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दिल्ली से जयपुर तक सिर्फ 30 मिनट में सफर! IIT मद्रास बना रहा भारत का पहला हाइपरलूप सिस्टम!

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AIN NEWS 1: भारत में तकनीक और परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली से जयपुर की यात्रा कुछ ही मिनटों में पूरी हो सकेगी। जहाँ आज यह सफर लगभग 3 से 4 घंटे का होता है, वहीं आने वाले समय में इसे केवल 30 मिनट में तय किया जा सकेगा।

यह कमाल किसी विमान या ट्रेन का नहीं, बल्कि एक सुपरफास्ट हाइपरलूप सिस्टम का होगा, जिसे IIT मद्रास विकसित कर रहा है। इस परियोजना को लेकर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम लगातार रिसर्च और प्रोटोटाइप डेवलपमेंट पर काम कर रही है।

क्या है हाइपरलूप तकनीक?

हाइपरलूप एक अत्याधुनिक परिवहन तकनीक है, जिसमें यात्रियों को वैक्यूम ट्यूब्स (निर्वात नलिकाओं) के अंदर चलने वाली कैप्सूल जैसी पॉड्स में बिठाया जाता है। इन पॉड्स की रफ्तार हवाई जहाज से भी ज्यादा होती है। चूंकि ट्यूब्स के अंदर हवा नहीं होती, इसलिए घर्षण लगभग समाप्त हो जाता है और गति बेहद तेज हो जाती है।

दिल्ली–जयपुर हाइपरलूप की खासियत

इस नई परियोजना के तहत दिल्ली और जयपुर के बीच एक हाइपरलूप कॉरिडोर बनाया जाएगा।

इस हाइपरलूप की स्पीड लगभग 1100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

पूरी यात्रा का समय सिर्फ 30 मिनट रहेगा।

यह सिस्टम पूरी तरह इको-फ्रेंडली होगा क्योंकि इसमें ऊर्जा के लिए मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।

इससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

दिल्ली-जयपुर यात्रा में होगा क्रांतिकारी बदलाव

वर्तमान में दिल्ली से जयपुर जाने में सड़क मार्ग से लगभग 270 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। चाहे व्यक्ति कार, बस या ट्रेन से जाए — समय कम से कम 3 घंटे से अधिक लगता ही है।

लेकिन हाइपरलूप इस पूरी दूरी को सिर्फ आधे घंटे में तय करेगा। इसका मतलब है कि अब लोग दिल्ली से जयपुर जाकर मीटिंग, कार्यक्रम या घूमने के बाद उसी दिन वापस भी लौट सकेंगे।

IIT मद्रास की भूमिका

भारत का प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विकास कर रहा है। संस्थान ने इसके लिए एक रिसर्च टीम बनाई है, जो ट्यूब डिजाइन, सुरक्षा तकनीक, पॉड कंट्रोल सिस्टम और ऊर्जा दक्षता पर काम कर रही है।

बताया जा रहा है कि प्रारंभिक चरण में प्रोटोटाइप हाइपरलूप ट्रैक तैयार किया जा रहा है। सफल परीक्षण के बाद इसे दिल्ली-जयपुर मार्ग पर लागू किया जाएगा।

यात्रियों के लिए फायदे

हाइपरलूप से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रा का अनुभव भी बिल्कुल नया होगा।

स्मूद और शोर-रहित सफर: ट्यूब्स में वैक्यूम होने के कारण आवाज बहुत कम होगी।

कम टिकट कीमतें: अनुमान है कि इसका किराया हवाई यात्रा से काफी कम होगा।

समय की बचत: 3 घंटे की यात्रा अब 30 मिनट में पूरी होगी।

सुरक्षित और आधुनिक ट्रांसपोर्ट: उन्नत तकनीक और सेंसर्स से लैस सिस्टम यात्रियों को अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा।

भविष्य की झलक

अगर यह परियोजना सफल होती है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहाँ हाइपरलूप तकनीक पर काम वास्तविक स्तर पर चल रहा है।

एलन मस्क द्वारा प्रस्तावित यह कॉन्सेप्ट अब भारत में साकार रूप लेने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इसी तकनीक से दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-वाराणसी जैसे अन्य रूट्स भी तैयार किए जा सकते हैं।

निर्माण और निवेश

परियोजना के लिए सरकार और निजी कंपनियों के बीच साझेदारी की संभावना है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इसका निर्माण हो सकता है।

IIT मद्रास ने इस तकनीक को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए कई इंडस्ट्रियल पार्टनर्स से भी चर्चा की है।

पर्यावरण और ऊर्जा बचत

हाइपरलूप में पारंपरिक ईंधन का उपयोग नहीं होगा। इससे ग्रीन एनर्जी का प्रोत्साहन मिलेगा। अनुमान के मुताबिक, यह सिस्टम प्रति किलोमीटर यात्रा में पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में 70% कम ऊर्जा खर्च करेगा।

दिल्ली से जयपुर के बीच बनने वाला यह हाइपरलूप प्रोजेक्ट भारत के परिवहन इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि आधुनिक भारत की तकनीकी शक्ति को भी दुनिया के सामने रखेगा। आने वाले वर्षों में अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो दिल्ली-जयपुर का सफर चाय की एक कप के समय जितना छोटा हो जाएगा।

India is stepping into the future of transportation with the Delhi to Jaipur Hyperloop project being developed by IIT Madras. This revolutionary system will reduce travel time between Delhi and Jaipur to just 30 minutes, covering 270 km at a speed of 1100 km/h. The Hyperloop technology promises eco-friendly, safe, and ultra-fast travel, marking a major step in India’s transport innovation. With this, India joins the global race toward futuristic high-speed travel systems.

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