AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बहुत जल्द एक ऐसी कुर्सी मिलने जा रही है, जो न सिर्फ अपने अनोखे डिज़ाइन के कारण चर्चा में है, बल्कि इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भी इसे खास बनाती है। यह कुर्सी किसी आम लकड़ी से नहीं, बल्कि केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना में बची हुई देवदार की पवित्र लकड़ी से तैयार की गई है।
इस विशेष कुर्सी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शेरों की आकृति उकेरी गई है, जो शक्ति, साहस और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इसे ‘शेरों वाली कुर्सी’ कहा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि भी एक सख्त और निर्णायक प्रशासक की रही है, ऐसे में यह कुर्सी उनके व्यक्तित्व से मेल खाती हुई नजर आती है।
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केदारनाथ प्रोजेक्ट से जुड़ा है कुर्सी का आध्यात्मिक संबंध
यह कुर्सी केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्य के दौरान बची देवदार की लकड़ियों से बनाई गई है। केदारनाथ धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। वहां प्रयुक्त होने वाली देवदार की लकड़ी को धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि देवदार की लकड़ी नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है और वातावरण को शुद्ध बनाती है।
इसी पवित्र लकड़ी से बनी यह कुर्सी न केवल देखने में भव्य है, बल्कि इससे एक प्राकृतिक सुगंध भी निकलती है। बताया जा रहा है कि जहां भी यह कुर्सी रखी जाएगी, वहां वातावरण में हल्की-सी खुशबू बनी रहेगी, जो मन को शांत करने का काम करेगी।
उत्तराखंड के मंदिरों जैसी नक्काशी
इस कुर्सी को तैयार करने में उत्तराखंड की पारंपरिक मंदिर शैली की नक्काशी को खास तौर पर ध्यान में रखा गया है। कुर्सी पर की गई बारीक नक्काशी में पहाड़ी मंदिरों की झलक साफ नजर आती है। कारीगरों ने महीनों की मेहनत से इसे तैयार किया है, ताकि यह सिर्फ एक फर्नीचर नहीं, बल्कि कला और आस्था का प्रतीक बन सके।
कुर्सी के पिछले हिस्से और हत्थों पर शेरों की आकृतियां उकेरी गई हैं, जो इसे शाही रूप देती हैं। यह नक्काशी उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है।
प्राकृतिक सुगंध से महकेगा माहौल
देवदार की लकड़ी की एक और खासियत इसकी प्राकृतिक खुशबू है। यह खुशबू न तो तेज होती है और न ही बनावटी, बल्कि बेहद सौम्य और मन को सुकून देने वाली होती है। यही वजह है कि इसे आयुर्वेद और वास्तु शास्त्र में भी महत्वपूर्ण माना गया है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास या कार्यालय में जब यह कुर्सी रखी जाएगी, तो वहां का वातावरण स्वतः ही सुगंधित और सकारात्मक बना रहेगा।
कला, संस्कृति और पर्यावरण का संदेश
इस कुर्सी के जरिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी सामने आता है। केदारनाथ प्रोजेक्ट में बची लकड़ी का इस तरह उपयोग यह दिखाता है कि संसाधनों का सम्मान कैसे किया जा सकता है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और पुनः उपयोग (री-सायक्लिंग) की सोच को भी मजबूत करती है।
साथ ही, यह कुर्सी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाती है। देवभूमि उत्तराखंड की लकड़ी से बनी यह कुर्सी यूपी के मुख्यमंत्री तक पहुंचना, दोनों राज्यों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और गहरा करता है।
योगी आदित्यनाथ की छवि से मेल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक सख्त प्रशासक, संत और जननेता के रूप में जाना जाता है। शेरों की आकृति वाली यह कुर्सी उनके नेतृत्व शैली का प्रतीक मानी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह कुर्सी शक्ति, अनुशासन और सेवा—तीनों का संगम है।
जल्द होगी औपचारिक प्रस्तुति
बताया जा रहा है कि इस कुर्सी को जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औपचारिक रूप से सौंपा जाएगा। इसके बाद इसे मुख्यमंत्री कार्यालय या आवास में स्थापित किया जा सकता है। कुर्सी के सामने आते ही यह राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चाओं का विषय बन गई है।
कुल मिलाकर, यह कुर्सी सिर्फ बैठने का साधन नहीं, बल्कि आस्था, कला, संस्कृति और नेतृत्व का प्रतीक बनकर सामने आई है।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath is set to receive a unique lion-themed chair made from sacred cedar wood left over from the Kedarnath reconstruction project. The specially crafted chair features intricate temple-style carvings inspired by Uttarakhand’s heritage and emits a natural fragrance due to the cedar wood. This exclusive piece reflects spiritual significance, cultural craftsmanship, and leadership symbolism, making it a notable highlight in CM Yogi Adityanath news.


















