AIN NEWS 1: सोनिया गांधी को लेकर एक पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वे भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में कैसे शामिल हो गईं? यह विवाद अचानक इसलिए गर्माया है क्योंकि दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले पर सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

हालांकि यह मुद्दा नया नहीं है। कई दशकों पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों के आधार पर यह बहस पहले भी उठ चुकी है। लेकिन इस बार मामला अदालत के दरवाज़े तक पहुँच गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।
मामला है क्या?
याचिकाकर्ता का दावा है कि 1980–81 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम दर्ज था। यही वह समय था जब वे अभी भारतीय नागरिक नहीं बनी थीं। उनके भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की आधिकारिक तिथि 30 अप्रैल 1983 बताई जाती है। आरोप यह है कि नागरिकता के बिना मतदाता सूची में शामिल होना कानूनन गलत था, क्योंकि वोटर बनने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
इन दावों के आधार पर याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उस समय मतदाता सूची में नाम दर्ज करने में कथित फर्जीवाड़ा हुआ। हालांकि, यह केवल आरोप है, जिसकी कानूनी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले कोर्ट ने क्यों खारिज किया था मामला?
दिल्ली की एक निचली अदालत ने सितंबर 2025 में इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसमें ठोस प्रमाण नहीं थे। अदालत की टिप्पणी थी कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेज़ “अप्रमाणित” थे और उनमें किसी प्रकार की आधिकारिक मुहर नहीं थी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आपराधिक मामले के लिए जो आवश्यक तत्व होते हैं—जैसे कि ठोस सबूत, विश्वसनीय दस्तावेज़ और स्पष्ट फर्जीवाड़े के संकेत—वे इस याचिका में नजर नहीं आए। इसलिए अदालत ने इसे “आधारहीन दावा” मानकर खारिज कर दिया।
फिर मामला कैसे खुल गया?
याचिकाकर्ता इस फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। इसी पर सुनवाई करते हुए राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट की यह कार्रवाई दर्शाती है कि वह मामले की गहराई से जांच करना चाहती है।
नोटिस का मतलब यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं, बल्कि इसका मतलब है कि अदालत यह जानना चाहती है कि 1980 की मतदाता सूची में नाम जुड़ने की प्रक्रिया क्या थी और यह कैसे हुआ।
राजनीतिक पारा क्यों चढ़ा हुआ है?
सोनिया गांधी देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से एक हैं, और कांग्रेस पार्टी की सबसे अहम नेता रही हैं। ऐसे में उनके नाम से जुड़े किसी भी पुराने रिकॉर्ड का विवाद आसानी से राजनीतिक बहस का मुद्दा बन जाता है।
भाजपा और विपक्षी दल इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिये से देख रहे हैं।
कुछ राजनीतिक नेता इसे “गंभीर मामला” बता रहे हैं
जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह “राजनीतिक उद्देश्य से उठाया गया पुराना आरोप” है
कानूनी स्थिति क्या है?
फिलहाल, कोई भी अदालत यह नहीं कह रही कि सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले अवैध रूप से वोटर बनकर किसी कानून का उल्लंघन किया था।
यह एक आरोप है
अदालत अभी जांच के शुरुआती चरण में है
और मामले के तथ्य दोबारा परखे जाएंगे
जब तक अदालत स्पष्ट रूप से यह न कह दे कि आरोप सही हैं या गलत, तब तक इस मामले को विवाद या दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता का कहना है कि उसके पास 1980–81 की मतदाता सूची की फोटोकॉपी है जिसमें सोनिया गांधी का नाम दिखाया गया है। हालांकि यह दस्तावेज़ प्रमाणित या आधिकारिक रूप से जारी नहीं है।
अदालत इस बात की जांच कर रही है कि—
यह दस्तावेज़ असली है या नहीं
मतदाता सूची में नाम कब और कैसे जोड़ा गया
क्या उस समय नाम शामिल करने की प्रक्रिया में कोई गलती हुई थी
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को “राजनीतिक ड्रामा” कहा है। उसका दावा है कि सोनिया गांधी का नागरिकता प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी और यह विवाद बिना किसी आधार के बार-बार उठाया जाता है।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि मतदाता सूची का काम स्थानीय प्रशासन करता है, और यदि 40–45 साल पुराने किसी रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी है, तो उसमें व्यक्तियों का दोष साबित करना आसान नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब अदालत दोनों पक्षों का जवाब सुनेगी और यह तय करेगी कि क्या मामला आगे बढ़ाने लायक है या नहीं।
यदि कोर्ट को लगता है कि रिकॉर्ड की जांच जरूरी है, तो पुलिस से पूछताछ और दस्तावेज़ों की जांच का आदेश दिया जा सकता है।
यदि कोर्ट को शिकायत में दम नहीं लगेगा, तो मामला फिर से खारिज किया जा सकता है।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम फैसला किस दिशा में जाएगा।
फिलहाल इस विवाद का सच अदालत की जांच के बाद ही सामने आएगा।
अभी तक उपलब्ध तथ्य यही कहते हैं कि—
मामला आरोपों पर आधारित है
पहले कोर्ट इसे खारिज कर चुकी है
लेकिन अब इसे पुनः सुना जा रहा है
यानी, यह मुद्दा अभी कानूनी प्रक्रिया के बीच में है, निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
The Sonia Gandhi voter list controversy has resurfaced after a Delhi court issued a notice seeking clarification on how her name appeared in the 1980 electoral roll before she officially obtained Indian citizenship in 1983. This article explains the full case, legal proceedings, political reactions, and the background of the alleged voter registration controversy, ensuring readers get a complete and factual understanding.


















