AIN NEWS 1: हापुड़ जिले में इस साल गढ़ गंगा मेला बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु और ग्रामीण लोग इस ऐतिहासिक मेले में शामिल होते हैं। परंपरा, व्यापार और मनोरंजन के इस मेल में कई वर्षों से भैसा-बुग्गी दौड़ का आयोजन आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने इस दौड़ पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
जिला प्रशासन की ओर से साफ़ निर्देश जारी किए गए हैं कि मेले में किसी भी प्रकार की पशु दौड़ आयोजित नहीं की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति या समूह इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल भेजने तक की बात शामिल है।
डीएम हापुड़ ने स्पष्ट किया:
जिला अधिकारी ने कहा कि इस तरह की दौड़ें न केवल पशु क्रूरता कानून का उल्लंघन करती हैं, बल्कि इससे लोगों की जान को भी खतरा होता है। कई बार देखा गया है कि इन दौड़ों के दौरान हादसे हो जाते हैं, जिससे प्रतिभागी और दर्शक दोनों घायल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मकसद मेले को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है।
कानूनी रूप से पशु दौड़ पर रोक:
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत भैंस, बैल या किसी भी जानवर को खेल या प्रदर्शन के लिए जबरदस्ती दौड़ाना प्रतिबंधित है। इस कानून का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल, दोनों हो सकते हैं। प्रशासन ने इस बार पहले से ही साफ़ कर दिया है कि गढ़ गंगा मेले के दौरान कोई भी ऐसी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस और प्रशासन की तैनाती:
गढ़ गंगा मेले के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। हापुड़ पुलिस ने सभी प्रवेश द्वारों पर चेकिंग बढ़ा दी है। ड्रोन कैमरों की मदद से भीड़ पर नजर रखी जा रही है ताकि कोई भी अवैध गतिविधि या भैसा-बुग्गी दौड़ जैसी घटनाएं ना हो सकें।
ग्रामीणों में मिली-जुली प्रतिक्रिया:
गांवों के कुछ बुजुर्गों ने प्रशासन के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आज के समय में सुरक्षा और कानून का पालन सबसे जरूरी है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है और इसे अचानक खत्म करना उचित नहीं है। लेकिन प्रशासन का कहना है कि परंपरा के नाम पर किसी की जान या पशु की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
डीएम की अपील:
डीएम ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी विवाद या अवैध आयोजन की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। उन्होंने कहा कि मेला सभी के लिए है — सुरक्षा और शांति बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
पशु कल्याण समितियों की सराहना:
कई पशु संरक्षण संगठनों ने भी जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसी दौड़ों से जानवरों को अत्यधिक तनाव, चोटें और थकावट झेलनी पड़ती है। सरकार द्वारा जारी यह आदेश पशु अधिकारों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
मेले की अन्य व्यवस्थाएं:
गढ़ गंगा मेला धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और सामाजिक मेलजोल के लिए यहां आते हैं। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में पानी, रोशनी, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गढ़ गंगा मेला न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि समाज के एकजुट होने का अवसर भी है। प्रशासन द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध को समझना और उसका पालन करना सभी की जिम्मेदारी है ताकि यह मेला शांति और व्यवस्था के साथ सम्पन्न हो सके।
The District Magistrate of Hapur has officially banned the bullock cart race at the Garh Ganga Fair to prevent animal cruelty and ensure public safety. This decision comes under the Prevention of Cruelty to Animals Act. The Hapur administration has warned that anyone organizing or participating in such races will face strict legal action, including imprisonment. With drone surveillance and heavy police deployment, the administration is determined to make the Garh Ganga Mela 2025 a peaceful and safe event for all devotees and visitors.



















