AIN NEWS 1: देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से जुड़ा एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने आस्था, प्रशासन और व्यवस्था — तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की शुद्धता पर सवाल उठाते हुए CBI के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) ने जनवरी 2026 में इस मामले में फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी है।
यह चार्जशीट आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित ACB कोर्ट में पेश की गई है, जिसमें 36 आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कैसे वर्षों तक एक संगठित साजिश के तहत करोड़ों रुपये का खेल चलता रहा।
🧈 68 लाख किलो नकली घी, ₹250 करोड़ का खेल
CBI की जांच के अनुसार, साल 2021 से 2024 के बीच तिरुपति मंदिर को लगभग 68 लाख किलोग्राम सिंथेटिक यानी नकली घी की सप्लाई की गई। इस घी की अनुमानित कीमत करीब ₹250 करोड़ आंकी गई है।
यह घी मंदिर में बनने वाले लड्डू प्रसाद समेत अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होता रहा। श्रद्धालु जिस प्रसाद को पूरी श्रद्धा से ग्रहण करते रहे, उसमें असली दूध या मक्खन की जगह केमिकल और सस्ते विकल्पों का उपयोग किया गया — यह बात जांच में सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।
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🏭 मुख्य आरोपी सप्लायर: दूध खरीदे बिना बना घी!
इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा नाम उत्तराखंड स्थित “भोले बाबा डेयरी” का सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह डेयरी इस अवधि में TTD की प्रमुख घी सप्लायर रही।
सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि भोले बाबा डेयरी ने इन तीन वर्षों में न तो दूध खरीदा और न ही मक्खन, फिर भी लाखों किलो घी की सप्लाई मंदिर को की गई। इससे साफ होता है कि घी पूरी तरह से सिंथेटिक फैट, केमिकल और सस्ते तेलों से तैयार किया गया था।
🧾 फर्जी बिल, लैब रिपोर्ट और मिलीभगत
CBI की चार्जशीट में बताया गया है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई स्तरों पर साजिश रची गई।
फर्जी बिल और इनवॉइस बनाए गए
घी की झूठी लैब रिपोर्ट तैयार की गई
कुछ अधिकारियों और बिचौलियों की सीधी मिलीभगत सामने आई
जांच में यह भी पता चला है कि कई बार गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर किया गया या रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया गया।
⚖️ 36 आरोपी, कई पर गंभीर धाराएं
चार्जशीट में जिन 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें
डेयरी मालिक
कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी
बिचौलिए
ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग
और कुछ प्रशासनिक स्तर के लोग शामिल हैं
इन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक आस्था से खिलवाड़ जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारी और पूछताछ का दायरा और बढ़ सकता है।
🙏 श्रद्धालुओं की आस्था को लगा झटका
तिरुपति बालाजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन और प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसे में प्रसाद में मिलावट की खबर ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है।
सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि
क्या मंदिर प्रशासन को इसकी जानकारी थी?
गुणवत्ता जांच की व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे रही?
वर्षों तक यह घोटाला कैसे चलता रहा?
🏛️ TTD प्रशासन की प्रतिक्रिया
TTD प्रशासन ने इस मामले में कहा है कि
वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग कर रहे हैं
भविष्य में घी और अन्य सामग्री की सप्लाई के लिए और सख्त नियम बनाए जाएंगे
गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी बनाया जाएगा
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि केवल आश्वासन काफी नहीं, बल्कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
🔍 आगे क्या?
CBI की फाइनल चार्जशीट के बाद अब मामला कोर्ट में है। आने वाले महीनों में इस केस की सुनवाई के दौरान कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। यह घोटाला न सिर्फ एक आर्थिक अपराध है, बल्कि धार्मिक विश्वास के साथ किया गया धोखा भी है।
The Tirupati ghee scam has emerged as one of the biggest temple-related adulteration cases in India. According to the CBI chargesheet, fake ghee worth ₹250 crore was supplied to Tirumala Tirupati Devasthanam between 2021 and 2024. The case raises serious concerns about food safety, corruption, and religious trust, making it a major issue in Tirupati temple news and national headlines.


















