हैं। समन जारी होने से यह साफ हो गया है कि CBI इस मामले की जड़ तक पहुंचना चाहती है।
जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात का पता लगा रही है कि रैली के लिए अनुमति किस आधार पर ली गई, भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी थी, सुरक्षा इंतजामों का बजट कितना था और आपात स्थिति से निपटने की क्या योजना बनाई गई थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या भीड़ को लेकर खुफिया इनपुट मिले थे और अगर मिले थे तो उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया।
विजय को समन मिलने के बाद TVK के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के समर्थकों का कहना है कि विजय पूरी तरह जांच में सहयोग करेंगे। हालांकि राजनीतिक जानकार इसे एक संवेदनशील घटनाक्रम मान रहे हैं, क्योंकि विजय दक्षिण भारत की राजनीति में तेजी से उभर रहे चेहरों में शामिल हैं।
विजय से पूछताछ क्यों अहम
अभिनेता विजय सिर्फ फिल्मी दुनिया के बड़े सितारे ही नहीं, बल्कि अब एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता भी बन चुके हैं। उनकी रैलियों में अक्सर भारी भीड़ देखने को मिलती है। करूर की घटना के बाद से लगातार यह सवाल उठता रहा है कि क्या इतने बड़े आयोजनों के लिए पेशेवर टीम की तैनाती की गई थी या नहीं।
CBI यह समझना चाहती है कि रैली आयोजन से पहले अंतिम फैसले किसने लिए थे। क्या सुरक्षा एजेंसियों से सलाह ली गई थी? क्या पुलिस और प्रशासन ने लिखित रूप से चेतावनी दी थी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब सीधे विजय ही दे सकते हैं।
इस समन के बाद यह संभावना भी बन रही है कि आने वाले दिनों में TVK के अन्य बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों को भी तलब किया जा सकता है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि CBI जांच से उन्हें न्याय मिलेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
दूसरी खबर: काशी एक्सप्रेस में बम की झूठी धमकी
एक तरफ करूर त्रासदी की जांच चल रही है, वहीं उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में मंगलवार सुबह एक अलग तरह की अफरा-तफरी देखने को मिली। गोरखपुर से मुंबई जाने वाली काशी एक्सप्रेस ट्रेन में बम होने की सूचना मिलने के बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया। पुलिस को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके यह दावा किया था कि ट्रेन के भीतर विस्फोटक रखा गया है।
धमकी भरा कॉल और पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही मऊ पुलिस की टीम तत्काल प्लेटफॉर्म नंबर–1 पर पहुंच गई। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर आकर रुकी, पुलिस और रेलवे प्रशासन ने पूरी बोगियों को खाली कराने का निर्णय लिया। यात्रियों को जल्दबाजी में नीचे उतारा गया ताकि तलाशी अभियान शुरू किया जा सके।
रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में डर का माहौल बन गया था। महिलाएं और बच्चे घबराए हुए नजर आए। पुलिस ने बिना समय गंवाए बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वायड और जांच विशेषज्ञों को बुला लिया। ट्रेन की हर बोगी, शौचालय, सीटों के नीचे की जगह, सामान रखने वाले रैक और इंजन तक की बारीकी से जांच की गई।
करीब दो घंटे से अधिक समय तक सघन तलाशी अभियान चलता रहा। इस दौरान स्टेशन परिसर की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। लेकिन विस्तृत चेकिंग के बाद ट्रेन के अंदर या आसपास कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई।
यात्रियों को हुई परेशानी
बम धमकी की वजह से काशी एक्सप्रेस निर्धारित समय से काफी देर तक मऊ स्टेशन पर खड़ी रही। यात्रियों को भीषण असुविधा का सामना करना पड़ा। कई लोग मुंबई में अपनी नौकरी, इलाज या जरूरी कामों के लिए जा रहे थे। ट्रेन खाली कराए जाने के कारण उनका पूरा शेड्यूल बिगड़ गया।
तलाशी पूरी होने के बाद पुलिस ने यात्रियों को दोबारा ट्रेन में बैठने की अनुमति दी। रेलवे प्रशासन ने घोषणा की कि ट्रेन पूरी तरह सुरक्षित है और यात्रा जारी रखी जा सकती है। इसके बाद काशी एक्सप्रेस को अगले स्टेशन के लिए रवाना कर दिया गया।
झूठी धमकियों का बढ़ता चलन
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह कॉल पूरी तरह झूठा और शरारतपूर्ण था। लेकिन ऐसी सूचनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता, इसलिए तुरंत कार्रवाई जरूरी होती है। हाल के महीनों में देशभर में ट्रेनों और हवाई जहाजों को लेकर झूठी बम धमकियों के कई मामले सामने आए हैं।
सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में दिल्ली कोर्ट में सुनवाई, कांग्रेस ने मांगा और समय!
यूपी पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और कॉलर की पहचान करने में जुट गई है, जिसने यह सूचना दी थी। रेलवे एक्ट और आईटी कानूनों के तहत झूठी धमकी देने वाले व्यक्ति पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
सुरक्षा और जिम्मेदारी का सवाल
दोनों खबरें भले ही अलग-अलग राज्यों और परिस्थितियों से जुड़ी हों, लेकिन इनमें एक समान पहलू साफ नजर आता है—सार्वजनिक सुरक्षा का महत्व। करूर भगदड़ मामला भीड़ प्रबंधन की विफलता का उदाहरण है, जबकि काशी एक्सप्रेस की घटना झूठी सूचना से पैदा हुई घबराहट को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े राजनीतिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित वॉलंटियर और पर्याप्त पुलिस समन्वय बेहद जरूरी हैं। वहीं परिवहन सेवाओं में किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए, ताकि आम लोगों में बेवजह डर न फैले।
करूर मामले में जहां CBI की जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, वहीं मऊ पुलिस की तत्परता ने एक संभावित संकट को समय रहते संभाल लिया। यात्रियों और नागरिकों की सुरक्षा हर स्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Tamil Nadu Karur stampede case has taken a significant turn as CBI issued summons to TVK chief and actor Vijay for questioning regarding the political rally tragedy and poor crowd management. The investigation ordered by the Supreme Court is focusing on negligence and security lapses. In another major incident, Kashi Express bomb threat in Mau railway station, Uttar Pradesh created nationwide attention after police evacuated passengers and conducted an intensive train search operation, highlighting the seriousness of false bomb threat cases in India.



















