AIN NEWS 1: नोएडा की एक आईटी कंपनी से जुड़ी एक दिलचस्प लेकिन विवादित घटना हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी के एक कर्मचारी ने इस पूरी घटना को Reddit पर साझा किया, जिसके बाद लोग वर्क कल्चर को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में हाल ही में निम्न-स्तरीय टियर-1 और अच्छे टियर-2 कॉलेजों से नए इंटर्नों का एक बैच शामिल हुआ था। सभी इंटर्न अभी ऑफिस के माहौल और कामकाज को समझने की प्रक्रिया में थे।

इंटर्न्स का नया बैच और ऑफिस संस्कृति
कर्मचारी के अनुसार, कंपनी ने इस साल युवा और उत्साही इंटर्न्स को मौका दिया है, जो अपने करियर की शुरुआत करने जा रहे हैं। ये सभी नए इंटर्न ट्रेनिंग ले रहे थे और ऑफिस की दैनिक दिनचर्या से तालमेल बैठा रहे थे। कई इंटर्न पहली बार किसी कॉर्पोरेट ऑफिस में काम कर रहे थे, इसलिए उनके लिए हर छोटी चीज भी नया अनुभव थी — चाहे वह मीटिंग का तरीका हो, टीम वर्क हो या ऑफिस के बुनियादी संसाधन।
कर्मचारी और सीईओ की अनौपचारिक बातचीत
कर्मचारी ने बताया कि एक दिन ऑफिस में अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने सीईओ से एक बेहद सामान्य-सी बात पूछी —
“क्या ऑफिस में एक अच्छी क्वालिटी की कॉफी मशीन लगवाई जा सकती है?”
कॉफी मशीन की मांग आज के समय में लगभग हर आईटी ऑफिस में आम बात मानी जाती है, लेकिन सीईओ का जवाब कई कर्मचारियों के लिए चौंकाने वाला था।
सीईओ का विवादित बयान
कर्मचारी के अनुसार, सीईओ ने कहा:
“अगर हम ऑफिस में बहुत अच्छी कॉफी मशीन लगा देंगे, तो इंटर्न्स और नए कर्मचारी कॉफी पीने में ज्यादा समय बिताएंगे। इससे काम की गति धीमी होगी।”
सीईओ का यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग थोड़े असहज भी हुए और हैरान भी। कई कर्मचारियों को लगा कि यह बात सामान्य और हल्की-फुल्की हो सकती थी, लेकिन सीईओ ने इसे संसाधनों के दुरुपयोग और उत्पादकता के चश्मे से देखा।
Reddit पर पोस्ट करने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया
जब कर्मचारी ने यह पूरा अनुभव Reddit पर साझा किया, तो पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। लोग इस बात पर बहस करने लगे कि आखिर ऑफिस में एक कॉफी मशीन लगाने से कर्मचारियों की उत्पादकता कैसे प्रभावित हो सकती है?
कुछ लोगों ने लिखा कि:
अच्छी कॉफी अच्छी ऊर्जा देती है
काम के बीच में छोटा सा ब्रेक मानसिक तनाव कम करता है
आरामदायक माहौल कर्मचारी को कंपनी से जोड़कर रखता है
वहीं कुछ ने सीईओ के बयान को अव्यवहारिक बताया और कहा कि यह ऑफिस में निगेटिव वर्क कल्चर का संकेत है।
कॉर्पोरेट वर्क कल्चर पर बड़े सवाल
इस घटना के बाद लोग यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों भारत की कई कंपनियों में कर्मचारियों पर दबाव इतना ज्यादा रहता है कि एक साधारण सुविधा की मांग भी “उत्पादकता में कमी” के नजरिए से देखी जाती है।
कई लोगों का कहना था कि विदेशी कंपनियों में यह माना जाता है कि आरामदायक कामकाजी वातावरण कर्मचारियों की efficiency बढ़ाता है, जबकि कई भारतीय कंपनियों में अभी भी पुराने तरीके से कर्मचारियों पर काम का बोझ डाला जाता है।
इंटर्न्स के मन में क्या संदेश जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पहली नौकरी या इंटर्नशिप नौकरी्पेशे की मानसिकता बनाती है। अगर इंटर्न्स को शुरुआत में ही ऐसा माहौल मिले जहां छोटी-छोटी सुविधाएँ भी “काम का दुश्मन” समझी जाएँ, तो इससे ऑफिस को लेकर उनका दृष्टिकोण प्रभावित हो सकता है।
एक आरामदायक और खुला माहौल टीम को बेहतर perform करने के लिए प्रेरित करता है, जबकि अत्यधिक नियंत्रण या संकीर्णता काम की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
कर्मचारी का व्यक्तिगत अनुभव
Reddit पर पोस्ट करने वाले कर्मचारी ने यह भी बताया कि:
उनकी मांग सिर्फ एक नई और बेहतर कॉफी मशीन की थी
इसका उद्देश्य सिर्फ कर्मचारियों को बेहतर सुविधा देना था
कॉफी मशीन लगाने से काम धीमा होने की धारणा उन्हें असंगत लगी
उन्होंने यह भी लिखा कि कंपनी में पहले से ही कई जगह ऐसे संसाधन हैं जो कर्मचारियों को बेहतर काम करने में मदद करते हैं, इसलिए कॉफी मशीन जैसी छोटी चीज पर इतना विवाद होना समझ से परे है।
ऑफिस सुविधा पर निवेश का महत्व
कॉर्पोरेट विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑफिस में छोटे-छोटे सुधार कर्मचारियों की संतुष्टि और काम के प्रति उनका रुझान बढ़ाते हैं। जैसे:
अच्छी कॉफी
साफ और आरामदायक वर्कस्पेस
ब्रेकआउट एरिया
मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट
ये चीजें आज के समय में सिर्फ “फैसिलिटी” नहीं बल्कि कर्मचारी वेलनेस का हिस्सा मानी जाती हैं।
नोएडा आईटी कंपनी की यह घटना छोटी लग सकती है, लेकिन इससे जुड़े सवाल बड़े हैं —
क्या भारत के ऑफिसों में संसाधनों को लेकर मानसिकता बदलने की जरूरत है?
क्या कर्मचारी आरामदायक माहौल के हकदार नहीं?
क्या एक कॉफी मशीन भी उत्पादकता पर असर डाल सकती है?
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