AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश से सामने आई एक खबर इन दिनों सामाजिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अवसर था गणतंत्र दिवस समारोह, और मंच पर मौजूद थे राज्य के सीनियर IPS अधिकारी और ADG स्तर के अफसर राजा बाबू सिंह। उन्होंने अपने संबोधन में मदरसा छात्रों से ऐसा संदेश साझा किया, जो न केवल शिक्षा बल्कि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता से भी जुड़ा हुआ है।
गणतंत्र दिवस पर दिया गया खास संदेश
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में राजा बाबू सिंह मदरसे के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने छात्रों को पढ़ाई, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के महत्व पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि अगर छात्र कुरान के साथ-साथ गीता भी पढ़ें, तो उनका भविष्य और अधिक रोशन हो सकता है।
उनका यह कथन किसी धार्मिक तुलना या विवाद के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समझ और आपसी सम्मान को बढ़ाने के मकसद से था।
धार्मिक समन्वय पर जोर
IPS अधिकारी ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां एक-दूसरे के साथ मिलकर देश की पहचान बनाती हैं। ऐसे में यदि युवा पीढ़ी केवल अपने धर्म तक सीमित न रहकर अन्य धार्मिक ग्रंथों के मूल विचारों को भी समझे, तो समाज में सहिष्णुता और भाईचारे की भावना मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि कुरान और गीता दोनों ही मानवता, नैतिकता, सत्य और कर्तव्य का संदेश देती हैं, और इनसे सीख लेने में कोई विरोधाभास नहीं है।
शिक्षा को बताया सबसे बड़ा हथियार
राजा बाबू सिंह ने छात्रों से बातचीत के दौरान शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की तरक्की तभी संभव है जब उसके युवा शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार हों। मदरसा छात्रों से उन्होंने अपील की कि वे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों पर भी ध्यान दें, ताकि वे बदलते समय के साथ कदम से कदम मिला सकें।
उनका कहना था कि ज्ञान जितना व्यापक होगा, सोच उतनी ही उदार और मजबूत बनेगी।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
अपने भाषण में IPS अधिकारी ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के छात्र ही कल के नागरिक, अधिकारी और नेता बनेंगे। ऐसे में उनमें देश के संविधान, कानून और राष्ट्रीय मूल्यों की समझ होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का महत्व समझाते हुए बताया कि भारत की ताकत उसकी एकता, समानता और धर्मनिरपेक्षता में है।
किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं था बयान
राजा बाबू सिंह के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन उनके संबोधन का मूल भाव किसी धर्म के विरोध में नहीं बल्कि सभी धर्मों के बीच सम्मान और संवाद को बढ़ावा देने वाला था। उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा कि कोई एक ग्रंथ दूसरे से श्रेष्ठ है, बल्कि यह संदेश दिया कि अच्छी बातों को कहीं से भी ग्रहण करना चाहिए।
छात्रों पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
कार्यक्रम में मौजूद छात्रों और शिक्षकों के अनुसार, IPS अधिकारी का संबोधन प्रेरणादायक था। छात्रों ने इसे अपने भविष्य से जोड़कर देखा और कहा कि इस तरह की बातें उन्हें समाज को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती हैं। कई छात्रों ने यह भी माना कि अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों के मूल विचार जानना उनके दृष्टिकोण को व्यापक बना सकता है।
समाज के लिए एक व्यापक संदेश
राजा बाबू सिंह का यह बयान केवल मदरसा छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है। आज जब देश में कई बार धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर तनाव देखने को मिलता है, ऐसे समय में समानता, समझ और संवाद पर आधारित संदेश महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर दिया गया यह संदेश यह याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में छिपी है। कुरान हो या गीता, दोनों का उद्देश्य इंसान को बेहतर बनाना है। अगर युवा पीढ़ी इन मूल्यों को समझे और अपनाए, तो न केवल उनका भविष्य उज्ज्वल होगा, बल्कि समाज भी अधिक संतुलित और सौहार्दपूर्ण बनेगा।
Senior IPS officer Raja Babu Singh’s speech to madrasa students on Republic Day in Madhya Pradesh has drawn attention for its message of religious harmony and national unity. Encouraging students to read both the Quran and the Gita, the IPS officer highlighted the importance of education, mutual respect, and cultural understanding. The address emphasized that learning from different religious texts can help build a brighter future and strengthen India’s social fabric through tolerance and unity.


















