AIN NEWS 1: दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के मामले ने देशभर में राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस घटना के बाद जांच एजेंसियों ने जिस आत्मघाती हमलावर की पहचान की, वह डॉ. उमर मोहम्मद नबी के नाम से सामने आया। इस पर कई राजनीतिक नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का है।

इमरान मसूद ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उमर मोहम्मद नबी को सिर्फ एक “आतंकवादी” कहकर खत्म कर देना ठीक नहीं है, बल्कि उसकी पृष्ठभूमि, उसके हालात और उसके वास्तविक कारणों को समझना भी जरूरी है। मसूद का कहना है कि यह युवक गलत दिशा में चला गया, लेकिन पूरा समुदाय या कोई शिक्षण संस्था इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती।
उन्होंने साफ कहा—“उमर मोहम्मद नबी को मैं एक ऐसा युवक मानता हूं जो किसी वजह से रास्ते से भटक गया। उसकी व्यक्तिगत गलतियों को पूरे समुदाय या अल्पसंख्यक संस्थानों पर थोपना नाइंसाफी है।”
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में कुछ खास संस्थानों को टारगेट कर रही है, जिनमें हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी शामिल है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी का नाम घसीटकर उन छात्रों और शिक्षकों पर शक की चमक डालने की कोशिश की जा रही है, जो सिर्फ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या अपना करियर बना रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी आतंकी वारदात में शामिल व्यक्ति का पूरा समुदाय से कोई लेना-देना नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति गलत रास्ता चुनता है, तो उसके पीछे कई सामाजिक, मानसिक या व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। मसूद का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करना ठीक नहीं है।
इमरान मसूद ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर अपनी चिंता भी जताई। उनका दावा है कि बीते कुछ समय में सरकार की ओर से ऐसे संस्थानों को संदिग्ध नजर से देखा जा रहा है, जबकि यह संस्थाएं हजारों युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर देती हैं। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत है, न कि उसे विवादों में घसीटने की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास किसी संस्थान के खिलाफ तथ्य हैं तो उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत सामने लाया जाए। लेकिन बिना सबूत के किसी यूनिवर्सिटी या समुदाय को दोषी ठहराना उचित नहीं है। मसूद ने सरकार से अपील की कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाए और किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव जांच एजेंसियों पर न डाला जाए।
इस पूरे मामले पर कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बहस जारी है। कुछ लोग मसूद के बयान की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें हमले की निंदा करनी चाहिए। वहीं, मसूद के समर्थकों का कहना है कि उनका मकसद किसी का बचाव करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पूरी समुदाय को कटघरे में न खड़ा किया जाए।
दिल्ली ब्लास्ट की जांच अभी जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उमर मोहम्मद नबी अकेला था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा। जल्द ही इस मामले में और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
Congress MP Imran Masood has sparked a major debate after defending the Delhi blast attacker Umar Mohammad Nabi, calling him a “misguided youth” and accusing the government of unfairly targeting minority institutions like Al-Falah University. This political controversy around the Delhi blast case highlights rising tensions, government actions against educational institutions, and the broader national discussion on terrorism, radicalization, and minority rights in India.


















