AIN NEWS 1: अमेरिका खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश मानता है और कई बार उसने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई या अंतरराष्ट्रीय अपराधों के नाम पर दूसरे देशों की सीमा में घुसकर सीधे कार्रवाई की है। इन कार्रवाइयों ने जहां कुछ लोगों को न्याय का उदाहरण दिया, वहीं कई देशों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
इस लेख में हम उन प्रमुख घटनाओं पर नजर डालेंगे, जब अमेरिका ने दूसरे देशों में घुसकर बड़े स्तर की सैन्य या गुप्त कार्रवाई की।
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🔴 इराक (2003): सद्दाम हुसैन के खिलाफ युद्ध
साल 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया। उस समय इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन थे। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने आरोप लगाया कि इराक के पास विनाशकारी हथियार (Weapons of Mass Destruction) हैं, जो वैश्विक शांति के लिए खतरा हैं।
इसके अलावा सद्दाम हुसैन पर युद्ध अपराध, मानवाधिकार उल्लंघन और पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने के आरोप लगाए गए। अमेरिकी सेना ने इराक में प्रवेश कर सत्ता परिवर्तन किया। हालांकि बाद में WMD को लेकर किए गए दावे विवादों में घिर गए।
इस युद्ध का असर सिर्फ इराक तक सीमित नहीं रहा। लाखों लोग विस्थापित हुए, हजारों की जान गई और पूरा क्षेत्र लंबे समय तक अस्थिर रहा।
🔴 पाकिस्तान (2011): ओसामा बिन लादेन का खात्मा
2 मई 2011 को अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में एक बेहद गोपनीय सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया।
ओसामा पर 9/11 आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड होने का आरोप था, जिसमें अमेरिका में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। यह कार्रवाई पाकिस्तान सरकार को बताए बिना की गई, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आया।
अमेरिका ने इसे आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता बताया, जबकि पाकिस्तान में इसे संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखा गया।
🔴 सीरिया (2019): ISIS प्रमुख अल-बगदादी का अंत
साल 2019 में अमेरिका ने सीरिया में एक सैन्य ऑपरेशन के तहत ISIS प्रमुख अबू बक्र अल-बगदादी को मार गिराया। अल-बगदादी को दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकियों में गिना जाता था।
ISIS के नाम पर बड़े पैमाने पर हत्याएं, धार्मिक नरसंहार और आतंकी हमले किए गए थे। अमेरिका के अनुसार, अल-बगदादी की मौत से आतंकी संगठन को बड़ा झटका लगा।
हालांकि यह कार्रवाई भी बिना सीरिया की स्पष्ट अनुमति के की गई थी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे।
🔴 वेनेजुएला (2026): निकोलस मादुरो पर आरोप
साल 2026 में वेनेजुएला को लेकर अमेरिका का रुख फिर चर्चा में आया। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और नार्को-अपराध नेटवर्क से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगाए।
अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि मादुरो सरकार ड्रग कार्टेल्स को संरक्षण देती है। हालांकि वेनेजुएला सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है और इसे अमेरिका की राजनीतिक साजिश बताती है।
इस मामले में अमेरिका की संभावित या कथित कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता और बहस दोनों देखी गईं।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सवाल
हर बार जब अमेरिका किसी दूसरे देश में घुसकर कार्रवाई करता है, तो कुछ बड़े सवाल खड़े होते हैं:
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सही है?
क्या किसी देश की संप्रभुता को नजरअंदाज किया जा सकता है?
क्या आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ाई का यही तरीका है?
संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने ऐसी कार्रवाइयों पर चिंता जताई है, जबकि अमेरिका का कहना रहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है।
अमेरिका की इन कार्रवाइयों ने दुनिया की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। कुछ मामलों में आतंक के बड़े चेहरों का अंत हुआ, तो कुछ जगहों पर लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही।
यह बहस आज भी जारी है कि क्या ताकत के बल पर शांति लाई जा सकती है, या फिर कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहमति ही बेहतर रास्ता है।
The United States has repeatedly carried out foreign interventions citing national security, terrorism, and international crime. From the Iraq War in 2003 against Saddam Hussein to the operation that killed Osama bin Laden in Pakistan, the US military actions have reshaped global politics. Similar operations against ISIS leader Baghdadi in Syria and allegations involving Venezuela’s President Nicolas Maduro highlight America’s aggressive foreign policy approach and its impact on international relations.


















