AIN NEWS 1: देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में जीएसटी कलेक्शन 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा न केवल पिछले साल की तुलना में बेहतर है, बल्कि यह भी दिखाता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार रफ्तार पकड़ रही हैं।
सरकार ने यह आंकड़ा गुरुवार, 1 जनवरी 2026 को जारी किया। दिसंबर महीने का जीएसटी कलेक्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह साल का आखिरी महीना होता है और इससे पूरे साल की आर्थिक सेहत का अंदाजा लगाया जाता है।
पिछले साल के मुकाबले कितनी बढ़ोतरी?
अगर सालाना आधार पर तुलना करें तो दिसंबर 2024 में जीएसटी कलेक्शन करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये रहा था। वहीं इस बार इसमें लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह साफ संकेत देता है कि व्यापार, उद्योग और उपभोक्ता खर्च तीनों में सुधार हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें त्योहारों का सीजन, बढ़ी हुई खपत, बेहतर टैक्स अनुपालन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की मजबूती शामिल है।
सरकार के खजाने के लिए क्यों अहम है यह आंकड़ा?
जीएसटी कलेक्शन सीधे तौर पर सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। जब टैक्स वसूली मजबूत होती है, तो सरकार के पास:
ऋषिकेश हिंसा मामला: 1058 पत्थरबाजों पर मुकदमा, छह गिरफ्तार, पुलिस की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप!
इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने की क्षमता बढ़ती है
सामाजिक योजनाओं के लिए ज्यादा बजट उपलब्ध होता है
राज्यों को समय पर टैक्स का हिस्सा मिल पाता है
वित्तीय घाटे को काबू में रखने में मदद मिलती है
दिसंबर 2025 का यह आंकड़ा सरकार के लिए इसलिए भी राहत देने वाला है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत नजर आ रही है।
किन सेक्टर्स से आया बेहतर टैक्स रेवेन्यू?
जानकारों के अनुसार, इस बार के जीएसटी कलेक्शन में जिन सेक्टर्स का योगदान ज्यादा रहा, उनमें शामिल हैं:
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
रिटेल और एफएमसीजी
ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सर्विसेज
होटल, ट्रैवल और लॉजिस्टिक्स
त्योहारी सीजन और साल के अंत की खरीदारी ने भी टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
बेहतर टैक्स अनुपालन भी बना बड़ी वजह
पिछले कुछ सालों में सरकार ने जीएसटी सिस्टम को और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
इनमें शामिल हैं:
ई-इनवॉइस सिस्टम
डेटा एनालिटिक्स के जरिए फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पर रोक
जीएसटी नेटवर्क (GSTN) की तकनीकी मजबूती
नियमित ऑडिट और सख्त निगरानी
इन सुधारों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। टैक्स चोरी पर लगाम लगी है और ईमानदारी से टैक्स भरने वालों की संख्या बढ़ी है।
राज्यों के लिए भी राहत की खबर
जीएसटी कलेक्शन बढ़ने का सीधा फायदा राज्यों को भी मिलता है। केंद्र सरकार समय पर राज्यों को उनका हिस्सा ट्रांसफर कर पाती है, जिससे राज्यों को:
विकास योजनाएं चलाने में सहूलियत
कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में आसानी
बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाने का मौका
मजबूत टैक्स कलेक्शन से केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन भी बेहतर रहता है।
अर्थव्यवस्था की सेहत का संकेत
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी कलेक्शन केवल टैक्स का आंकड़ा नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक नब्ज को दिखाता है।
जब खपत बढ़ती है, उद्योग उत्पादन करता है और सेवाओं की मांग रहती है, तभी टैक्स कलेक्शन में इजाफा होता है।
दिसंबर 2025 का आंकड़ा यह दर्शाता है कि:
उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है
बाजार में मांग बनी हुई है
रोजगार और आय के अवसर स्थिर हैं
आने वाले महीनों के लिए क्या संकेत?
अगर यही ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में सरकार को बजट प्रबंधन में और मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों को उम्मीद है कि:
वित्त वर्ष के अंत तक जीएसटी कलेक्शन नए रिकॉर्ड बना सकता है
पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी होगी
आर्थिक विकास दर को समर्थन मिलेगा
हालांकि, वैश्विक हालात और महंगाई जैसे कारकों पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
दिसंबर 2025 का जीएसटी कलेक्शन भारत की आर्थिक मजबूती की एक अहम तस्वीर पेश करता है। 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली यह साबित करती है कि टैक्स सिस्टम में सुधार, बेहतर अनुपालन और मजबूत घरेलू मांग का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
सरकार, उद्योग और आम जनता—तीनों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
India’s GST collection for December 2025 crossed Rs 1.74 trillion, highlighting strong economic growth, improved tax compliance, and rising consumer demand. The increase in GST revenue compared to December 2024 reflects a resilient Indian economy, supported by manufacturing, services, and festive season consumption. This robust GST performance strengthens government finances and supports future development spending.



















