AIN NEWS 1: देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। यह कोई आम आतंकवादी गिरोह नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और समाज में सम्मानित माने जाने वाले लोगों का ऐसा मॉड्यूल है, जो आतंक की साजिशें “व्हाइट कॉलर” के पीछे से रच रहा था। इस मॉड्यूल में शामिल लोग डॉक्टर और शिक्षित प्रोफेशनल थे, जो अपनी डिग्री और पहचान का इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए कर रहे थे।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की अगुवाई में चल रहे एक बड़े इंटर-स्टेट ऑपरेशन के तहत इस “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” का भंडाफोड़ किया गया है। अब तक की कार्रवाई में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल हैं। इनके पास से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री, कई हथियार और संवेदनशील दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं।
लखनऊ से महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी
इस मॉड्यूल से जुड़ी ताज़ा गिरफ्तारी लखनऊ की एक महिला डॉक्टर की हुई है, जिनकी पहचान डॉ. शाहीन शाहिद के रूप में की गई है। उन्हें श्रीनगर हवाई मार्ग से लाकर पुलिस ने कस्टडी में लिया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन की कार से AK-47 राइफल बरामद की गई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डॉ. शाहीन इस केस में गिरफ्तार की गई तीसरी डॉक्टर हैं। जांच एजेंसियां इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर डॉक्टर जैसे पेशेवर लोग आतंकवादियों के संपर्क में कैसे आए।
पहले से गिरफ्तार डॉक्टरों की जानकारी
इससे पहले दो अन्य डॉक्टरों की गिरफ्तारी हो चुकी है —
1. डॉ. मुज़म्मिल गनई, जो हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे।
2. डॉ. अदील अहमद राथर, जिन्हें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था।
दोनों ही उच्च शिक्षित और समाज में सम्मानित माने जाते थे, लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि वे गुप्त रूप से आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे।
आतंक का ‘व्हाइट कॉलर’ नेटवर्क
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा मॉड्यूल आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGH) से जुड़ा हुआ है। इस नेटवर्क का तरीका पारंपरिक आतंकवादियों से बिल्कुल अलग था। ये लोग बंदूक लेकर नहीं निकलते थे, बल्कि अपने ज्ञान, तकनीकी कौशल और सामाजिक प्रतिष्ठा का उपयोग कर आतंक की योजनाएँ बनाते थे।
“व्हाइट कॉलर टेरर” का मतलब यही है — ऐसे आतंकवादी जो खुद को आम नागरिकों के बीच शिक्षित, सभ्य और पेशेवर के रूप में पेश करते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे देश के खिलाफ साजिश रचते हैं।
2,900 किलो विस्फोटक बरामद
अब तक की तलाशी में पुलिस ने 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री जब्त की है, जो किसी बड़े हमले की तैयारी का संकेत देती है। इसके अलावा कई अवैध हथियार और संवेदनशील दस्तावेज़ भी बरामद हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामद किए गए दस्तावेजों में देश के बड़े शहरों के नक्शे और महत्वपूर्ण स्थानों से जुड़े विवरण मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क कश्मीर से लेकर हरियाणा, यूपी और लखनऊ तक सक्रिय था। उनका लक्ष्य था — “व्हाइट कॉलर कवर” में रहकर देश के प्रमुख शहरों में बड़े हमले की तैयारी करना।
कैसे हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क का खुलासा जम्मू-कश्मीर में एक गुप्त सूचना के बाद हुआ। पुलिस ने पहले कश्मीर घाटी में छापेमारी की, जहां से कुछ डिजिटल सबूत मिले। इन्हीं सुरागों के आधार पर फरीदाबाद, सहारनपुर और लखनऊ में छापेमारी की गई, जिससे पूरा मॉड्यूल सामने आ गया।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि गिरफ्तार डॉक्टरों ने अपने प्रोफेशनल नेटवर्क और मेडिकल सप्लाई चैन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को छुपाने के लिए किया। कई बार यह सामग्री अस्पतालों या लैब की डिलीवरी के नाम पर भेजी जाती थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा
इस केस ने सुरक्षा एजेंसियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आतंकवाद अब किस रूप में सामने आ रहा है। अब यह केवल हथियार उठाने वालों का खेल नहीं रहा, बल्कि शिक्षित और प्रशिक्षित लोग भी इस रास्ते पर आ रहे हैं। यह “ब्रेनवॉश” और वैचारिक आतंकवाद का नया चेहरा है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) इस मामले को अत्यंत गंभीरता से देख रहे हैं। फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह जांच की जा रही है कि क्या इनके संपर्क विदेश में बैठे आतंकी सरगनाओं से भी थे।
तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी और 2,900 किलो विस्फोटक की बरामदगी इस बात का संकेत है कि आतंक अब “व्हाइट कॉलर” के रूप में हमारे बीच मौजूद है। यह मामला सिर्फ एक आतंकी साजिश नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि शिक्षा और प्रोफेशनलिज़्म का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है।
जांच एजेंसियों के लिए यह चुनौती है कि वे न केवल बंदूक वाले आतंकियों पर नजर रखें, बल्कि उन पर भी जो सूट-बूट पहनकर साजिश रचते हैं।
In a major anti-terror operation, the Jammu and Kashmir Police exposed a white collar terror module involving three doctors and several educated professionals. The suspects, linked to Jaish-e-Mohammed (JeM) and Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGH), were arrested from Lucknow, Faridabad, and Saharanpur. Authorities recovered 2,900 kg explosives, AK-47 rifles, and sensitive documents. This shocking case reveals how educated professionals are being used to execute terror activities in India under the guise of respectability, marking a dangerous new trend of white collar terrorism.


















