AIN NEWS 1: दिल्ली NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण ने एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिकों और सरकार सभी को चिंता में डाल दिया है। प्रदूषण की यह समस्या सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत भी इससे प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बताया कि वह सुबह केवल एक घंटे के लिए टहलने निकले थे, लेकिन प्रदूषण का स्तर इतना खराब था कि उनकी तबीयत तुरंत बिगड़ गई। उन्होंने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लोगों के स्वास्थ्य को सीधा नुकसान पहुँचा रही है।
दिल्ली की हवा कितनी ज़हरीली?
दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। धूल, धुआं, पराली जलाना, गाड़ियों का उत्सर्जन और मौसम के कारण हवा में खतरनाक कण PM 2.5 और PM 10 तेजी से बढ़ जाते हैं। इसी वजह से हर साल अक्टूबर से जनवरी तक दिल्ली की हवा कई दिनों तक ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच जाती है।
बहुत से लोग सांस लेने में दिक्कत, गले में जलन, आँखों में खुजली, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याओं का सामना करते हैं।
CJI सूर्यकांत के अनुभव ने एक बार फिर इस समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणी
एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा:
“मैं सिर्फ एक घंटा टहलने गया था, और हवा की खराब स्थिति के कारण मेरी तबीयत खराब हो गई। यह बेहद गंभीर स्थिति है।”
उनकी यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ पर्यावरण या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
ज्येष्ठ नागरिकों के लिए बड़ी चिंता
CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट में 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले कई वरिष्ठ वकील रोज़ाना इन-पर्सन हियरिंग में आते हैं। लगातार जहरीली हवा में रहना उनके लिए और भी खतरनाक है।
इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि 60+ उम्र के वकीलों को दिल्ली की खराब हवा से बचाने के लिए अदालत उन्हें इन-पर्सन हियरिंग से छूट देने पर विचार कर सकती है। साथ ही, उन्होंने अदालतों में वर्चुअल हियरिंग बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा।
वर्चुअल हियरिंग क्यों है जरूरी?
COVID-19 महामारी के दौरान वर्चुअल सुनवाई एक बड़े समाधान के रूप में सामने आई थी। इससे न सिर्फ समय और संसाधन की बचत होती है, बल्कि वायु प्रदूषण जैसी स्थितियों में यह नागरिकों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करती है।
अगर वरिष्ठ वकीलों और जरूरतमंद लोगों को वर्चुअल मोड की सुविधा दी जाए, तो उन्हें रोज़ जहरीली हवा में सफर करने से राहत मिल सकती है।
दिल्ली में लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है
डॉक्टरों के अनुसार दिल्ली की खराब हवा से:
अस्थमा और सांस की बीमारियाँ बढ़ रही हैं
दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है
बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है
गले और फेफड़ों में संक्रमण तेज़ी से बढ़ते हैं
अस्पतालों में मरीजों की संख्या इन दिनों सामान्य से अधिक देखने को मिल रही है।
सरकार कर क्या रही है?
दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और NCR क्षेत्र की एजेंसियाँ मिलकर प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठा रही हैं:
ग्रेप (GRAP) लागू करना
पराली जलाने पर सख्त निगरानी
निर्माण कार्यों पर नियंत्रण
पानी का छिड़काव
वाहन प्रदूषण की जांच
स्कूलों के समय पर बदलाव या बंद करने का निर्णय
इन सबके बावजूद, प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है।
CJI की टिप्पणी का महत्व
जब एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति यह कहता है कि वह महज़ एक घंटे टहलकर बीमार हो गया, तो यह बताता है कि स्थिति कितनी भयावह है।
उनकी चिंता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों से जुड़ी है।
उनकी बात से यह संकेत मिलता है कि देश को अब वायु प्रदूषण को सिर्फ “मौसमी समस्या” नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे एक “राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा” के रूप में देखना चाहिए।
लोगों के लिए सावधानियाँ
दिल्ली और NCR के निवासियों को प्रदूषण के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए:
घर से निकलते समय N95 मास्क पहनें
सुबह-शाम बाहर टहलने से बचें
एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें
बच्चों और बुजुर्गों को घर में ही रखें
भरपूर पानी पिएं
पौधों को घर में बढ़ाएं
Delhi’s pollution crisis has reached alarming levels, highlighted when Chief Justice of India Surya Kant revealed he fell ill after a one-hour morning walk due to the toxic air quality. The Supreme Court expressed deep concern over the dangerous pollution levels in Delhi NCR and discussed increasing virtual hearings to protect senior lawyers and vulnerable citizens from the severe health risks posed by the city’s deteriorating air quality.


















