AIN NEWS 1 : दिल्ली की राजनीति एक बार फिर तीखे बयानबाज़ी और भावनात्मक टकराव का केंद्र बन गई है। इस बार विवाद की जड़ बना है दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष आतिशी का वह बयान, जो उन्होंने सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी को लेकर सदन में दिया। इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बयान से शुरू हुआ विवाद
दिल्ली विधानसभा के सत्र के दौरान नेता विपक्ष आतिशी द्वारा गुरु तेग बहादुर जी को लेकर दिए गए कथन को BJP ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया। पार्टी का कहना है कि ऐसे महापुरुषों को लेकर शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए, खासकर तब जब बात सदन जैसे गरिमामय मंच की हो।
BJP नेताओं का आरोप है कि यह बयान केवल एक शब्दों की गलती नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की सोच और संस्कृति को दर्शाता है।
AAP दफ्तर पर BJP का प्रदर्शन
विवाद बढ़ने के साथ ही BJP ने दिल्ली स्थित आम आदमी पार्टी के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाज़ी की और आतिशी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
BJP सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि,
“आतिशी को अपने बयान पर शर्मिंदगी जतानी चाहिए। यह मामला बेहद संवेदनशील है और उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।”
उनका कहना था कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विषयों पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
BJP प्रवक्ताओं का तीखा हमला
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर. पी. सिंह ने भी इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि AAP बार-बार ऐसे बयान देती है, जिससे समाज में विभाजन पैदा होता है।
आर. पी. सिंह के मुताबिक,
“यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। आम आदमी पार्टी को यह समझना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।”
विधानसभा में भावुक हुईं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली विधानसभा में एक और भावनात्मक पल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सदन में अपने संबोधन के दौरान भावुक हो गईं।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“मेरे द्वारा अगर गलती से कोई शब्द निकल गया, तो उसका मजाक बनाया गया। इन्हें यह अच्छा नहीं लगता कि एक महिला दिल्ली की मुख्यमंत्री है।”
उनका यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया माना जा रहा है। रेखा गुप्ता ने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक बहस अब व्यक्तिगत हमलों और लिंग आधारित टिप्पणियों तक पहुंच रही है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
महिला नेतृत्व और राजनीति की कठोरता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की भावुक प्रतिक्रिया ने एक बार फिर राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर बहस को हवा दी है। समर्थकों का कहना है कि महिला नेताओं के शब्दों को अक्सर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है और उनसे परफेक्शन की अपेक्षा पुरुष नेताओं की तुलना में कहीं अधिक की जाती है।
वहीं विपक्ष का तर्क है कि पद चाहे कोई भी हो, बयान की जिम्मेदारी तय होती है और भावनाओं के आधार पर गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
AAP की ओर से सफाई के संकेत
हालांकि इस पूरे विवाद पर आम आदमी पार्टी की ओर से औपचारिक बयान सीमित रहा, लेकिन पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतिशी का बयान किसी भी प्रकार से गुरु तेग बहादुर जी का अपमान करने के इरादे से नहीं था। यह एक भाषाई चूक थी, जिसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
सियासी टकराव या संवेदनशील मुद्दा?
यह विवाद केवल राजनीतिक दलों की लड़ाई भर नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि धार्मिक और ऐतिहासिक विषय भारतीय राजनीति में कितने संवेदनशील बने हुए हैं। एक शब्द, एक वाक्य या एक संदर्भ भी बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में संवाद, माफी और संयम सबसे बेहतर रास्ता होते हैं। लगातार प्रदर्शनों और आरोप-प्रत्यारोप से जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या आतिशी अपने बयान पर औपचारिक माफी देंगी?
क्या BJP अपना आंदोलन और तेज करेगी?
और क्या यह विवाद दिल्ली की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करेगा?
फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली विधानसभा का यह सत्र सिर्फ विधायी कामकाज के लिए नहीं, बल्कि तीखे राजनीतिक और भावनात्मक क्षणों के लिए भी याद रखा जाएगा।
The Delhi Assembly controversy involving AAP leader Atishi and her statement on Guru Tegh Bahadur has triggered strong political reactions. BJP leaders staged protests in Delhi, demanding accountability and resignation, while Chief Minister Rekha Gupta addressed the issue emotionally in the Assembly. This incident highlights the ongoing AAP vs BJP clash in Delhi politics and raises important questions about political responsibility, religious sensitivity, and women leadership in Indian democracy.



















