AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आए गैंगरेप मामले ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था और पीड़िताओं के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो अब सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहा है, जो घटना के अगले दिन का बताया जा रहा है। वीडियो में पीड़िता, आरोपी दारोगा अमित मौर्या और एक कथित पत्रकार चौकी के भीतर दिखाई दे रहे हैं।
इस वीडियो के सामने आने के बाद सिर्फ अपराध ही नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली, संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर भी बहस तेज हो गई है।
📹 वीडियो में क्या दिखाई देता है?
वायरल वीडियो में पीड़िता चौकी के अंदर बैठी हुई नजर आती है। सामने आरोपी दारोगा अमित मौर्या मौजूद है, जो उस वक्त वर्दी में नहीं है। पीड़िता स्पष्ट शब्दों में कहती सुनाई देती है—
“गैंगरेप करने वाला व्यक्ति भी आपके जैसे ही कपड़े पहने हुए था।”
पीड़िता का यह बयान कई सवाल खड़े करता है। क्या आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने की कोशिश की थी? क्या पीड़िता पर बयान बदलने या चुप रहने का दबाव बनाया गया?
वीडियो में यह भी देखा गया कि उस समय वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, जबकि कानून और पुलिस मैनुअल के अनुसार किसी भी महिला पीड़िता से पूछताछ के दौरान महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी अनिवार्य होती है।
🚨 दबाव और डर का माहौल?
वीडियो को देखने के बाद कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पीड़िता को चौकी में असहज माहौल में बैठाकर बयान देने के लिए मजबूर किया गया। यह भी सवाल उठ रहा है कि—
पीड़िता को आरोपी के सामने क्यों बैठाया गया?
महिला पुलिसकर्मी को क्यों नहीं बुलाया गया?
कथित पत्रकार की मौजूदगी किस अनुमति से थी?
इन तमाम बिंदुओं ने यह शंका पैदा कर दी है कि क्या पीड़िता पर समझौते या बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
👮 आरोपी दारोगा अमित मौर्या पर गंभीर आरोप
इस मामले में आरोपी बनाए गए दारोगा अमित मौर्या पर पहले से ही कई गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता के अनुसार, उसने पुलिस पद का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ उसका भरोसा तोड़ा, बल्कि अपराध को अंजाम देने के बाद अपनी पहुंच और रसूख का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश भी की।
पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उसे लगातार डराया गया और यह महसूस कराया गया कि आरोपी पुलिस में है, इसलिए उसके खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं होगा।
⚖️ पुलिस का पक्ष क्या है?
कानपुर पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद सफाई देते हुए कहा है कि—
वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं
अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी
हालांकि पुलिस के इस बयान से लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि जब सब कुछ कैमरे में साफ दिख रहा है, तो जांच की जरूरत क्यों?
🧑⚖️ कानून और प्रक्रिया पर सवाल
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वीडियो में दिखाई गई बातें सही हैं, तो यह कई नियमों का उल्लंघन है, जैसे—
महिला पीड़िता से बिना महिला पुलिसकर्मी के पूछताछ
आरोपी और पीड़िता को आमने-सामने बैठाना
संवेदनशील मामले में बाहरी व्यक्ति (कथित पत्रकार) की मौजूदगी
ऐसी लापरवाही से न सिर्फ न्याय प्रक्रिया कमजोर होती है, बल्कि पीड़िता का मनोबल भी टूटता है।
🗣️ समाज और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। कई यूज़र्स ने इसे “सिस्टम की विफलता” बताया, तो कुछ ने कहा कि अगर पीड़िता कैमरे में भी सुरक्षित नहीं है, तो आम हालात में उसकी स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
महिला संगठनों ने मामले की CBI या SIT जांच की मांग की है और आरोपी दारोगा को तुरंत बर्खास्त करने की अपील की है।
🔍 आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा?
क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
या यह मामला भी जांच और बयानों के बीच दबा दिया जाएगा?
यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की साख और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।
The Kanpur gangrape case has sparked nationwide outrage after a viral video showed the victim confronting accused sub-inspector Amit Maurya inside a police outpost. The footage has raised serious concerns about police misconduct, lack of female officers during victim interaction, and possible pressure tactics. As the Kanpur police claim an internal investigation is underway, the case has become a symbol of the urgent need for accountability and transparency in handling sexual assault cases in India.


















