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चंद्रशेखर पर रोहिणी घावरी का फिर हमला: “ब्राह्मणों को गाली देने वाला, अब उन्हीं से केस लड़वा रहा है”!

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AIN NEWS 1: नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद और डॉ. रोहिणी घावरी के बीच चल रही विवादों की लड़ाई एक बार फिर सुर्खियों में है। रोहिणी घावरी ने एक बार फिर चंद्रशेखर पर कड़ा प्रहार किया है और इस बार निशाना बनाया है उनके द्वारा चुने गए वकीलों को—जो दोनों ही ब्राह्मण समुदाय से आते हैं।

ब्राह्मण वकीलों को लेकर रोहिणी का तंज

रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि जो चंद्रशेखर मंचों और सभाओं में ब्राह्मणों के खिलाफ तीखे बयान देते हैं, वही अब अपने मुकदमों के लिए ब्राह्मण वकीलों पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि चंद्रशेखर दलित राजनीति का चेहरा बनते हैं, लेकिन जब कानूनी लड़ाई की बात आती है, तो वे दलित वकीलों पर भरोसा नहीं करते।

रोहिणी ने लिखा कि चंद्रशेखर ने अपने केस लड़ने के लिए के. के. शर्मा और सुशील शुक्ला जैसे ब्राह्मण वकीलों को चुना है। उनका सवाल है—क्या उन्हें कोई दलित वकील नहीं मिला या फिर वे दलितों पर विश्वास नहीं करते?

उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के सामने मनुवाद विरोध की लड़ाई की बड़ी—बड़ी बातें करने वाले चंद्रशेखर, असल में ब्राह्मणों से ही अपनी लड़ाई लड़वाते हैं। उनका दावा है कि चंद्रशेखर दलित समुदाय को सिर्फ दिखावा करके प्रभावित करते हैं, जबकि सच इससे अलग है।

“मुझ पर दबाव डालने के लिए बार-बार नोटिस भेजते हैं”

रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रशेखर अपने वकीलों के माध्यम से उन्हें लगातार लीगल नोटिस भेजते हैं और इस तरह दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि शबीरपुर कांड के केस में भी चंद्रशेखर के वकील सुशील शुक्ला ही थे, जो ब्राह्मण समुदाय से हैं।

रोहिणी का कहना है कि वे यह सब इसलिए उजागर कर रही हैं ताकि बहुजन समुदाय समझ सके कि दिखावे की लड़ाई लड़कर कैसे लोगों को गुमराह किया जाता है।

कौन हैं डॉ. रोहिणी घावरी?

डॉ. रोहिणी घावरी, उम्र लगभग 30 वर्ष, मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं और वाल्मीकि समुदाय से आती हैं। वर्तमान में वे स्विट्जरलैंड से पीएचडी कर रही हैं। वे ‘जनपावर वेलफेयर फाउंडेशन’ की संस्थापक भी हैं, जो दलित समाज के उत्थान पर काम करता है।

2019 में उन्हें मध्य प्रदेश सरकार से 1 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली थी। वे उस समय चर्चा में आई थीं जब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत का प्रतिनिधित्व किया और भाषण की शुरुआत ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से की, जिससे वे सुर्खियों में छा गईं।

चंद्रशेखर और रोहिणी का पुराना रिश्ता

रोहिणी का कहना है कि 2020 में उनकी मुलाकात चंद्रशेखर आज़ाद से हुई, जो धीरे—धीरे दोस्ती और फिर रिश्ते में बदल गई। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को दी गई शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। रोहिणी के मुताबिक—

चंद्रशेखर ने उनसे शादी करने का वादा किया, लेकिन बाद में ये बात झूठी निकली।

उन्होंने अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाई।

2021 से 2024 के बीच राजनीतिक अभियानों में उनका इस्तेमाल किया गया।

2024 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद चंद्रशेखर ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ का प्रस्ताव रखा।

विरोध करने पर उन्होंने रोहिणी की निजी तस्वीरें और वीडियो लीक करने की धमकी दी।

रोहिणी ने दावा किया कि इस पूरे विवाद का मानसिक दबाव इतना बढ़ा कि वे दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी हैं। इस संबंध में उन्होंने दिल्ली पुलिस, NCW, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्रालय को शिकायतें भी भेजी हैं।

विवाद क्यों बढ़ रहा है?

यह मामला इसलिए और गर्म हो गया है क्योंकि चंद्रशेखर आज़ाद दलित राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उनके समर्थक उन्हें सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाला नेता मानते हैं। दूसरी ओर, रोहिणी घावरी के आरोपों ने उनकी छवि पर सवाल खड़े किए हैं।

जब रोहिणी ने यह आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ब्राह्मण वकीलों पर निर्भर हैं, तब यह मुद्दा और राजनीतिक हो गया। बहुजन समाज पार्टी और चंद्रशेखर के विरोधियों ने इस मुद्दे को तुरंत पकड़ लिया।

सोशल मीडिया पर हलचल

रोहिणी की पोस्ट जैसे ही वायरल हुई, सोशल मीडिया यूज़र्स दो खेमों में बंट गए।

एक पक्ष ने चंद्रशेखर का समर्थन किया और कहा कि वकील का चयन योग्यता के आधार पर होता है, जाति के नहीं।

दूसरों ने कहा कि जो नेता ब्राह्मणों पर खुलकर बयान देता है, उसे अपने मुकदमे के लिए दलित वकील ही रखना चाहिए था।

राजनीतिक असर

यह विवाद चंद्रशेखर की राजनीतिक छवि को प्रभावित कर सकता है, खासकर बहुजन समर्थन बेस पर। रोहिणी के आरोप पहले भी आ चुके हैं, लेकिन इस बार मामला कोर्ट, पुलिस और सार्वजनिक बयान तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी गंभीरता बढ़ गई है।

Rohini Ghaveri’s latest allegations against Chandrashekhar Azad have intensified the political controversy, especially after she questioned his decision to hire Brahmin lawyers like KK Sharma and Sushil Shukla. The issue highlights contradictions in Dalit politics and raises questions about trust, representation, and the authenticity of Chandrashekhar’s public stance. Ghaveri’s claims about emotional exploitation, hidden marital status, and misuse during political campaigns add further depth to the ongoing Chandrashekhar–Rohini dispute.

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