AIN NEWS 1: दिल्ली सरकार ने राजधानी की वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। 1 नवंबर से अब केवल BS-6, CNG, LNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। यह फैसला वायु प्रदूषण को कम करने और लोगों को स्वच्छ हवा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
दिल्ली परिवहन विभाग की ओर से जारी नए दिशानिर्देशों के तहत, दिल्ली के बाहर पंजीकृत (रजिस्टर्ड) वाहनों को बिना BS-6 इंजन के दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब BS-3 या BS-4 इंजन वाले पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों की एंट्री पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।
क्या है BS-6 और क्यों ज़रूरी है?
BS-6 (Bharat Stage-6) भारत में लागू किया गया एक उत्सर्जन मानक है जो वाहनों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषक गैसों की मात्रा को कम करता है। इसे यूरोप के Euro-6 मानक के बराबर माना जाता है। BS-6 इंजन में ईंधन जलने की प्रक्रिया अधिक स्वच्छ होती है जिससे नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे हानिकारक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं।
सरकार ने पहले ही अप्रैल 2020 से देशभर में BS-6 नियम लागू कर दिए थे, लेकिन अब दिल्ली में इसे सख्ती से लागू करने का समय आ गया है।
वाणिज्यिक वाहनों के लिए क्या नियम हैं?
नए नियमों के तहत BS-4 मानक वाले वाणिज्यिक वाहन (commercial vehicles) को 31 अक्टूबर 2026 तक ही दिल्ली में चलाने की अनुमति होगी। इसके बाद ये वाहन भी प्रतिबंधित हो जाएंगे। यह फैसला खास तौर पर ट्रक, बस, टेम्पो और टैक्सी जैसे वाहनों पर लागू होगा जो रोजाना दिल्ली में प्रवेश करते हैं।
स्वच्छ हवा और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में कदम
दिल्ली सरकार और पर्यावरण विभाग लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि राजधानी की हवा साफ हो सके। हर साल सर्दियों में दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। इसी कारण अब सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है ताकि सड़कों पर कम धुआं छोड़ने वाले वाहन ही चलें।
CNG, LNG और Electric Vehicles प्रदूषण को काफी हद तक कम करते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों से तो कोई धुआं या कार्बन उत्सर्जन होता ही नहीं, जबकि CNG और LNG वाहन पेट्रोल-डीजल की तुलना में कहीं ज्यादा स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
बाहर के वाहनों पर कड़ा नियंत्रण
दिल्ली में रोज़ाना लाखों वाहन हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब से आते हैं। इन वाहनों में से अधिकतर पुराने इंजन वाले होते हैं जो प्रदूषण का मुख्य कारण बनते हैं। सरकार ने अब यह साफ कर दिया है कि दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश से पहले हर वाहन का BS-6 स्टैंडर्ड चेक किया जाएगा।
अगर वाहन पुराना है या BS-6 मानक पर खरा नहीं उतरता, तो उसे दिल्ली की सीमा में नहीं आने दिया जाएगा।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
दिल्ली सरकार पहले ही Delhi EV Policy के तहत लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी दे रही है। अब नए नियमों के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।
राजधानी में चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि लोगों को EV चलाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सरकार का उद्देश्य
इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य है –
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना
पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाना
लोगों को स्वच्छ और स्वास्थ्यप्रद वातावरण देना
ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना
सरकार का मानना है कि अगर इस फैसले को सख्ती से लागू किया गया तो आने वाले कुछ वर्षों में दिल्ली की हवा में सुधार अवश्य देखा जा सकेगा।
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि BS-6 मानक से नीचे वाले वाहनों को दिल्ली में पकड़े जाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, ऐसे वाहनों को जब्त भी किया जा सकता है।
जनता की प्रतिक्रिया
कई लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह दिल्ली की सांसों को बचाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। हालांकि कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें अपने पुराने वाहनों को बदलने में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
फिर भी, लंबे समय में यह कदम दिल्ली के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
From November 1, the Delhi government will only allow BS-6, CNG, LNG, and Electric Vehicles to enter the city, marking a major step toward clean air, green mobility, and pollution control. Vehicles registered outside Delhi without BS-6 engines will be restricted, while BS-4 commercial vehicles will be permitted only till October 31, 2026. This decision aligns with Delhi’s mission to promote eco-friendly transportation, reduce emissions, and improve overall air quality.


















