AIN NEWS 1: मेरठ के थापरनगर इलाके में पिछले कुछ दिनों से एक मकान खरीद को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मामला तब सुर्खियों में आया जब दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने इस कॉलोनी में एक मकान खरीदकर उसमें शिफ्ट होना शुरू किया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने खुले तौर पर विरोध जताया और शनिवार को बड़ी संख्या में लोग सदर थाने पहुंचकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने थाने परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
मिली जानकारी के मुताबिक, शाहिद कुरैशी नाम के व्यक्ति ने थापरनगर में स्थित एक मकान को अनुभव कालरा से लगभग एक करोड़ रुपये में खरीदा। खरीद-फरोख्त के सभी कानूनी कार्य पूरे होने के बाद शाहिद कुरैशी लगभग पाँच दिन पहले ही अपने परिवार समेत नए घर में रहने आ गए।
लेकिन उनके घर में शिफ्ट होने के तुरंत बाद स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें इस सौदे की कोई जानकारी नहीं दी गई और अचानक दूसरे समुदाय के लोगों का इस क्षेत्र में बसना उन्हें स्वीकार नहीं है।
स्थानीय निवासियों की आपत्तियाँ क्या हैं?
थापरनगर के कई निवासियों ने साफ कहा कि वे चाहते हैं कि यह मकान शाहिद कुरैशी से वापस कराया जाए और पुराने मालिक के नाम पर ही लौटाया जाए। उनका दावा है कि मकान की बिक्री से कॉलोनी का “सामाजिक संतुलन” बिगड़ सकता है।
कई लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह इलाका भी वैसा ही हो जाएगा जैसा पास के पटेलनगर में हुआ था।
पटेलनगर की घटना का जिक्र क्यों?
प्रदर्शनकारियों के साथ धरने में मौजूद हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही ने कहा कि पटेलनगर में भी पहले कुछ मकान दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा खरीदे गए थे। समय के साथ, अधिक घर खरीदे गए और अंत में पूरा इलाका खाली हो गया। उनके अनुसार, स्थानीय लोग अपने ही मोहल्ले में अल्पसंख्यक बनते चले गए।
सिरोही का कहना है कि थापरनगर में भी ऐसी स्थिति की शुरुआत देखी जा रही है और इसे “लैंड जिहाद” की रणनीति बताया गया।
धरने में क्या हुआ?
सखिन सिरोही और कॉलोनी के दर्जनों लोग सदर थाने के बाहर बैठ गए। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि मकान का सौदा रद्द कराया जाए और स्थानीय निवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं।
धरने के दौरान लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे आंदोलन को और बड़ा करेंगे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
1. शाहिद कुरैशी से मकान वापसी कराई जाए।
2. इलाके की जनसंख्या संरचना न बदले, इसके लिए प्रशासन हस्तक्षेप करे।
3. ऐसे मामलों में समुदायों के बीच सद्भाव को बनाए रखने के लिए सरकार नीति बनाए।
4. थापरनगर को पटेलनगर जैसी स्थिति से बचाया जाए।
5. स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाए।
सचिन सिरोही का बयान
सचिन सिरोही ने कहा कि वे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करना चाहते हैं कि वे “लैंड जिहाद” जैसी गतिविधियों से हिंदुओं को बचाएं। उनका कहना है कि इस प्रकार की संपत्ति खरीद से धीरे-धीरे इलाका बदल जाता है और मूल निवासी वहां से हटने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक मकान वापस नहीं होता, उनका धरना जारी रहेगा।
प्रशासन की स्थिति
हालांकि पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की है, लेकिन फिलहाल किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई या सौदे को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मकान की खरीद वैध दस्तावेजों और प्रक्रिया के साथ हुई है, तो प्रशासन इसे वापस नहीं करवा सकता। ऐसे मामलों में सिर्फ दोनों पक्षों के आपसी समझौते पर ही समाधान संभव है।
स्थानीय माहौल और आपसी तनाव
थापरनगर में इस घटना के बाद से लोगों में असुरक्षा और अविश्वास का माहौल देखने को मिल रहा है। कुछ लोग इस मामले को सामाजिक संतुलन का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अनावश्यक तनाव फैलाने की कोशिश बता रहे हैं।
इसी बीच कई निवासी यह भी कह रहे हैं कि उन्हें किसी की जाति या धर्म से समस्या नहीं है, लेकिन कॉलोनी की परंपराओं और संरचना को लेकर वे चिंतित हैं।
आगे क्या होगा?
अभी स्थिति शांत दिखाई दे रही है लेकिन धरने का ऐलान और हनुमान चालीसा पाठ ने मामले को संवेदनशील बना दिया है। प्रशासन यदि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच बैठक नहीं कराता, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
शाहिद कुरैशी के परिवार की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है, लेकिन उन्हें भी इस विवाद से परेशान बताया जा रहा है।
कुल मिलाकर, थापरनगर का यह मकान विवाद सिर्फ एक प्रॉपर्टी का मामला नहीं बल्कि सामाजिक विश्वास और समुदायों के बीच रिश्तों की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। अब प्रशासन पर निर्भर है कि वह समय रहते शांतिपूर्ण समाधान निकाल सके और इलाके में फिर से सामान्य स्थिति बहाल कर सके।
The Thaparnagar house purchase controversy in Meerut has sparked protests, community tension, and allegations of land jihad. Local residents, along with Hindu activists, demand the cancellation of the property sale to Shahid Qureshi, saying it threatens the demographic balance of the area. The situation highlights rising concerns over community-based property disputes, social harmony, and law-and-order challenges in Meerut.


















