इसी बात को आधार बना कर उत्तर प्रदेश के मदरसा बोर्ड प्रदेश के ग़ैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की काया पलटने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है.
30 अगस्त को उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक आदेश पारित किया. सरकार ने सभी ज़िलों के डीएम से कहा है कि वो ग़ैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करवा कर सरकार को इसकी जानकारी दें।
मदरसों के सर्वे के योगी सरकार के आदेश पर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गयी है।एआईएमआईएम के प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी ने सरकार की इस पहल के बारे में कहा, “मदरसे संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार हैं तो उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वेक्षण का ही आदेश क्यों दिया है? यह कोई सर्वेक्षण भी नहीं है।बल्कि एक छोटा एनआरसी है. कुछ मदरसे उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अधीन हैं. तो आप क्यों शक़ कर रहे हैं। मदरसों पर. राज्य सरकार हमारे अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।वे मुसलमानों को परेशान भी करना चाहते हैं. आपका मक़सद है इस्लाम को बदनाम करना.”आपको यह भी बता दें कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा शासित असम से मदरसों पर बुलडोज़र चलने की ख़बरें भी आई हैं. राज्य के बोंगाईं गांव ज़िले में सरकार की ओर से एक मदरसा गिराए जाने की भी ख़बर सामने आई और बीते कुछ दिनों में राज्य सरकार तीन मदरसे भी गिरा चुकी है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का कहना है।कि इन मदरसों से चरमपंथी गतिविधियां चलाई जा रही थीं.समाचार एजेंसी एएनआई से असम के एक नेता बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि 2024 के चुनाव नज़दीक हैं. उनके अनुसार मदरसे इसलिए तोड़े जा रहे हैं ताकि मुसलमान 2024 के चुनाव में डर कर बीजेपी को ही वोट दे दें.
इन घटनाओं और भाजपा शासित राज्यों में मदरसों से जुड़े आदेशों से बने माहौल के बाद मदरसों में मिलने वाली तालीम और आज के ज़माने में शिक्षा में उनकी भूमिका एक बार फिर से चर्चा में है.हमने उत्तर प्रदेश के कुछ मदरसों में जाकर यह जानने की भी कोशिश की है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के मदरसों में सुधार और आधुनिकीकरण की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है?
जल्द ही आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।