AIN NEWS 1: गाजियाबाद तेजी से विकसित हो रहा शहर है, लेकिन विकास के साथ-साथ बढ़ता प्रदूषण अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है। धूल भरी सड़कें, लगातार लगने वाला जाम और खराब होती हवा ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद नगर निगम ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है।
नगर निगम ने शहर की 15 प्रमुख सड़कों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना तैयार की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना के पूरा होने के बाद इन सड़कों पर न तो धूल उड़ेगी और न ही ट्रैफिक जाम की समस्या रहेगी।
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🚧 केवल पानी के छिड़काव से नहीं मिलेगी राहत
अब तक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करता रहा है। इसके अलावा कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई और कोयले से चलने वाले तंदूर बंद कराने जैसे कदम भी उठाए गए। हालांकि, इन उपायों से अस्थायी राहत तो मिली, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
इसी को देखते हुए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने अधिकारियों के साथ विस्तृत मंथन किया। चर्चा के बाद यह साफ हुआ कि अगर सड़कों की संरचना को ही सुधार दिया जाए, तो प्रदूषण को जड़ से कम किया जा सकता है। इसी सोच के तहत 15 सड़कों को पूरी तरह से नया रूप देने का फैसला लिया गया।
🌱 ग्रीन बेल्ट और पक्के फुटपाथ होंगे खास
इस योजना के तहत सबसे पहले सड़कों के किनारे बने कच्चे फुटपाथों को पक्का किया जाएगा। जहां-जहां सड़क किनारे मिट्टी खुली रहती है, वहीं से सबसे ज्यादा धूल उड़ती है। ऐसे सभी हिस्सों को कवर किया जाएगा।
साथ ही सड़कों के दोनों ओर और सेंट्रल वर्ज पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। यहां घास, फूलदार पौधे और हरियाली लगाई जाएगी, जिससे न केवल धूल को रोका जा सकेगा बल्कि वातावरण भी शुद्ध होगा। हरियाली बढ़ने से तापमान में भी संतुलन आएगा और शहर की सुंदरता में इजाफा होगा।
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🚦 जाम की समस्या का भी होगा समाधान
इन 15 सड़कों पर अक्सर लगने वाले जाम के कारणों की पहचान कर ली गई है। कहीं अतिक्रमण तो कहीं अव्यवस्थित कट और पार्किंग जाम की वजह बनते हैं। योजना के तहत इन सभी समस्याओं को दूर किया जाएगा।
सड़कों की चौड़ाई, ट्रैफिक फ्लो और फुटपाथ की सही व्यवस्था से वाहन चालकों और पैदल यात्रियों—दोनों को राहत मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इन सुधारों के बाद ट्रैफिक अधिक सुचारु रूप से चलेगा।
⏳ अक्टूबर से पहले पूरा होगा काम
नगर निगम के अनुसार इस परियोजना का पूरा एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है और काम तेजी से शुरू किया जाएगा। लक्ष्य है कि अक्टूबर से पहले सभी 15 सड़कों को प्रदूषण मुक्त बना दिया जाए।
अगर तय समय में काम पूरा हो जाता है, तो आने वाले सर्दियों के मौसम में शहर को प्रदूषण से बड़ी राहत मिल सकती है, जो आमतौर पर सबसे खराब समय माना जाता है।
💧 पानी की बचत भी होगी बड़ा फायदा
अब तक नगर निगम को धूल कम करने के लिए रोजाना हजारों लीटर पानी सड़कों पर छिड़कना पड़ता है। इससे भूगर्भ जल पर दबाव पड़ता है। हालांकि निगम का दावा है कि एसटीपी के पानी का इस्तेमाल किया जाता है, फिर भी लोगों में जल स्तर गिरने की चिंता बनी रहती है।
सड़कें धूलमुक्त हो जाने के बाद पानी के छिड़काव की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी। इससे प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की बचत होगी, जो भविष्य के लिए बेहद अहम है।
🛣️ इन सड़कों को किया जाएगा प्रदूषण मुक्त
नगर निगम द्वारा जिन प्रमुख सड़कों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं:
मोहन नगर मेट्रो स्टेशन से यूपी गेट तक
हापुड़ चुंगी चौराहा से ठाकुरद्वारा ओवरब्रिज तक
हापुड़ चुंगी चौराहा से पुलिस लाइन तक
हापुड़ चुंगी चौराहा से विवेकानंद कट तक
आरडीसी मोड़ से हिंडन चौक तक
हापुड़ चुंगी से मेरठ रोड
इसके अलावा शहर की अन्य महत्वपूर्ण सड़कें
🌍 प्रदेश में पहली बार ऐसा प्रयोग
अधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी शहर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सड़कों के संपूर्ण कायाकल्प की योजना लागू की जा रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।
😊 लोगों को मिलेगी सीधी राहत
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा। साफ हवा, धूलमुक्त सड़कें, कम जाम और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था—ये सभी बदलाव सीधे तौर पर नागरिकों की सेहत और जीवनशैली को बेहतर बनाएंगे।
नगर निगम का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़कों का सुधार नहीं, बल्कि गाजियाबाद को रहने लायक और पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
Ghaziabad Municipal Corporation has launched an ambitious ₹80 crore project to make 15 major roads pollution-free by improving road infrastructure, developing green belts, reducing dust pollution, easing traffic congestion, and saving water resources. This initiative is expected to significantly improve air quality in Ghaziabad and serve as a model for pollution control in other NCR cities.


















