( देखें पूरा वायरल वीडियो)देवबंद में इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा पर विवाद: वायरल वीडियो, कार्रवाई और सवालों के बीच सच की तलाश!

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AIN NEWS 1: देवबंद में तैनात रहे इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा से जुड़ा मामला पिछले कुछ दिनों में अचानक सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ और कुछ ही घंटों में प्रशासन ने उन्हें लाइन हाज़िर कर दिया। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में नाराज़गी है, जबकि दूसरी ओर कई सवाल भी खड़े हो गए हैं—क्या वीडियो सही है? क्या इसे एडिट किया गया? और क्या इतनी जल्दी कार्रवाई होना उचित था?

देखे वायरल वीडियो 

इस रिपोर्ट में उपलब्ध तथ्यों, मीडिया में आई सूचनाओं और स्पष्ट रूप से क्या-क्या पता है तथा क्या अभी भी अस्पष्ट है—इन सभी को व्यवस्थित रूप में समझने की कोशिश की गई है।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

स्थानीय समाचार साइटों और कई डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर यह खबर प्रकाशित हुई कि देवबंद कोतवाली के प्रभारी इंस्पेक्टर नरेंद्र (कुमार) शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में वे कथित तौर पर कहते दिख रहे हैं कि “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता” और यह भी कि आतंकवाद किसी एक समुदाय का गुण नहीं है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी लिखा गया कि उन्होंने उदाहरण देते हुए ‘हिंदू’ संदर्भ का उल्लेख किया, जिसकी वजह से वीडियो के वायरल होने के बाद विवाद और तेज हो गया। वीडियो सामने आते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया।

हालाँकि यह स्पष्ट है कि वीडियो ही इस पूरी कार्रवाई की मुख्य वजह रहा, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यह वीडियो किस संदर्भ में रिकॉर्ड हुआ और क्या इसमें कोई एडिटिंग की गई।

अधिकारी का दावा: वीडियो एडिट किया गया

कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल प्लेटफॉर्मों पर यह बात सामने आई कि इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा ने स्वयं यह आरोप लगाया कि उनका वीडियो एडिट करके वायरल किया गया। उनके अनुसार बातचीत के असली संदर्भ को हटाकर केवल कुछ हिस्सों को जोड़कर ऐसा वीडियो बनाया गया जिससे अर्थ बदल जाए।

हालाँकि, यह दावा अधिकारी ने किया है, लेकिन इसके समर्थन में अभी तक कोई सार्वजनिक जांच रिपोर्ट या आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। न किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच की जानकारी सार्वजनिक है और न ही किसी एफआईआर का विवरण उपलब्ध है।

इसी वजह से यह दावा अभी केवल दावा भर है—न पूरी तरह सिद्ध, न पूरी तरह खंडित।

प्रशासनिक कार्रवाई पर भी कई सवाल

स्थानीय खबरों के अनुसार सहारनपुर/देवबंद जिले के एसएसपी ने वीडियो को गंभीरता से लेते हुए अधिकारी को उनके पद से हटा दिया। मीडिया रिपोर्टों में एसएसपी का नाम आशीष तिवारी बताया गया है।

लेकिन यहाँ एक बड़ी बात सामने आती है—अभी तक सार्वजनिक डोमेन में कोई ऑफिशियल विभागीय आदेश, प्रेस रिलीज़, या लिखित अनुशासनात्मक आदेश उपलब्ध नहीं है। आम तौर पर, जब किसी अधिकारी पर कार्रवाई होती है, तो पुलिस विभाग इसके बारे में एक संक्षिप्त नोट जरूर जारी करता है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई दस्तावेज़ दिखा नहीं है।

यह स्थिति जानकारी को अधूरा बनाती है और इसी कारण यह सवाल उठता है कि क्या कार्रवाई केवल वायरल वीडियो के आधार पर की गई, या इसके पीछे कोई और वजह थी जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया?

क्या-क्या जानकारी अभी भी अस्पष्ट है?

इस पूरे मामले में कुछ बातें साफ़ तौर पर दिखती हैं, जबकि कुछ बिंदु अभी भी धुंधले हैं।

जो स्पष्ट है:

वीडियो वायरल हुआ

उसी के आधार पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई हुई

स्थानीय जनता में निर्णय को लेकर रोष है

इंस्पेक्टर ने दावा किया कि वीडियो एडिटेड है

जो स्पष्ट नहीं है:

क्या वीडियो का फोरेंसिक या तकनीकी विश्लेषण कराया गया?

क्या विभागीय जांच शुरू की गई है?

क्या डीजीपी ऑफिस या सहारनपुर पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान जारी किया?

क्या कोई FIR दर्ज हुई, या यह केवल सोशल मीडिया विवाद के आधार पर लिया गया एक त्वरित निर्णय है?

इन सवालों के जवाब अभी उपलब्ध सूचनाओं में नहीं मिलते।

स्थानीय जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया

देवबंद में यह मामला केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रहा—यह एक भावनात्मक मुद्दा बन गया है। स्थानीय नागरिकों और कई पत्रकारों ने कहा कि इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा का व्यवहार हमेशा निष्पक्ष और सहयोगी रहा है। उनकी छवि एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय अधिकारी की रही है, जो हर फरियादी की समस्या तुरंत सुनते थे।

इसीलिए जब उन्हें लाइन हाजिर किया गया, तो लोगों में यह भावना उभरकर सामने आई कि शायद उन्हें किसी राजनीतिक या निजी प्रतिद्वंद्विता का शिकार बनाया गया हो।

सोशल मीडिया पर भी कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल एक वीडियो के आधार पर यह कार्रवाई करना उचित था, जबकि उसकी सत्यता की जांच भी नहीं हुई।

आगे क्या हो सकता है?

चूँकि कोई आधिकारिक बयान अभी तक उपलब्ध नहीं है, इसलिए अगले कदम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यदि विभागीय आदेश सामने आते हैं या कोई जांच रिपोर्ट जारी होती है, तो यह पता चल सकेगा कि वीडियो कितना सही था और कार्रवाई क्यों की गई।

हलांकि, जनभावना को देखते हुए यह संभव है कि यह मामला आगे किसी उच्च स्तर तक पहुंचे, क्योंकि लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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