AIN NEWS 1 गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़): हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर में गंगा किनारे हर साल लगने वाला खादर मेला इस बार और भी भव्य रूप लेने जा रहा है। गंगा के तटवर्ती इलाके में अब तंबुओं का शहर बसने लगा है। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है और पूरा क्षेत्र धार्मिक उत्सव में डूबने लगा है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य सरकारी संस्थाएं मिलकर व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
इस बार खादर मेला 4 नवंबर से शुरू होगा, लेकिन उससे पहले ही हजारों श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचने लगे हैं। जहां पहले सिर्फ रेत और जंगल दिखाई देता था, अब वहां दूर-दूर तक तंबुओं की कतारें नज़र आने लगी हैं। इन तंबुओं में लोग परिवारों के साथ ठहर रहे हैं, वहीं व्यापारी अपने स्टॉल और दुकानें तैयार कर रहे हैं।
गंगा किनारे बसा तंबुओं का शहर
गढ़मुक्तेश्वर के करीब 15 मील लंबे गंगा तटीय इलाके में अब तंबुओं की एक महानगरी तैयार हो चुकी है। यहां हजारों की संख्या में छोटे-बड़े तंबू, झोपड़ियाँ और दुकानें लग चुकी हैं। इस पूरे क्षेत्र को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
जिला पंचायत विभाग सड़कों की मरम्मत, अस्थाई मार्गों के निर्माण, हैंडपंप लगाने और पथ प्रकाश (स्ट्रीट लाइट्स) जैसी सुविधाओं पर काम कर रहा है। साथ ही वीआईपी कैंप और विश्राम स्थल तैयार किए जा रहे हैं ताकि प्रमुख अतिथि, संत-महात्मा और प्रशासनिक अधिकारी आराम से ठहर सकें।
35 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
इस वर्ष मेले में लगभग 35 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। भीड़ का यह स्तर पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक उत्सव और व्यापारिक गतिविधियों का भी केंद्र बन चुका है।
गंगा स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक प्रवचन के अलावा मेले में मनोरंजन, झूले, और स्थानीय व्यापारियों की दुकानें लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आस-पास के जिलों से लोग अपने परिवारों के साथ यहां पहुंच रहे हैं, जिससे मेले की रौनक बढ़ गई है।
सुरक्षा में 5000 पुलिसकर्मी होंगे तैनात
भीड़ के इस विशाल स्तर को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। कानपुर, आगरा और मेरठ जोन सहित लगभग 20 जिलों से करीब 5000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा पीएसी बल, खुफिया विभाग, और आरएएफ यूनिट्स को भी जिम्मेदारी दी गई है।
मेला प्रभारी निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि अब तक लगभग 1500 पुलिसकर्मी रिजर्व पुलिस लाइन में पहुंच चुके हैं। अगले कुछ दिनों में बाकी बल भी अपनी ड्यूटी पर पहुंच जाएंगे। मेला क्षेत्र में थाने, चौकियां और वॉच टावर बनाए जा रहे हैं ताकि सुरक्षा निगरानी हर दिशा से की जा सके।
सीओ सिटी वरुण मिश्रा ने कहा कि जैसे ही सभी पुलिस बलों की आमद पूरी हो जाएगी, वॉच टावरों और संवेदनशील स्थानों पर तैनाती शुरू कर दी जाएगी। सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
व्यवस्था में जुटा प्रशासन
मेला प्रशासन पूरी सक्रियता से काम में लगा है। जिला पंचायत और नगर पालिका विभाग ने संयुक्त रूप से सड़कों की सफाई, कूड़ा निस्तारण, और प्रकाश व्यवस्था में तेजी लाई है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्थाई स्वास्थ्य शिविर और एंबुलेंस सेवाएं भी तैनात करने की योजना बनाई है ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
पेयजल आपूर्ति के लिए जगह-जगह हैंडपंप और अस्थाई पानी के टैंकर लगाए जा रहे हैं। वहीं बिजली विभाग ने अस्थाई ट्रांसफार्मर और तारों की व्यवस्था शुरू कर दी है।
व्यापार और आस्था का संगम
खादर मेला केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं, बल्कि व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय दुकानदारों और दूर-दराज से आए व्यापारियों के लिए यह मेला साल की सबसे बड़ी कमाई का अवसर होता है। कपड़े, खिलौने, आभूषण, मिठाइयाँ, धार्मिक वस्तुएँ और झूले जैसी चीजें मेले की रौनक को और बढ़ा देती हैं।
गांवों और कस्बों से आए लोगों के लिए यह सिर्फ स्नान का मौका नहीं, बल्कि एक पारिवारिक उत्सव की तरह है। बच्चे झूलों का आनंद लेते हैं, महिलाएं खरीदारी में मशगूल रहती हैं और पुरुष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
चार नवंबर से आरंभ होगा पावन मेला
चार नवंबर को जब गंगा मेले का औपचारिक शुभारंभ होगा, तब आस्था का यह संगम अपने चरम पर होगा। लाखों श्रद्धालु सुबह गंगा स्नान करेंगे, मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे और आरती में शामिल होंगे।
यह मेला उत्तर प्रदेश की संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। गंगा किनारे बसी यह तंबुओं की नगरी आने वाले दिनों में श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखाई देगी।
The Khader Fair in Hapur is all set to welcome over 3.5 million devotees along the banks of the Ganga River in Garhmukteshwar. The area has turned into a city of tents, symbolizing faith and tradition. Authorities are working on roads, lighting, and water facilities, while around 5,000 police personnel from multiple districts are deployed to ensure security. With traders, pilgrims, and tourists arriving from across India, the Khader Mela 2025 promises to be one of the largest and most vibrant religious gatherings in North India.






