AIN NEWS 1: आज के डिजिटल दौर में साइबर ठगी के तरीके लगातार बदलते जा रहे हैं। अपराधी अब नई-नई चालों का इस्तेमाल करके आम लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। हाल ही में ऐसा ही एक तरीका काफी चर्चा में है— “डिजिटल अरेस्ट”। कई लोगों को नकली पुलिस, CBI, RBI या सरकारी अधिकारी बनकर कॉल की जा रही है और उन्हें कहा जाता है कि उनके खिलाफ कोई केस दर्ज है, इसलिए उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। यह सुनते ही लोग घबरा जाते हैं और ठगों के जाल में फंस जाते हैं।

इसी बढ़ती ठगी को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने साफ चेतावनी जारी की है कि भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान मौजूद ही नहीं है। यह पूरी तरह एक फर्जी और डराने वाला स्कैम है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ आम लोगों को मानसिक रूप से दबाव में डालकर पैसों की वसूली के लिए किया जा रहा है।
डिजिटल अरेस्ट आखिर होता क्या है — और क्यों है यह पूरी तरह फर्जी?
साइबर ठग लोगों को कॉल करके या वीडियो चैट के जरिए बताते हैं कि
उनका आधार कार्ड गलत गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है,
उनके नाम पर कोई अवैध बैंक ट्रांजैक्शन हुआ है,
उनके खिलाफ पुलिस शिकायत है,
और अब उन्हें ऑनलाइन “अरेस्ट” किया जा रहा है।
इसके बाद अपराधी पीड़ित को अपने मोबाइल या लैपटॉप का कैमरा ऑन रखने को कहते हैं और घंटों तक निगरानी में रखने का नाटक करते हैं। यह सब केवल डराने, धमकाने और मानसिक दबाव डालने की चाल है।
सबसे महत्वपूर्ण बात— न भारतीय पुलिस, न CBI, न किसी सरकारी एजेंसी के पास किसी व्यक्ति को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार करने का अधिकार है।
गिरफ्तारी हमेशा कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होती है और उसके लिए वास्तविक पुलिस मौजूद होती है, कोई वीडियो कॉल नहीं।
इसलिए अगर किसी को ऐसा कॉल या मैसेज मिले, तो वह 100% फर्जी है।
RBI की चेतावनी: अपनी निजी जानकारी बिल्कुल साझा न करें
RBI ने साफ कहा है कि:
किसी भी अनजान व्यक्ति को आधार नंबर, PAN, बैंक डिटेल, OTP या ATM PIN जैसी जानकारी न दें।
किसी कॉल, ईमेल या मैसेज से डरकर कोई भुगतान न करें।
RBI, बैंक या पुलिस कभी भी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगते।
यह कॉल केवल साइबर क्रिमिनल्स की हरकत है, जो लोगों को ट्रैप करने के लिए सरकारी संस्थानों का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट का यह नया स्कैम?
ठग काफी प्लानिंग के साथ इस तरह के फ्रॉड करते हैं। आमतौर पर प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है:
1. पहला डरावना कॉल
कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, CBI एजेंट, कस्टम अधिकारी या RBI कर्मचारी बताकर कहता है कि आपके नाम पर बड़ा अपराध दर्ज हुआ है।
2. फर्जी दस्तावेज दिखाना
वीडियो कॉल या ईमेल पर नकली नोटिस, FIR या आरोप पत्र भेजा जाता है ताकि पीड़ित को भरोसा हो जाए।
3. डिजिटल अरेस्ट का झांसा
बताया जाता है कि मामला गंभीर है, इसलिए “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है— यानि अब आप कॉल काट नहीं सकते, मोबाइल बंद नहीं कर सकते।
4. कैमरा ऑन रखने का दबाव
पीड़ित को कहा जाता है कि वह अपना कैमरा लगातार ऑन रखे ताकि “ऑनलाइन निगरानी” रखी जा सके।
5. पैसे वसूलने की शुरुआत
अपराधी कहते हैं कि मामला सुलझाने के लिए
पैसे जमा कराएं,
खाता सत्यापन के नाम पर पैसे भेजें,
या बैंक जानकारी साझा करें।
6. पीड़ित का मानसिक शोषण
लगातार डराने, धमकाने और कानूनी कार्रवाई की बात करके व्यक्ति को मानसिक रूप से टूटने पर मजबूर किया जाता है।
यही वजह है कि बहुत से लोग इस जाल में फंस जाते हैं और बड़ी रकम गंवा बैठते हैं।
ऐसे कॉल आने पर तुरंत क्या करें?
यदि आपको कोई ऐसा कॉल आए जिसमें डिजिटल अरेस्ट की बात कहकर डराया जाए, तो घबराएं नहीं। आप निम्न कदम तुरंत उठाएं:
✅ 1. कॉल तुरंत काट दें
कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो या फोन पर गिरफ्तारी नहीं करता। इसलिए कॉल को आगे न बढ़ाएं।
✅ 2. कोई जानकारी साझा न करें
OTP, बैंक अकाउंट, आधार नंबर, कार्ड नंबर— कुछ भी न बताएं।
✅ 3. कोई भुगतान बिल्कुल न करें
डराकर पैसा मांगना 100% फ्रॉड है।
✅ 4. मामले की रिपोर्ट करें – 1930 पर कॉल करें
यह सरकार की National Cyber Crime Helpline है।
यहां आप तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
✅ 5. साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें
वेबसाइट पर जाकर complaint दर्ज करें:
cybercrime.gov.in
क्यों आपको हमेशा सतर्क रहना चाहिए?
डिजिटल दुनिया हमारे जीवन को काफी सुविधाजनक बना चुकी है, लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं। अपराधी लगातार नए तरीके निकालते रहते हैं, ताकि लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाएं। खासकर जब बात कानून या गिरफ्तारी की हो, तो आम व्यक्ति तुरंत घबरा जाता है।
यही कमजोरी ठगों का सबसे बड़ा हथियार है।
इसलिए याद रखें:
कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है।
किसी भी सरकारी एजेंसी की प्रक्रिया हमेशा लिखित दस्तावेजों और कानूनी तरीकों से होती है।
डराना, धमकाना, कैमरा ऑन करवाना— ये सब ठगी के संकेत हैं।
सारांश: क्या याद रखना सबसे ज़रूरी है?
✔ डिजिटल अरेस्ट एक फर्जी और गैरकानूनी स्कैम है।
✔ किसी अधिकारी के नाम पर आने वाला डराने वाला कॉल भरोसे लायक नहीं।
✔ RBI ने साफ कहा है— ऐसी बातों पर ध्यान न दें, अपनी जानकारी साझा न करें।
✔ मदद के लिए तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें।
खुद सुरक्षित रहें और अपने परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों को भी इसकी जानकारी दें। जागरूकता ही साइबर अपराध से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।
Digital arrest scams are rising across India, where fraudsters impersonate police, CBI, or RBI officials to scare victims into sharing bank details or making payments. The Reserve Bank of India (RBI) has clarified that there is no legal concept of “digital arrest,” making these calls completely fake and unsafe. To stay protected from online fraud, avoid sharing personal or financial information and immediately report such incidents on the national cyber helpline 1930. Keywords: digital arrest scam, RBI warning, online fraud India, cybercrime safety, report scam 1930.


















