AIN NEWS 1 पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही भाजपा और जदयू गठबंधन के भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। शाह ने अपने दौरे के पहले दिन कई महत्वपूर्ण बयान दिए, जिनसे बिहार की सियासत में नई हलचल मच गई।

मुख्यमंत्री पद पर अमित शाह का बयान
पटना में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में शामिल हुए अमित शाह से जब पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री चेहरा होंगे, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा –
“मैं कौन होता हूं किसी को मुख्यमंत्री बनाने वाला? एनडीए में कई दल हैं। चुनाव के बाद एनडीए विधायक दल ही तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।”
शाह ने यह भी कहा कि भाजपा अपने सहयोगियों का पूरा सम्मान करती है, और अंतिम फैसला जनता के जनादेश और एनडीए दलों की सहमति से ही होगा।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ेगा एनडीए
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि एनडीए चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने वर्षों से बिहार के विकास के लिए काम किया है और भाजपा उनके साथ मिलकर स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
जब उनसे पूछा गया कि “अगर जदयू की सीटें कम आईं तो क्या नीतीश फिर मुख्यमंत्री बनेंगे?” इस पर शाह ने जवाब दिया –
“भाजपा की सीटें आज भी अधिक हैं। 2020 में भी ऐसा हुआ था, लेकिन तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह पर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला। वे देश के प्रमुख समाजवादी नेताओं में से एक हैं और कांग्रेस में कभी स्थायी रूप से नहीं रहे।”
शाह ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का कांग्रेस के साथ जुड़ाव महज “ढाई साल” का रहा, इसलिए उन्हें हमेशा एक स्वतंत्र समाजवादी नेता के रूप में देखा जाना चाहिए।
भाजपा-जदयू का समीकरण और सीटों का गणित
वर्तमान में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है। भाजपा 84 सीटों के साथ गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि जदयू के पास 48 सीटें हैं। यानी भाजपा के पास अपने सहयोगी दल से लगभग दो गुनी सीटें हैं। इसके बावजूद पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि गठबंधन में सहयोगियों का सम्मान सर्वोपरि है।
शाह के इस बयान से यह संकेत मिला कि भाजपा नीतीश कुमार के साथ तो चुनाव लड़ेगी, लेकिन परिणामों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
शाह की संगठनात्मक बैठकों का दौर
पटना पहुंचने के बाद अमित शाह ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों और चुनाव समिति के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में टिकट वितरण, सीट शेयरिंग और आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि भाजपा को गठबंधन धर्म निभाते हुए, संगठन की मजबूती पर फोकस करना चाहिए ताकि चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित हो सके।
बिहार दौरे का अगला कार्यक्रम
अमित शाह का तीन दिवसीय दौरा बेहद व्यस्त रहने वाला है। शुक्रवार को वे सारण जिले के तरैया और अमनौर में आयोजित नामांकन सभाओं में हिस्सा लेंगे। इन कार्यक्रमों में शाह पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे।
इसके बाद वे पटना के ज्ञान भवन में आयोजित बुद्धिजीवी सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां वे बिहार के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।
शाह का अंदाज़ और आत्मविश्वास
अमित शाह ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि उन्हें “सपने देखने की आदत नहीं है, वे आराम से सोते हैं।” इस टिप्पणी ने वहां मौजूद सभी लोगों को मुस्कुरा दिया।
उनका यह बयान संकेत देता है कि भाजपा नतीजों के प्रति आश्वस्त है और किसी जल्दबाजी में मुख्यमंत्री पद को लेकर बयानबाजी नहीं करना चाहती।
राजनीतिक संदेश और असर
अमित शाह के इस दौरे को भाजपा और एनडीए के भीतर संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए भी शाह ने यह संदेश दिया कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला एनडीए के सभी दल मिलकर करेंगे। यह बयान भाजपा को लचीलापन और सहयोग की छवि देने वाला है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का यह दौरा न केवल चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए है, बल्कि इसका उद्देश्य यह भी है कि बिहार की जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि एनडीए एकजुट है और सत्ता में लौटने के लिए तैयार है।
Amit Shah’s Bihar visit has stirred political discussions across the state. During his three-day tour, Shah clarified that the NDA legislature party will decide the next Chief Minister of Bihar after the assembly elections. While he confirmed that the NDA will contest under Nitish Kumar’s leadership, he also emphasized mutual respect among BJP-JDU alliance partners. With BJP holding 84 seats and JDU 48, the balance of power remains in BJP’s favor, but Shah’s statement reflects the party’s focus on unity and collective decision-making in Bihar politics.


















