AIN NEWS 1: रामपुर में सोमवार दोपहर एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आज़म खान तथा उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। वर्षों से चल रहे दो पैन कार्ड मामले में अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात साल की कैद और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। फैसले के तुरंत बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला उस समय सामने आया था जब रामपुर शहर के विधायक आकाश सक्सेना ने आज़म खां और उनके बेटे पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आज़म ने दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाए और उनमें अलग-अलग जन्मतिथि दर्शाई गई थी। सक्सेना के अनुसार, यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन था, बल्कि यह दस्तावेज़ों की गलतबयानी और पहचान छिपाने से जुड़े गंभीर आरोप भी थे।
शिकायत दर्ज होने के बाद मामला लंबे समय तक जांच और सुनवाई में रहा। आखिरकार सोमवार को अदालत ने दोनों पिता-पुत्र को दोषी माना और कड़ी सजा सुनाई।
अदालत का फैसला
एमपी-एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिसके आधार पर दोनों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने:
7 साल की कैद
50,000 रुपये का जुर्माना
तुरंत न्यायिक हिरासत का आदेश जारी कर दिया।
फैसले के बाद कोर्ट परिसर में सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कई समर्थकों के चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि यह फैसला आज़म खान और उनके परिवार के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक माहौल में हलचल
फैसले के बाद विधायक आकाश सक्सेना ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने कानून के दायरे में रहकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा—
“मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, बस इतना कि आज़म खान के खिलाफ जो भी कार्रवाई हुई है, वह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन यह भी सच है कि अत्याचार चाहे कितना भी बढ़े, एक न एक दिन खत्म हो ही जाता है।”
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के समर्थक और स्थानीय लोगों में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोग इसे कानून की जीत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं।
अज़म खान और अब्दुल्ला – विवादों का पुराना रिश्ता
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और अक्सर विवादों में भी रहे हैं। भूमि घोटाले से लेकर झूठे दस्तावेज़ों के मामले, कई कानूनी लड़ाइयाँ अभी भी जारी हैं। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म की राजनीतिक शुरुआत भी विवादों से घिरी रही। दो पैन कार्ड और गलत जन्मतिथि का मामला इसी का हिस्सा है।
दोनों पिता-पुत्र पहले भी कई मामलों में आरोपों का सामना कर चुके हैं, और अब यह फैसला उनके राजनीतिक करियर को और प्रभावित कर सकता है।
फैसले के बाद क्या आगे होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आज़म खान और अब्दुल्ला के पास ऊपरी अदालत में अपील का विकल्प मौजूद है। अगर वे चाहें तो जिला अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। फिलहाल दोनों को रामपुर जेल भेजा गया है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जाएगा।
जनता की राय
रामपुर में फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। एक ओर लोग कह रहे हैं कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो। वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई मान रहे हैं।
स्थानीय निवासी कहते हैं कि पिछले कई वर्षों से इस मामले को लेकर चर्चाएं थीं और कई बार सुनवाई भी हो चुकी थी। कोर्ट के इस फैसले से लोगों के बीच एक तरह की जिज्ञासा और चर्चा दोनों देखने को मिल रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
दो पैन कार्ड का मामला दिखने में भले छोटा लगे, लेकिन कानूनी भाषा में यह पहचान की धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेज़ों की गलत जानकारी, और कर नियमों के उल्लंघन से जुड़ी गंभीर धारा के तहत आता है। इसलिए अदालत ने इस मामले में कठोरता बरतते हुए अधिकतम सजा सुनाई।
आजम खान और अब्दुल्ला आज़म का यह मामला यूपी की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी है। अदालत का फैसला आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में दोनों क्या कानूनी कदम उठाते हैं और न्यायपालिका का आगे का रुख क्या रहता है।
फिलहाल, दोनों रामपुर जेल भेज दिए गए हैं और सपा कार्यकर्ताओं में मायूसी साफ नजर आ रही है।
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