क्यों AAP नेता राजेश गुप्ता ने छोड़ी पार्टी? सौरभ भारद्वाज ने बताए पूरे कारण, दी शुभकामनाएं!

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AIN NEWS 1: दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव तब देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी के दो बार के विधायक रहे राजेश गुप्ता ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली नगर निगम (MCD) उपचुनाव होने वाले हैं, इसलिए इस कदम को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजेश गुप्ता के इस निर्णय को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सामने आकर स्पष्ट रूप से बताया कि आखिर किन कारणों के चलते गुप्ता ने पार्टी से नाता तोड़ा। भारद्वाज ने उनके फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुप्ता ने अपनी पत्नी के लिए अशोक विहार वार्ड से पार्षद टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने इस पर सहमति नहीं दी। इसी के बाद उन्होंने AAP छोड़ने का निर्णय लिया।

भाजपा में शामिल होने पर AAP की प्रतिक्रिया

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पार्टी ने हमेशा राजेश गुप्ता का सम्मान किया और उन्हें चार बार विधायक का टिकट दिया। उन्होंने कहा—

“राजेश गुप्ता जी हमारे भाई जैसे हैं। लेकिन जब पार्टी ने अशोक विहार के उपचुनाव में उनकी पत्नी को टिकट नहीं देने का फैसला किया, तब उन्होंने नाराज होकर पार्टी छोड़ दी। हमारी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ हैं।”

भारद्वाज ने यह भी कहा कि गुप्ता ने AAP के कुछ आंतरिक मुद्दों पर अन्य राजनीतिक पार्टियों के साथ बातचीत की थी। जब वहां भी सहमति नहीं बनी, तब उन्होंने अंततः भाजपा जॉइन कर ली। उनके अनुसार, यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय था।

कौन हैं राजेश गुप्ता?

राजेश गुप्ता न केवल दो बार विधायक रह चुके हैं, बल्कि वे AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी की कर्नाटक इकाई के प्रभारी भी थे। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

इससे पहले वे वजीरपुर क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और AAP में उपाध्यक्ष पद पर भी कार्यरत थे।

पार्टी छोड़ते समय भावुक हुए गुप्ता

भाजपा में शामिल होने के दौरान राजेश गुप्ता ने AAP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि AAP में अब कार्यकर्ताओं के साथ “इस्तेमाल करो और फेंक दो” जैसा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए इतने साल काम किया, तब भी उनकी बात नहीं सुनी गई।

बताया गया कि पार्टी छोड़ते समय वे भावुक हो गए और AAP में अपने वर्षों के योगदान को याद करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा—

“जब AAP की स्थापना हुई थी, तब कई लोग उत्साह के साथ अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़े थे। लेकिन धीरे-धीरे सभी को निराशा हाथ लगी और एक-एक कर लोग उनसे दूर होते गए। दुर्भाग्य से, आज मैं भी उसी सूची का हिस्सा बन गया हूं।”

टिकट न मिलने से नाराज़गी?

राजेश गुप्ता ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी में अपनी ईमानदार सेवा और निष्ठा के बावजूद जब अशोक विहार वार्ड के उम्मीदवार चयन को लेकर आपत्तियां जताईं, तब पार्टी अध्यक्ष ने उनसे बात करना भी जरूरी नहीं समझा।

उनके अनुसार AAP ने जिस उम्मीदवार को टिकट दिया है, उसी व्यक्ति के खिलाफ कुछ समय पहले पार्टी ने ही नोटिस जारी किया था।

गुप्ता का कहना था कि ऐसे फैसलों से यह साफ होता है कि पार्टी अब सिद्धांतों के बजाय व्यक्तिगत पसंद-नापसंद पर चलने लगी है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।

भाजपा में जाने के बाद क्या कहा गुप्ता ने?

भाजपा में शामिल होते ही राजेश गुप्ता ने कहा कि AAP के शुरुआती आदर्श अब खत्म हो चुके हैं।

उन्होंने कहा—

“मैंने पार्टी के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन बदले में केवल उपहास और उपेक्षा मिली। केजरीवाल जी ने उन सभी लोगों को धोखा दिया जो उनकी ईमानदारी की छवि पर विश्वास करके उनके साथ आए थे।”

गुप्ता का दावा है कि AAP अब उसी स्थिति में खड़ी है जहां नेतृत्व अपने पुराने साथियों को पहचानने तक के लिए तैयार नहीं।

उन्होंने कहा कि भाजपा में उन्हें सम्मान और सुनवाई मिलेगी, इसलिए उन्होंने नई राजनीतिक शुरुआत करने का फैसला किया।

दिल्ली की राजनीति पर इसका क्या असर?

राजेश गुप्ता जैसे वरिष्ठ नेता का AAP छोड़ना निश्चित रूप से पार्टी के लिए झटका माना जा रहा है, खासकर MCD उपचुनाव से ठीक पहले।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से जहां भाजपा को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है, वहीं AAP की चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है।

AAP के लिए खतरे की घंटी?

हाल के महीनों में कई नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या AAP अपनी आंतरिक चुनौतियों से निपट पाने में असफल हो रही है?

पार्टी नेतृत्व पर यह आरोप लगना कि कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जाती, पार्टी के लिए बड़े खतरे का संकेत है।

Rajesh Gupta’s exit from the Aam Aadmi Party has become a major turning point in Delhi politics. As a two-time MLA and senior AAP leader, his decision to join the BJP ahead of the MCD bypolls has raised many questions. In this article, we explain why Rajesh Gupta quit AAP, what Saurabh Bharadwaj revealed about the internal conflict, and how tensions between Arvind Kejriwal and long-time party workers may have contributed to the split. This detailed report covers the political shift, controversy, and its impact on Delhi’s political landscape.

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